Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home दिल्ली

दिल्ली के लिए केंद्र सरकार को अध्यादेश की जरूरत क्यों पड़ी!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
May 25, 2023
in दिल्ली, राष्ट्रीय
A A
pm modi-kejriwal
23
SHARES
762
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

दिल्ली : दिल्ली पर केंद्र के अध्यादेश के बाद केजरीवाल सरकार और केंद्र सरकार के बीच तनातनी बढ़ गई है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अध्यादेश ने दिल्ली सरकार की अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग की उम्मीदों पर पानी फेर दिया.

11 मई को भारत की शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार को बड़ी राहत देते हुए फैसला दिया कि पब्लिक ऑर्डर, पुलिस और जमीन को छोड़कर बाकी सभी सेवाएं दिल्ली सरकार के नियंत्रण में होगी. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि इन सेवाओं पर दिल्ली सरकार का विधायी और प्रशासकीय नियंत्रण होगा यानी अफसरों के तबादले और पोस्टिंग सरकार के हाथ में होगी.

इन्हें भी पढ़े

american jet engines

भारत समेत दुनिया के शक्तिशाली देशों के स्वदेशी फाइटर जेट अमेरिकी इंजन के मोहताज क्यों?

June 28, 2026
satellite guided jet

देसी गगन की मदद से भारत में पहली बार हुई सैटेलाइट गाइडेड जेट की लैंडिंग!

June 28, 2026
health survey

CGHS लाभार्थियों को बड़ी राहत, अब एचओडी दे सकेंगे मेडिकल क्लेम और इलाज की मंजूरी

June 28, 2026
fire service

दिल्ली में आग से निपटने के लिए फायर सर्विस का नया प्लान!

June 28, 2026
Load More

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में पांच जजों की बेंच ने कहा था दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है लेकिन अनुच्छेद 239 एए के तहत उसे विशेष दर्जा मिला हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा था अफसरों पर चुनी हुई सरकार का ही नियंत्रण होना चाहिए. नहीं तो प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी प्रभावित होगी.

कोर्ट के इस आदेश को दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने बड़ी जीत करार दिया था लेकिन इस फैसले के एक हफ्ते बाद 19 मई को केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश जारी कर दिया. इसने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया. केंद्र सरकार “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) अध्यादेश, 2023” लेकर आई है.

क्या कहता है अध्यादेश

अध्यादेश में कहा गया है कि अफसरों की ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़ा अंतिम निर्णय लेने का हक उपराज्यपाल को वापस दे दिया गया है. मतलब यह है कि अब अधिकारियों की ट्रांसफर और पोस्टिंग उपराज्यपाल ही करवाएंगे. अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से संबंधित मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए अध्यादेश के जरिए केंद्र सरकार एक वैधानिक निकाय, राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण की स्थापना करेगी.

प्राधिकरण में तीन सदस्य होंगे, जिनमें मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और प्रमुख गृह सचिव शामिल हैं. जिसका मतलब है कि निर्वाचित मुख्यमंत्री के निर्णय को दो वरिष्ठ गैर-निर्वाचित नौकरशाह वीटो या खारिज कर सकते हैं. प्राधिकरण में फैसले बहुमत के आधार पर होंगे और अगर उपराज्यपाल इस प्राधिकरण के फैसले से सहमत नहीं होंगे तो वह इन फैसलों को पुनविर्चार के लिए दोबारा प्राधिकरण के पास भेज देंगे.

इसी अध्यादेश के तहत दिल्ली में सेवा दे रहे ‘दानिक्स’ कैडर के ग्रुप ए अधिकारियों के तबादले और अनुशासनात्‍मक कार्रवाई के लिए “राष्ट्रीय राजधानी लोक सेवा प्राधिकरण” गठित किया गया है. दानिक्स यानी दिल्ली, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, दमन एंड दीव, दादरा एंड नागर हवेली सिविल सर्विसेज.

क्या अध्यादेश के जरिए पलटा जा सकता है कोर्ट का फैसला

अब सवाल यह है कि क्या राष्ट्रपति के हस्ताक्षर वाला अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट सकता है. संविधान के अनुच्छेद 123 में राष्ट्रपति के अध्यादेश जारी करने की शक्तियों का वर्णन है. अगर संसद नहीं चल रही है और मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है तो अध्यादेश लाया जा सकता है लेकिन अध्यादेश को संसद में छह सप्ताह के भीतर पारित कराना होता है.

जानकार कहते हैं केंद्र सरकार ने जो पुनविर्चार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है उस पर फैसला आने के बाद अध्यादेश आता तो बेहतर होता. नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड लॉ यूनिवर्सिटी, हैदराबाद के पूर्व वाइस चांसलर और संविधान मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर फैजान मुस्तफा कहते हैं, “केंद्र सरकार ने कोर्ट की कोई अवमानना नहीं की है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदला जाना रूटीन प्रक्रिया है. जिस-जिस विषय पर संसद कानून बना सकती है उस पर केंद्र सरकार अध्यादेश भी ला सकती है. जाहिर है कि इस मामले में संसद को कानून बनाने का अधिकार है तो उसे अध्यादेश लाने का भी अधिकार है.”

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आठ दिनों बाद ही अध्यादेश लाया गया. इस तेजी पर मुस्तफा कहते हैं कि संसद के पास शक्तियां हैं कि वह कानून बनाकर कोर्ट के किसी भी फैसले को पलट सकती है लेकिन कानून सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोधाभासी नहीं हो सकता है.

अध्यादेश में कहा गया है कि दिल्ली में जो कुछ भी फैसले होते हैं उनका राष्ट्रीय महत्व है, देश के और नागरिक भी उससे प्रभावित होते हैं साथ ही देश की अंतरराष्ट्रीय छवि भी उससे प्रभावित होती हैं क्योंकि यहां देशों के उच्चायोग हैं. इसलिए केंद्रीय सरकार का उसमें दखल होना चाहिए.

आम आदमी पार्टी का कहना है कि मोदी सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश से साफ हो गया है कि बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी देश के संविधान, लोकतंत्र, संघीय ढांचे और सुप्रीम कोर्ट को नहीं मानते हैं. आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मीडिया से कहा कि यह अध्यादेश भारत के संघीय ढांचे को समाप्त करने, संविधान को खत्म करने और सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों के फैसले को पलटने की कार्यवाही है.

वहीं दिल्ली बीजेपी का कहना है कि केंद्र सरकार के अध्यादेश के बारे में आम आदमी पार्टी लोगों को यह संदेश देना चाहती है कि यह उनके खिलाफ है. बीजेपी के मुताबिक इस अध्यादेश से दिल्ली के लोगों के हितों का कोई लेना-देना नहीं है. दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, “आप सरकार ने दिल्ली सरकार के अधिकारियों में डर का ऐसा माहौल पैदा कर दिया है कि कोई अधिकारी काम करना नहीं चाहता है. इस अस्थिरता भरे माहौल को बेहतर बनाने के लिए ही केंद्र सरकार को अध्यादेश लाना पड़ा.”

इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह राष्ट्रीय राजधानी में सविर्सेज को राज्य सरकार के नियंत्रण से हटाने के लिए लाए गए अध्यादेश के खिलाफ पूरे देश का दौरा करेंगे और विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात करेंगे. मंगलवार को केजरीवाल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मुलाकात करने वाले हैं. आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर 11 जून को दिल्ली रामलीला मैदान में रैली करने का भी ऐलान किया है.

फैजान कहते हैं कि अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसला का इंतजार करना चाहिए और साथ ही कहते हैं कि सरकार को यह शक्ति प्राप्त थी कि वह यह अध्यादेश लाए क्योंकि अनुच्छेद 239 एए में सर्विसेज के मामले में स्पष्टता पूरी नहीं है. संसद को वह स्पष्टता लाने का अधिकार है.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल

पांचवीं बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बनना अमृत काल में बड़े लक्ष्‍य हास‍िल करने वाली उपलब्‍ध‍ि : पीएम मोदी

September 8, 2022
आपदा

ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ता प्रदूषण हिमालयी क्षेत्रों में लिए बड़ा खतरा

September 4, 2025
Rajya Sabha

राजनीतिक नैतिकता के नए पैमाने

June 11, 2022
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • भारत समेत दुनिया के शक्तिशाली देशों के स्वदेशी फाइटर जेट अमेरिकी इंजन के मोहताज क्यों?
  • देसी गगन की मदद से भारत में पहली बार हुई सैटेलाइट गाइडेड जेट की लैंडिंग!
  • CGHS लाभार्थियों को बड़ी राहत, अब एचओडी दे सकेंगे मेडिकल क्लेम और इलाज की मंजूरी

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.