आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। ये पद्धति शरीर के साथ-साथ मन और आत्मा के भी स्वस्थ रहने पर जोर देती है। आयुर्वेद के अनुसार, स्वस्थ जिंदगी जीने के लिए बाहरी और आंतरिक दोनों तरह के इलाज की जरूरत होती है। इसी उपचार पद्धति का फायदा दुनियाभर तक पहुंचाने का काम ‘प्लैनेट आयुर्वेदा’ के संस्थापक डॉ. विक्रम चौहान कर रहे हैं। मशहूर आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. विक्रम चौहान दशकों से ‘हील इन इंडिया, हील बाय इंडिया एंड हील फ्रॉम इंडिया’ अभियान को बढ़ावा दे रहे हैं। उनका संकल्प है कि वे आयुर्वेद के फायदों को लोगों तक पहुंचाएंगे और ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए जागरूक करेंगे।
यूरोप में MBBS स्टूडेंट्स को आयुर्वेद पढ़ा रहे
फिलहाल डॉ. विक्रम चौहान MBBS स्टूडेंट्स को आयुर्वेद के बारे में पढ़ाने के लिए यूरोप दौरे पर हैं। वे एक महीने तक लातविया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया समेत यूरोप के अन्य देशों में रहेंगे। यहां वे MBBS छात्रों और शोधकर्ताओं को आयुर्वेदिक सिद्धांतों के बारे में पढ़ा रहे हैं। साथ ही स्वस्थ रहने के लिए आयुर्वेद का अभ्यास करवा रहे हैं। आयुर्वेदिक दवाओं के क्षेत्र में अपने अविश्वसनीय योगदान के कारण उन्हें दुनियाभर में जाना जाता है।
‘हील इन इंडिया, हील बाय इंडिया और हील फ्रॉम इंडिया’
डॉ. विक्रम चौहान ने कई बड़ी संस्थाओं के साथ मिलकर आयुर्वेद को दुनिया भर में फैलाने के लिए कई इनोवेशन किए हैं। उनका ‘हील इन इंडिया, हील बाय इंडिया और हील फ्रॉम इंडिया’ अभियान काफी लोकप्रिय है। इसके तहत वे देश-विदेश में आयुर्वेदिक कैंप और सेमिनार आयोजित करते हैं। इन अभियानों के माध्यम से डॉ. विक्रम चौहान ने संतुलित आहार, ध्यान और व्यायाम जैसी आयुर्वेदिक विधाओं को बढ़ावा दिया है।
25 साल पहले बना प्लैनेट आयुर्वेद
डॉ. विक्रम चौहान का मिशन आयुर्वेद को बढ़ावा देने के अलावा मरीजों को हाई क्वालिटी वाले प्रभावी और सुरक्षित प्रोडक्ट उपलब्ध करवाना भी है। इसी मिशन के साथ उन्होंने करीब 25 साल पहले प्लैनेट आयुर्वेदा की नींव रखी। इसके साथ उन्होंने आयुर्वेद को दुनिया भर के लोगों के लिए सुलभ बनाने में लगातार मदद की।
पिछले 25 वर्षों से हर दिन ‘प्लैनेट आयुर्वेदा’ हर घर आयुर्वेद के मिशन पर गंभीरता से काम कर रहा है। इसके लिए आयुर्वेद विशेषज्ञों, तकनीशियनों और इंजीनियरों की टीम मिलकर ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से दुनिया भर में हर किसी को आयुर्वेद से संबंधित परामर्श देने और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों को उपलब्ध कराने का काम कर रही है।
प्लैनेट आयुर्वेदा में मरीजों को I.T.P, अल्सरेटिव कोलाइटिस, खराब लिवर व किडनी जैसे रोगों के उपचार में सहायता मिलती है। बड़े-बड़े अस्पतालों से निराश होकर लौटने वाले भी प्लैनेट आयुर्वेदा में इलाज के लिए आते हैं। डॉ. विक्रम चौहान कहते हैं, ‘यह देखकर अच्छा लगता है कि भारत सरकार भी अब ‘हील इन इंडिया, हील बाय इंडिया और हील फ्रॉम इंडिया’ जैसे दृष्टिकोण अपना रही है।’
जामनगर में बन रहा WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन
बीते दो वर्षों में आयुर्वेद का महत्व काफी बढ़ा है, जिसके चलते सरकार ने भी आयुर्वेद के क्षेत्र में कई कदम बढ़ाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कई आयुर्वेदिक शैक्षिक संस्थानों का उद्घाटन किया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने गुजरात के जामनगर में WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन की स्थापना के लिए एक समझौता किया है।
डॉ. विक्रम चौहान का कहना है कि भारत सरकार के 250 मिलियन डॉलर के निवेश से बनने वाले पारंपरिक चिकित्सा के इस वैश्विक ज्ञान केंद्र का उद्देश्य लोगों और धरती के स्वास्थ्य में सुधार लाना है। साथ ही इसके लिए मॉर्डन साइंस और टेक्नोलॉजी के माध्यम से दुनिया भर की पारंपरिक चिकित्सा की क्षमता का दोहन करना है।







