नई दिल्ली : पाकिस्तानी महिला सीमा हैदर से एटीएस की पूछताछ में तो कुछ निकला नहीं है, लेकिन अब जांच एजेंसी इस मामले का सच पता लगाने के लिए पॉलीग्राफी टेस्ट का सहारा लेगी. कहा जा रहा है कि सीमा हैदर की पहेली को पॉलीग्राफ टेस्ट से जरिए ही सुलझाया जाएगा. सीमा हैदर की सच्ची है और सिर्फ सचिन के लिए वह भारत आई है अब इस बात को पुख्ता करने के लिए सीमा का पॉलीग्राफ टेस्ट हो सकता है. क्या पॉलीग्राफ टेस्ट से सुलझ पाएगी सीमा हैदर की गुत्थी? इसको लेकर फॉरेंसिक एक्सपर्ट आदर्श मिश्रा ने न्यूज़18 से बातचीत में कई खुलासे किए हैं.
क्या है पॉलीग्राफ़ टेस्ट ?
डॉक्टर आदर्श मिश्रा ने बताया कि पॉलीग्राफ टेस्ट का मतलब है मल्टीपल ऑब्जर्वेशन है जो एक चीज से रिलेटेड है.बॉडी में फिजियोलॉजिकल चेंजेज होते हैं. उसका मेजरमेंट करने की मशीन और अलग-अलग तरीके के सेंसर इसमें शामिल होते हैं. इसमें जो एक वेरिएशन आता है उससे पता लगता है. अगर कोई आपसे नॉर्मल सवाल पूछ रहा है तो उसमें आपका पल्स रेट कितना आ रहा है और अगर आपसे केस से रिलेटेड कुछ पूछा है तो उसमें कैसा आ रहा है. जो मन में डर पैदा होता है उसके चलते इन वेरिएशंस में काफी बदलाव होता है. सवाल पूछा गया तब आपकी बॉडी में किस तरीके के चेंज है और केस का सवाल पूछा गया तो साइकोलॉजिकल चेंज है या नहीं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोई सच बोल रहा है यह झूठ बोल रहा है.
कब हुई पॉलीग्राफी टेस्ट की शुरुआत
पॉलीग्राफ टेस्ट की शुरुआत 1921 में हुई थी. यूएस में सबसे पहले स्टार्ट हुआ था तब से यह चलता आ रहा है. पुलिस ऑफिसर प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसीज इसका इस्तेमाल करते आ रहे हैं. पॉलीग्राफ टेस्ट एक डिवाइस है. इसके अलग-अलग सेंसर है चेस्ट का कार्डियक का अलग है. ब्लड प्रेशर अलग है. बॉडी में जो इलेक्ट्रिक मूवमेंट है. उसका मेजरमेंट अलग है. अलग-अलग बॉडी के लिए अलग-अलग पार्ट पर यह टेस्ट किए जाते हैं.
किसी से नॉर्मल सवाल किया जाए, तो एक नॉर्मल पल्स रेट होता है, लेकिन अगर केस से रिलेटेड कोई सवाल किया जाता है. तो उसमें पॉलस्ट्रेट अलग हो जाता है. कोई चोरी कोई मर्डर या कोई क्राइम किया होता है, तो उसमें मन के अंदर एक डर रहता है. इसलिए जो फिजियोलॉजिकल चेंजेज होते हैं. वह सामने आने लगते हैं. उसमें पल्स रेट बढ़ जाता और हार्टबीट भी तेज हो जाती है. अगर आप किसी चीज को लेकर सच्चे हैं तो कोई फ़र्क़ तक नहीं आता है, लेकिन अगर आपके मन में किसी चीज को लेकर संदेह होता है तो वह अंतर आता है उसी से पकड़े जाते हैं.
सीमा हैदर के केस को लेकर कही यह बड़ी बात ?
सीमा के केस की अगर बात करें क्या वह पाकिस्तान से है या नहीं है. उनके जो पासपोर्ट और आधार कार्ड मिले वह सही है नहीं. किसी से बनवाए हैं. वह इंडिया कैसे पहुंची. इन सब रिलेटेड क्वेश्चन उनसे पूछे जाएंगे, तो जब वह इन सवालों के जवाब नॉर्मल तरीके से देंगी तो उसे समझ में आएगा कि वह ठीक है नहीं. अगर थोड़ा सा भी वाइब्रेशंस में चेंज हुए तो उसे पता लगाया जा सकता है कि चीजों में झूठ है.
एक होता है कंट्रोल क्वेश्चन एक होता है रेलीवेंट और एक होता है इर्रेलेवेंट
सवालों में जो अंतर आते हैं उन्हीं पैरामीटर से चीजों का ऐनालिसिस किया जाता है. ब्रेन मैपिंग नारको टेस्ट होता है. किसी भी झूठ को पकड़ने के लिए टेस्ट किए जाते हो तीनों के अलग-अलग मेथड्स और पैरामीटर होते हैं. क्रिमिनल होते हैं. वह बॉडी के अपने चेंज को कई बार छुपा भी लेते हैं और बॉडी में कई बार चेंजेज नहीं भी देखे जाते हैं, क्योंकि वह पहले से ही प्रैक्टिस करके आते हैं. हर कंट्री का अपना अलग होता है इंडिया में बात करें तो यह सबूत के तौर पर काम नहीं करता, लेकिन हां इसके बेसिस पर सबूत इकट्ठे किए जा सकते हैं. डॉक्टर आदर्श मिश्रा का कहना है कि काफी हद तक सीमा की घुट्टी सुलझ सकती है. अगर वह सच कह रही है तू चीजें सामने आ सकती और अगर झूठ है तो भी पता लग सकता है.







