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Home राज्य

कौन लाया पहाड़ पर बर्बादी, बेरहम विकास या बढ़ती आबादी?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 22, 2023
in राज्य, विशेष
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Landslide
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शिमला : हिमाचल प्रदेश में अगस्त का महीना भयानक आपदा लेकर आया है. पहाड़ों में कोहराम मचा है. घर, सड़क, मंदिर, स्कूल और पहाड़ कांच के टुकड़ों की तरह टूटकर बिखर रहे हैं. हिमाचल और उत्तराखंड के पहाड़ का पोर-पोर टूट रहा है. बारिश की बूंदें गिरते ही लाखों सालों से जमे पहाड़ धराशाई हो रहे हैं. सवाल ये है कि अचानक ऐसा क्यों हो रहा है? सवाल ये भी है कि क्या ये विनाश हिमाचल और उत्तराखंड के कुछ शहरों तक ही सीमित है या देश के कई विख्यात शहर इसकी चपेट में हैं? सवाल ये भी है कि कौन लाया पहाड़ पर बर्बादी बेरहम विकास या बढ़ती आबादी?

हिमाचल में तो ऐसी तबाही हुई है, जो इस पहाड़ी राज्य ने पहले कभी नहीं देखी थी. इस बार कुदरत का ऐसा कहर टूटा कि हिमाचल के 11-12 जिले लैंडस्लाइड, बाढ़, बारिश से कराह रहे हैं. पहाड़ का पोर-पोर धंस रहा है. टूट रहा है. बिखर रहा है. लैंडस्लाइड की चपेट में आने से कई घर ढह गए हैं. जो रेल की पटरियां अंग्रेजों के जमाने से अब तक मजबूती से बिछी हुई थीं, उसके नीचे की जमीन सैलाब बहा ले गया. हिमाचल पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है. प्रकृति ऐसे-ऐसे खौफनाक मंजर दिखा रही है, जो रूह कंपा देने वाले हैं.

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बारिश, लैंडस्लाइड ने पहाड़ी राज्य में मचाई तबाही

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में लैंडस्लाइड का डरावना मंजर दिखाई दिया. यहां के समरहिल इलाके में शिमला नगर निगम का स्लॉटर हाउस जमींदोज हो गया. तस्वीरें विचलित कर देने वाली हैं. पहले एक बड़ा पेड़ गिरा, फिर ताश के पत्तों की तरह स्लॉटर हाउस ढलान की तरफ सरकता चला गया और फिर शिमला के स्लॉटर हाउस के साथ लगे पांच घर भी जमींदोज हो गए. चीख पुकार मच गई. जगह-जगह लैंडस्लाइड और बादल फटने से राजधानी शिमला को जोड़ने वाली कई सड़कें टूट गईं. रेल की पटरियां हवा में झूलने लगीं. कई इमारतें ढह गईं.

पिछले 3 दिनों में टूटे कहर के बाद अकेले मंडी शहर में 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. पहाड़ टूटने के बाद कई लोग लापता हो गए हैं. जगह-जगह लैंडस्लाइड के बाद कुल्लू-मनाली को जोड़ने वाला हाइवे बंद होने से सैकड़ों पर्यटक फंस गए हैं. हिमाचल प्रदेश के शहरों पर कुदरत की मार है या ये इंसान का ही प्रहार है? आज ये सोचने की जरूरत है कि हमने इन पहाड़ों के साथ ऐसा क्या किया है? जो बारिश की बूंदें पड़ते ही बुरी तरह टूटकर बिखर रहे हैं. हिमाचल प्रदेश के सिर्फ शिमला ही नहीं, कई शहरों के वजूद पर संकट खड़ा हो गया है.

पहड़ी राज्य में मची तबाही बस एक ट्रेलर?

हिमाचल प्रदेश के शिमला, मंडी, चंबा और सोलन जैसे जिलों में जो तबाही हुई है, वो पहाड़ पर बसे राज्यों के भविष्य पर मंडराते संकट का सिर्फ ट्रेलर है. सिर्फ हिमाचल प्रदेश ही नहीं भारत के कई शहरों के वजूद पर संकट है. सबके मन में सवाल है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हो गया है जो पर्वत और नदियां इंसान की दुश्मन बन गई हैं?

पहाड़ पर बन रही सड़कें, पहाड़ तोड़ने में होने वाले विस्फो’, नदियों में सड़क निर्माण का मलबा, पहाड़ों की गलत तरीके से कटाई, पहाड़ के नीचे लंबे सुरंग प्रोजेक्ट, पहाड़ी शहरों पर बढ़ती आबादी, पहाड़ में घर निर्माण की नई शैली, लगातार लगते जा रहे बड़े-बड़े हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट, पर्यटन और पर्यटकों का बढ़ता बोझ, क्लाइमेट चेंज, टूटते ग्लेशियर और कम समय में अचानक होने वाली ज्यादा बारिश पहाड़ों के पोर पोर को तोड़ रही हैं.

एक नहीं, कई रिपोर्ट ये चेतावनी दे रही हैं कि अगर सबकुछ ऐसे ही चलता रहा तो 2030 तक हिंदुस्तान के कई शहर खत्म हो सकते हैं. अगर किसी प्रदेश में बनने वाला नेशनल हाईवे विकास का पैमाना है तो हिमाचल प्रदेश में पिछले 10 सालों में जबर्दस्त विकास हुआ है. सड़कों का जाल बिछ गया है. सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़े इसकी गवाही देते हैं. 2014 तक हिमाचल प्रदेश में नेशनल हाईवे की लंबाई 2,196 किलोमीटर थी. अब यानी 2023 में हिमाचल प्रदेश में 6954 किलोमीटर तक नेशनल हाईवे है. जैसे-जैसे हिमाचल प्रदेश में फोर-लेन और सिक्स-लेन नेशनल हाईवे बनते चले गए, वहां लैंडस्लाइड की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी.

सड़क की जाल बन रही जान का जंजाल

हिमाचल प्रदेश की स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के आंकड़ों के अनुसार साल 2020 में हिमाचल प्रदेश में लैंडस्लाइड के 16 बड़े मामले दर्ज हुए थे लेकिन 2021 में 100 से ज्यादा बड़े स्तर की लैंडस्लाइड की घटनाएं हुईं. 2022 में पहाड़ दरकने के कम से कम 117 ऐसे मामले सामने आए जिनमें जानमाल का नुकसान हुआ. पहाड़ों को सिर्फ सड़कों के लिए ही नहीं तोड़ा जा रहा. पहाड़ों की चूल-चूल हिलाने का काम वो टनल कर रही हैं, जो तेजी से पहाड़ी राज्यों में बनाई जा रही हैं.

सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तराखंड में 66 नई बड़ी सुरंगें बनाने के प्रोजेक्ट चल रहे हैं. हिमाचल प्रदेश में पहाड़ काटकर कम से कम 19 नई बड़ी सुरंगें बनाई जा रही हैं. अगर अभी चल रही सुरंगों की बात करें तो उत्तराखंड में 18 बड़ी सुरंगें संचालित हैं. हिमाचल प्रदेश में एक सुरंग अटल टनल अभी चल रही है. सुरंगें पहाड़ को खोद कर ही बनाई जा सकती हैं. सुरंगें और नई सड़कें कनेक्टिविटी तो बेहतर कर देती हैं लेकिन इनकी बहुत बड़ी कीमत पहाड़ को चुकानी पड़ती है और पहाड़ ये कीमत अकेले नहीं चुकाता. इस कीमत में इंसानों की भी हिस्सेदारी है.

 

 

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