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अब बैंक खातों के बिना डिजिटल भुगतान को मिलेगा बढ़ावा, मिलेंगी ये सुविधाएं

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
November 6, 2022
in व्यापार
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E-Rupee
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Reserve Bank of India ने एक नवंबर को अपनी डिजिटल करेंसी डिजिटल रुपया को लॉन्च कर दिया है. केंद्रीय बैंक (RBI) ने अभी होलसेल ट्रांजेक्शन के लिए डिजिटल रुपया (E-Rupee) जारी किया है. जिसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है. डिजिटल रुपया सरकारी प्रतिभूतियों में द्वितीयक बाजार लेन-देन निपटाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. उद्योग के हितधारकों का कहना है कि एक केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) बैंक खाते की आवश्यकता के बिना डिजिटल भुगतान तक पहुंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और केंद्रीय बैंक द्वारा जारी डिजिटल वॉलेट द्वारा पहुंच की सुविधा प्रदान की जाएगी. वित्त वर्ष 2013 के केंद्रीय बजट में इसकी घोषणा के बाद से, ई-रुपए का रोलआउट सबसे अधिक मांग वाले विकासों में से एक रहा है.

बीसीटी डिजिटल की सीईओ जया वैद्यनाथन ने कहा कि आरबीआई द्वारा डिजिटल रुपए के पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत डिजिटल भुगतान की दिशा में बेहतर कदम है. इसकी पहल कम मात्रा, उच्च-मूल्य वाले थोक (इंटरबैंक) खंड में शुरू की गई है, जहां से सीखने का उपयोग विश्वसनीय, निर्मित-से-पैमाने पर खुदरा भुगतान करने के लिए किया जाएगा. पायलट प्रोजेक्ट में एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी बैंक, यस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और आईसीआईसीआई बैंक सहित नौ बैंक शामिल हैं, जो सरकारी प्रतिभूतियों में द्वितीयक बाजार लेनदेन का निपटान करते हैं, जिससे निपटान जोखिम और लेनदेन लागत कम हो जाती है.

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इसके साथ ही कहा कि डिजिटल रुपए का रोलआउट पूरा होने से पारदर्शिता और कम परिचालन लागत सुनिश्चित करते हुए व्यापक श्रेणी के उपयोगकर्ताओं की भुगतान और वित्तीय जरूरतों को बढ़ावा देने की उम्मीद है, और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में नवाचार के लिए आरबीआई का समर्थन किया है.

वित्तीय समावेशन में होगा सुधार
भारत दुनिया में सबसे अधिक तकनीकी रूप से विकसित मुद्राओं में से एक है, और ई-रुपया इसे सच्चे डिजिटल भुगतानों में सबसे आगे रखेगा और वित्तीय समावेशन में सुधार करेगा. आरबीआई द्वारा समर्थित एक डिजिटल रुपये की लोकप्रियता क्रिप्टो जैसी अन्य निजी डिजिटल मुद्रा को वैधता लाने में मदद करेगी. हालांकि इसे कैसे लागू किया जाएगा, इस पर स्पष्टता को लेकर इंतजार करना होगा. यह डिजिटल मुद्रा की स्वीकृति की दिशा में एक सकारात्मक कदम है.

रूबा में सह-संस्थापक और मुख्य कानूनी और रणनीति अधिकारी अर्जुन खज़ांची के अनुसार, वित्त, सीबीडीसी एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जहां सरकार चुपचाप वित्तीय प्रणाली को बाधित करने के लिए काम कर रही है जो परंपरागत रूप से अपारदर्शी, नकदी पर निर्भर और अत्यधिक अक्षम है. सरकारी प्रतिभूतियों में बाजार लेनदेन के लिए पहला मामला उपयोग होने जा रहा है. यह कदम तरलता को भी बढ़ावा दे सकता है, लेनदेन लागत को कम करते हुए अक्षम और अनावश्यक प्रक्रियाओं को हटा सकता है. इससे प्रतिभागियों के बीच पारदर्शिता भी बढ़ेगी.

कानूनी भूमिका को बनाए रखने में मिलेगी मदद
इसके माध्यम से, सरकार को निपटान जोखिम को कम करने में भी सक्षम होने की उम्मीद है जो वित्तीय बाजारों में ब्लॉकचैन के लिए सबसे बड़े उपयोग के मामलों में से एक है. सीबीडीसी पर सरकार की निजता और प्रत्यक्ष नियंत्रण को लेकर कुछ आशंकाएं हैं. सीबीडीसी मौद्रिक नीति में डिजिटल भुगतान सार्वजनिक रूप से कानूनी भूमिका को बनाए रखने में मदद कर सकता है, जिससे उनके बाजारों में वित्तीय स्थिरता की रक्षा करने में केंद्रीय बैंकों की भूमिका सुनिश्चित हो सकेगी. यह नकद और निजी डिजिटल धन के लिए एक सार्वजनिक, डिजिटल विकल्प प्रदान करता है.

महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता हैं ई-रुपया
सेंट्रिकिटी वेल्थ टेक के संस्थापक भागीदार मनीष शर्मा के अनुसार, ई-रुपया सीबीडीसी बैंक खाते की आवश्यकता के बिना डिजिटल भुगतान तक पहुंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता हैं. इसके साथ ही कहा कि लॉन्च प्रक्रिया में वाणिज्यिक बैंकों और अन्य निजी हितधारकों (प्रौद्योगिकी सक्षम, व्यापारियों, उपयोगकर्ताओं) को शामिल करके, केंद्रीय बैंक भी स्वामित्व की व्यापक भावना को बढ़ावा देंगे, विस्थापन के डर का प्रबंधन करेंगे, और सफल बनाने की संभावना को बढ़ाएंगे. वहीं पेमी इंडिया के सीईओ और संस्थापक महेश शुक्ला का कहना है कि आरबीआई अन्य थोक लेनदेन और सीमा पार भुगतान पर ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद कर रहा है, जिसे आम जनता के लिए आसान बनाने के कदम के रूप में पेश किया जा सकता है.

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