नई दिल्ली। पंजाब की राजनीति वर्तमान में गुरबाणी के मुफ्त प्रसारण को लेकर गरमाई हुई है। पंजाब के स्पेशल विधानसभा सेशन के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ऐतिहासिक फैसला लिया था। उन्होंने सत्र के दौरान सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1925 में संशोधन करने की बात कही था। इसी के तहत अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से ‘गुरबाणी’ (Gurbani free telecast) का मुफ्त प्रसारण करने की घोषणा की थी, जबकि अभी तक गुरबाणी का प्रसारण केवल पीटीसी चैनल पर ही होता है।
शिरोमणि अकाली दल, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी की सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध जताया है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति( (SGPC) ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार धार्मिक मामलों में इस तरह से हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। लेकिन क्या है ये विवाद और क्या है इसकी वजह? यहां आपको विस्तार से समझाते हैं।
2007 से पीटीसी कर रही है गुरबाणी का प्रसारण
पंजाब में आज से 25 साल पहले से ही यानी साल 1998 से ही स्वर्ण मंदिर अमृतसर (हरमंदिर साहिब) से गुरबाणी का सीधा प्रसारण हो रहा है। साल 2007 में गुरबाणी के प्रसारण का अधिकार PTC नेटवर्क को दे दिया गया था। ऐसा कहा जाता है कि पीटीसी चैनल का स्वामित्व बादल परिवार के पास है। हालांकि, पीटीसी मुफ्त में गुरबाणी का प्रसारण नहीं करती है।
हर साल 2 करोड़ रुपये का भुगतान करती है पीटीसी
पीटीसी नेटवर्क स्वर्ण मंदिर से गुरबाणी के सीधे प्रसारण के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) को हर साल 2 करोड़ रुपये का भुगतान करता है। इसी के साथ ही पीटीसी SGPC के देशभर में जितने भी कार्यक्रम होते हैं, उनको भी अपने चैनल पर प्रासरित करता है। इसके लिए पीटीसी कुल मिलाकर 10 से 12 करोड़ रुपये वो कवरेज और टेलीकास्ट पर खर्च करता है।
मुफ्त प्रसारण चाहती है मान सरकार
SGPC और PTC के बीच हुआ अनुबंध जुलाई 2023 में खत्म हो रहा है, इसलिए मान सरकार ने फैसला लिया है कि गुरबाणी के प्रसारण का स्वामित्व केवल पीटीसी को ही न दिया जाए, बल्कि यह सभी के लिए मुफ्त में उपलब्ध हो। मान सरकार चाहती है कि यदि कोई भी चैनल पवित्र गुरबाणी को प्रसारित करना चाहता है तो उसे भी इसकी इजाजत हो, लेकिन उनके इस कदम का SGPC समेत कई विपक्षी दलों ने विरोध किया।
‘राज्य सरकार नहीं कर सकती बिल में संशोधन’
एसजीपीसी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी का कहना है कि मान सरकार अपने राजनीतिक हितों के लिए सिख समुदाय के बीच किसी भी तरह के विवाद को खड़ा करने से दूर रहे। वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1925 में संशोधन करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास ही है, सिर्फ केंद्र सरकार ही इसमें एसजीपीसी की सिफारिश पर संशोधन करने का अधिकार रखती है। गुरबाणी प्रसारण आम प्रसारण नहीं है। इसकी पवित्रता व मर्यादा को नजरंदाज नहीं किया जा सकता।
सिद्धू ने किया समर्थन?
कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध किया, लेकिन उन्हीं में से कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने मान सरकार के इस फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा एक ट्वीट किया कि वह इस कदम के पक्ष में हैं। सिद्धू ने लिखा, “सरब सांझी गुरबाणी” का अर्थ बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए है। उन्होंने कहा कि मेरे सहित दुनिया भर के लाखों सिखों की हार्दिक इच्छा थी। सराहनीय प्रयास, बधाई भगवंत मान!”
पीटीसी ही क्यों कर सकती है गुरबाणी का प्रसारण?
- हरमंदिर साहिब से गुरबाणी प्रसारित करने का अधिकार सिखों के सर्वोच्च निकाय, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी या एसजीपीसी द्वारा पीटीसी नेटवर्क को दिया गया है।
- पीटीसी भी सख्त नियमों के तहत ही गुरबाणी का प्रसारण करती है। नियमों के तहत, यदि कोई भी गुरबाणी का प्रसारण करता है तो उसे गुरबाणी का पवित्रता और मर्यादा बनाए रखनी है।
- गुरबाणी के प्रसारण के दौरान चैनल किसी भी तरह का विज्ञापन नहीं चला सकते हैं।
- इस दौरान स्पॉन्सरशिप की भी परमिशन नहीं है।
- कई टीवी चैनलों द्वारा ऐसा करने से इनकार करने की वजह से पीटीसी नेटवर्क को स्वर्ण मंदिर से गुरबाणी प्रसारित करने का अधिकार मिला था।
क्या है सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1925
सिख गुरुद्वारों के प्रबंधन पर विवाद को सुलझाने के लिए ब्रिटिश भारत में पंजाब विधान परिषद द्वारा सिख गुरुद्वारा अधिनियम 1925 पारित किया गया था। इस एक्ट के माध्यम से कानूनी रूप से सिख पहचान को परिभाषित किया। इस कानून के तहत सभी गुरुद्वारों का संचालन करने के लिए एक निर्वाचित निकाय बनाने का प्रावधान किया गया। इस निर्वाचित निकाय को चुनने का अधिकार संस्था से जुड़े पदाधिकारियों को है।







