नोएडा। नोएडा में 2600 से अधिक फर्जी कंपनियों के जरिए अंजाम दिए गए 15000 करोड़ के घोटाले की परतें जैसे-जैसे खुलती जा रही हैं, वैसे-वैसे चौंकाने वाली बात सामने आ रही हैं। गिरफ्तार किए गए इन ठगों ने ठेली लगाने वालों से लेकर इंजीनियर तक के नाम पर फर्जी कंपनियां बनाई थी। नोएडा पुलिस की आईटी सेल ने फर्जी कंपनी बनाकर सरकार को लाखों करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले गिरोह की जांच शुरू कर दी है। आरोपियों से बरामद कंपनियों की सूची में ज्यादातर को खोलने के लिए नारियल का ठेला लगाने वाले, सब्जी विक्रेता, जूस बेचने वाले, दिहाड़ी मजदूर, इंजीनियर और डॉक्टर के पैन का डेटा का इस्तेमाल किया गया।
एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि एमएस ट्रेडर्स, आरोरा इंटर प्राईजेज, डीके ट्रेडर्स, एमएम इंटरप्राइजेज, कोरिया इंटर प्राइज, रतन ट्रेडर्स, मनोज ट्रेडर्स, विपुल ट्रेडर्स, पटेल ट्रेडर्स और अर्चना ट्रेडर्स की जांच की गई। ज्यादातर कंपनियां कपड़े के इंपोर्ट, एक्सपोर्ट, लोहे के सामान, खिलौने, तेल, चिप्स, अचार और प्लास्टिक का सामान बनाने के लिए पंजीकृत की गई थीं। आरोपी एक कंपनी से एक महीने में 10 से 20 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग दिखा रहे थे। 25 कंपनियों में एक महीने के अदंर 50 करोड़ की जीएसटी बिलिंग दिखाई गई।
ठगी के लिए पंद्रह महीने तक एक कंपनी का इस्तेमाल : फर्जी कंपनियों को आरोपी महज 15 महीने तक ही ठगी के लिए इस्तेमाल करते थे। इन कंपनियों का पता ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से तैयार होता था। आरोपी किराना की दुकान चलाने वाले और आढ़ती तक को उनकी मांग पर फर्जी जीएसटी बिल दे रहे थे। इससे वे टैक्स अधिकारियों से बच जाते थे।
खुद को ही दे रहे थे वेतन : हर कंपनी में 20 से 35 कर्मचारी होने का दावा आरोपियों द्वारा किया जाता था। फर्म के खाते में निश्चित तिथि पर रकम ट्रांसफर की जाती थी। कुछ समय बाद यह रकम फिर से निकाल ली जाती थी। खुद को कागजों में आरोपी वेतन दे रहे थे। इस मामले में सात आरोपी अब भी फरार हैं। उनकी तलाश में शुक्रवार को पुलिस की टीम ने कई स्थानों पर दबिश दी, लेकिन कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी। वहीं, गिरफ्त में आए 14 आरोपियों को जिला अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जांच में सामने आया है कि दीपक मुरजानी के नेटवर्क और उसकी सीए पत्नी विनिता के दिमाग की उपज से ठगी का साम्राज्य खड़ा हुआ था। गिरफ्त में आया सरगना दीपक साल के अंत तक चार हजार सेल कंपनी रजिस्टर्ड कराने का लक्ष्य लेकर चल रहा था। ज्यादातर फर्म और कंपनी तीन से साढे चार लाख रुपये के बीच में बेची गई। फर्जी कंपनियों में जिन जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
टेरर फंडिंग का भी शक : पुलिस की तीन टीमें उसको वेरिफाई कर रही हैं। असम,मणिपुर और बंगाल में दबिश देने के लिए नोएडा पुलिस की 20 सदस्यीय टीम बनाई गई है। इस मामले में टेरर फंडिंग और हवाला के एंगल से भी जांच की जा रही है।
इस तरह किया फर्जीवाड़ा
अपर आयुक्त ग्रेड-2 (विशेष अनुसंधान शाखा) राज्यकर नोएडा राजाराम गुप्ता ने बताया कि जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में ऐसी व्यवस्था बनाई गई है, जिसमें पहले भुगतान किए गए जीएसटी के बदले में कंपनी को क्रेडिट मिल जाते हैं। ये क्रेडिट कंपनी के जीएसटी अकाउंट में दर्ज हो जाते हैं। फर्जी कंपनियों के द्वारा वास्तविक माल का आदान-प्रदान नहीं किया जाता है, बल्कि जाली बिल पर करोड़ों रुपये का लेनदेन दिखाया जाता है। कंपनियां एक-दूसरे से फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का आदान प्रदान करती हैं। व्यापार दिखाने वाली अंतिम फर्म सरकार से इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड का दावा कर देती है। रिफंड के तौर पर कंपनी के खाते में सरकार रुपये जमा कर देती है। फर्जी कंपनियां बिना व्यापार किए करोड़ों रुपये इनपुट टैक्स क्रेडिट लेकर सरकार को चूना लगाती हैं।
एक और रिपोर्ट दर्ज
ग्रेटर नोएडा निवासी व्यवसायी सुमित यादव ने गुरुवार को सेक्टर-20 थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनके पैन कार्ड का इस्तेमाल कर आरोपियों ने यादव ट्रेडर्स के नाम से वीरभूमि पश्चिम बंगाल में फर्जी कपड़ा एक्सपोर्ट की कंपनी बनाई। कंपनी के जरिए आरोपियों ने दो महीने के अंदर पांच करोड़ रुपये की जीएसटी की बिलिंग दिखाई।
-लक्ष्मी सिंह, (पुलिस कमिश्नर, नोएडा) ने कहा, ”अन्य आरोपियों की जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपियों को लोगों का डेटा देने वालों के बारे में भी जानकारी एकत्रित की जा रही है।”







