Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

भारत को रूस को लेकर मजबूरी में उठाना पड़ेगा ये कदम?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
November 19, 2022
in राष्ट्रीय, विश्व
A A
modi-putin
19
SHARES
648
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली : यूरोपीय यूनियन और जी-7 समूह की ओर से घोषित प्राइस कैप की तारीख नजदीक आते ही भारतीय तेल कंपनियां रूस से तेल खरीदने में सावधानी बरतनी शुरू कर दी है. जी-7 और यूरोपीय यूनियन समूह ने घोषणा की थी कि 5 दिसंबर से रूस के तेल की एक कीमत तय कर दी जाएगी. रूस का तेल इस प्राइस कैप के भीतर ही खरीदा जा सकेगा.

सूत्रों के अनुसार, जी-7 प्राइस कैप मैकेनिज्म पर सरकार का रुख स्पष्ट नहीं होने के कारण भारतीय तेल कंपनियां सतर्क हैं. चीन की तेल कंपनियों ने पहले से ही रूस से तेल खरीद में कमी कर दी है. पिछले कुछ समय से भारतीय कंपनियां रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीद रही थीं लेकिन अब उनके सामने दुविधा खड़ी हो गई है.

इन्हें भी पढ़े

new car

पेट्रोल-डीजल कार खरीदने वालों के लिए बुरी खबर, गडकरी बोले- इनका कोई फ्यूचर नहीं

April 29, 2026
crude oil

तेल कंपनियों को हो सकता है 80 हजार करोड़ का घाटा, क्या बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

April 29, 2026
Strait of Hormuz

होर्मुज बंद रहने से भी भारत पर नहीं पड़ेगा असर!

April 29, 2026
India air defense

फ्रंटलाइन जंग के लिए सेना को मिलेंगे 83 आकाशतीर एयर डिफेंस कैरियर!

April 29, 2026
Load More

रूस के राजस्व को कम करना मकसद

जी-7 के सदस्य देश 2 सितंबर को रूस पर प्राइस कैप लगाने के लिए सहमत हुए थे. जबकि यूरोपीय यूनियन प्राइस कैप के प्रस्ताव पर अक्टूबर महीने के पहले सप्ताह में सहमत हुए थे. प्राइस कैप का मुख्य मकसद रूस के राजस्व को कम करना है. यूरोपीय यूनियन और जी-7 के इस कदम पर रूस ने चेतावनी दी है कि इस प्राइस कैप में शामिल होने वाले किसी भी देश को वह तेल आपूर्ति नहीं करेगा. कहा जा रहा है कि 5 दिसंबर से प्राइस कैप के लागू हो जाने के बाद रूस को नया तेल खरीददार खोजना पड़ सकता है.

भारतीय कंपनियों ने भी ऑर्डर देना किया बंद

रूस यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी देशों की ओर से रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद एशिया की तीन बड़ी तेल कंपनियां रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीद रही हैं. इन सभी तेल कंपनियों ने भी रूस से तेल खरीद में कमी कर दी है. दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफायनरी कंपनी रिलाइंस इंडस्ट्रीज ने भी 5 दिसंबर के बाद के लिए एक भी रूसी कार्गो का ऑर्डर नहीं दिया है. भारत पेट्रोलियम ने भी 5 दिसंबर के बाद एक भी रूसी कार्गो का ऑर्डर नहीं दिया है.

देश की टॉप तेल रिफाइन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने भी 5 दिसंबर के बाद की सभी तेल कार्गो शिपमेंट का ऑर्डर कई नियम और शर्तों के साथ दिया है.

विदेशी बैंकों की कार्रवाई का डर
सूत्रों के अनुसार, पश्चिमी देशों के वित्तीय प्रणाली और रिफाइन उत्पादों की बिक्री को देखते हुए रिलायंस विदेशी बैंकों की कार्रवाई की खतरे को देखते हुए सतर्क है. तेल कंपनियों का कहना है कि प्राइस मैकेनिज्म में कई प्रकार की दुविधाएं हैं. हमें पता नहीं है कि पेमेंट मैकेनिज्म और प्राइस कैप लेवल क्या होगा.

रूस और रोजनेफ्ट (Rosneft) की 49 फीसदी स्वामित्व वाली कंपनी नायरा ने अभी भी रूस से तेल खरीदना जारी रखा है. इसका परिणाम यह हुआ है कि विदेशी बैंकों ने नायरा से लेनदेन पर रोक लगा दी है. नायरा सिर्फ भारतीय बैंकों के साथ लेनदेन कर पा रही है.

भारतीय तेल निगम ने दिया विकल्प

सूत्रों के अनुसार, भारतीय तेल निगम (आईओसी) तेल खरीद को लेकर सतर्क रहना चाहता है. आईओसी का कहना है कि अगर भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को रूस से तेल खरीदने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो वे अपने तेल कान्ट्रैक्ट को पूरा करने के लिए मध्य पूर्व देशों के तेल आपूर्तिकर्ताओं के साथ भी नियम और शर्तों के साथ तेल खरीद को बढ़ा सकते हैं.

भारत के पास क्या है विकल्प
प्राइस कैप से जहां भारतीय रिफाइनरी कंपनियां सतर्क हैं, वहीं, भारत और रूस ने भी तेल के व्यापार के लिए एक विकल्प खोज रखा है. दोनों देश पश्चिमी बीमा, वित्त और समुद्री सेवाओं के द्वारा व्यापार करेंगे. चूंकि, भारत रूसी बीमा को स्वीकार करता है. इसलिए भारतीय कंपनियां रूस से बीमा, कार्गो, पी एंड आई और हुल (hull) सप्लाई चेन के तहत कच्चा तेल खरीदती हैं.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
मुफ्त की रेवड़ियां

मुफ्त की रेवड़ियां बांटने से आर्थिक अनुशासन की अनदेखी हो रही है!

June 1, 2023

Pahalgam Attack: ‘मेरे पति को मार डाला…आतंकवादी बोला- जाओ मोदी से कह देना’

April 23, 2025
all party delegation for operation sindoor

ऑपरेशन सिंदूर: सर्वदलीय डेलिगशन से बढ़ी ‘सियासी टेंशन’..एकता की जगह विवाद की सुर्खियां !

May 21, 2025
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • 8वें वेतन आयोग: सैलरी और फिटमेंट फैक्‍टर पर होगा फैसला
  • पेट्रोल-डीजल कार खरीदने वालों के लिए बुरी खबर, गडकरी बोले- इनका कोई फ्यूचर नहीं
  • दिल्ली हाई कोर्ट में ऑनलाइन सुनवाई के बीच चला पोर्न वीडियो!

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.