दिल्ली के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने धर्मांतरण कार्यक्रम में उपस्थिति को लेकर हुए विवाद के बीच रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कार्यक्रम में कथित तौर पर हिंदू देवताओं की निंदा की गई थी। भाजपा ने गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर हमला करने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल किया है और उन पर “हिंदू विरोधी” होने का आरोप लगाया है।
गौतम ने ट्विटर पर साझा किए गए पत्र में कहा है कि वह व्यक्तिगत रूप से 5 अक्तूबर को हुए कार्यक्रम में शामिल हुए थे और इससे उनकी पार्टी से या उनके मंत्री होने का कोई लेना देना नहीं था। उन्होंने केजरीवाल व आप को निशाने पर लेने के लिए भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि भाजपा इस मुद्दे पर ‘गंदी राजनीति’ कर रही है।
गौतम ने कहा कि वह मंत्री पद से इस्तीफा दे रहे हैं ताकि उनकी वजह से उनके नेता केजरीवाल व आप पर कोई आंच नहीं आए। पिछले हफ्ते एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें गौतम ने शिरकत की थी। कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाने और हिंदू देवताओं को भगवान नहीं मानने की प्रतिज्ञा ली थी। दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि गौतम ने भाजपा के दबाव में इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि मंत्री का सिर्फ इस्तीफा ही काफी नहीं है और गौतम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए और उन्हें “हिंदू देवी-देवताओं की निंदा करने” के लिए पार्टी से निष्कासित किया जाना चाहिए।
भाजपा नेता ने कहा, “ इसके अलावा भ्रष्टाचार में लिप्त उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और मंत्री सत्येंद्र जैन से भी इस्तीफा लिया जाए।” मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि गौतम का इस्तीफा मुख्यमंत्री को मिल गया है और इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। मंत्री के तौर पर गौतम के पास समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, सहकारी समिति विभाग का जिम्मा था और वह गुरुद्वारा चुनाव के रजिस्ट्रार थे। वह सीमापुरी से विधायक हैं।






