Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home दिल्ली

अच्छी UCC का मौका नहीं चूके भारत!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 3, 2023
in दिल्ली, राष्ट्रीय
A A
25
SHARES
845
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली: पिछले कुछ महीनों में जहां सुप्रीम कोर्ट में समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर लंबे समय तक गरमागरम बहस हुई, वहीं केंद्र सरकार ने संसद में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर विधेयक पेश करने की संभावना टटोली। फैमिली लॉ, जिला अदालतों से निकलकर देशव्यापी बहस का केंद्र बन गया। वरना संपत्ति के बंटवारे और तलाक जैसे पारिवारिक विवादों के मामले जिला अदालतों की चौखट पर ही पहुंचा करते हैं। भारत में लोगों पर उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर अलग-अलग कानून लागू होते हैं। इन्हीं व्यक्तिगत कानून में भारतीय परिवार कानूनों का बड़ा हिस्सा समायोजित है। हमारे व्यक्तिगत कानून मूलतः धर्मशास्त्रों में वर्णित नीतियों पर आधारित होने के कारण लैंगिक भेदभाव करते हैं और परिवार की पुरानी धारणाओं पर आधारित हैं। यूसीसी, टुकड़ों में बिखरे और पुराने पड़ चुके फैमिली लॉ को आधुनिक युग के लिहाज से प्रासंगिक बनाने का शानदार अवसर है।

संविधान निर्माता ने भी यूसीसी के प्रश्न पर किया था विचार

इन्हें भी पढ़े

fraud against customers

सरकार ने लागू किया ‘सुधार नोटिस’ सिस्टम, ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी जैसे मामलों में जारी रहेगी सख्त कार्रवाई

June 29, 2026
rajnath singh

DRDO को मिला नया वित्तीय अधिकार… रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बड़े रिफॉर्म का किया ऐलान

June 29, 2026
ev policy

दिल्ली की नई ईवी पॉलिसी में क्या-क्या होगा खास, जानिए

June 29, 2026
american jet engines

भारत समेत दुनिया के शक्तिशाली देशों के स्वदेशी फाइटर जेट अमेरिकी इंजन के मोहताज क्यों?

June 28, 2026
Load More

संविधान सभा के कई सदस्यों के अनुसार, समान नागरिक संहिता में सभी भारतीयों के लिए फैमिली लॉज की एक प्रगतिशील संहिता बनने का माद्दा है। यह विवाह, तलाक, गोद लेने, विरासत और भरण-पोषण जैसे मुद्दों पर पूरे देश को एक कानून से चला सकता है। हंसा मेहता, अमृत कौर और मिनू मसानी उस समिति के सदस्य थे जिसने हमारे संविधान में मूलाधिकार के अध्याय का मसौदा तैयार किया था। ये सभी लैंगिक न्याय पर आधारित आधुनिक फैमिली लॉ को सभी भारतीयों का मूल अधिकार बनाना चाहते थे। उनके विचारों को तब बहुत ज्यादा क्रांतिकारी माना गया। इसके बजाय, समिति ने इसे (यूसीसी को) नीति निर्देशक तत्व का अंग बनाने का फैसला किया। इसमें सरकार को निर्देश दिया गया कि वो समान नागिरक संहिता लागू करने का प्रयास करे।

जब इस मसौदा प्रावधान को विधानसभा के समक्ष रखा गया, तो रूढ़िवादी सदस्यों ने इसका कड़ा विरोध किया जिनमें हिंदू भी और मुसलमान, दोनों थे। यह वह समय था जब डॉ. भीम राव आंबेडकर और केएम मुंशी ने विधानसभा को यह समझाने की कोशिश की कि स्वतंत्रता के बाद धार्मिक अलगाववाद को लैंगिक न्याय और राष्ट्रीय एकीकरण का बाधक नहीं बनने दिया जा सकता है। उनके ही प्रयासों का असर रहा कि संविधान में अनुच्छेद 44 को शामिल किया गया जिसमें यूसीसी लाने की गारंटी दी गई। हालांकि, इसकी कोई रूपरेखा नहीं बताई गई।

अच्छी यूसीसी देश को बहुत आगे ले जा सकती है

वह 1948 था और अब 75 वर्ष वर्षों के बाद भी विवाद जस के तस कायम है। राजनीतिक प्रपंचों के कारण बार-बार यही बताने की कोशिश की जाती है कि यूसीसी दरअसल हिंदू कानूनों के देशभर में थोपे जाने का एक जरिया है, भले ही इसमें कोई सच्चाई नहीं हो और भले ही यूसीसी कितना भी प्रगतिशील क्यों नहीं हो। दूसरी ओर, हर धार्मिक समूह के पास अपना-अपना पर्सनल लॉ होने का अर्थ है कि सबकी धार्मिक आजादी पूरी तरह सुरक्षित है, चाहे वो पर्सनल लॉ कितने भी भेदभावकारी क्यों नहीं हों।

यूसीसी की बहस को सार्थक बनाने के लिए वक्त की मांग है कि एक समग्र, लैंगिक न्याय आधारित और समावेशी आदर्श कानून हो, जो चर्चाओं और परामर्श के लिए एक मौलिक मसौदे का काम करे। यूसीसी अच्छी हो, इसके लिए इसे एक वैध विवाह और लैंगिक भेदभाव से परे उत्तराधिकार की शर्तें तय करना आवश्यक है। यूसीसी में विवाह बंधन में बंधे जोड़ों के बीच संपत्ति के संयुक्त स्वामित्व का प्रावधान होना चाहिए और यह भी गोद लिए जाने में बच्चे की सर्वोत्तम हितों को प्राथमिकता दी जाए ना कि धार्मिक परंपराओं को। लैंगिक न्याय पर आधारित समान नागरिक संहिता तैयार करने में भारत के लिए धार्मिक रिवाजों को कानूनों से अलग करने का बड़ा अवसर है। इस प्रक्रिया में कानूनी सुधार के साथ-साथ औपनिवेशिक विरासत से भी मुक्ति पाने का रास्ता तैयार हो सकता है।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल

नेपाल के गायब बच्चे

December 27, 2022
IIT Roorkee

एकता एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने IIT रुड़की ने युवा संगम-V का किया उद्घाटन

November 30, 2024
CM yogi

11 वर्षों में स्वयं को तपाकर और खपाकर पीएम मोदी ने 140 करोड़ भारतीयों को बनाया विश्वास का प्रतीकः सीएम : योगी

June 11, 2025
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • सरकार ने लागू किया ‘सुधार नोटिस’ सिस्टम, ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी जैसे मामलों में जारी रहेगी सख्त कार्रवाई
  • DRDO को मिला नया वित्तीय अधिकार… रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बड़े रिफॉर्म का किया ऐलान
  • बोलकर या मन में? जानिए क्या है मंत्र जाप करने का सही तरीका और नियम

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.