Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राज्य

नदियों के किनारे पनप रहा अतिक्रमण बनेगा तबाही का कारण!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 28, 2023
in राज्य
A A
नदियों के किनारे अतिक्रमण
19
SHARES
632
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

देहरादून : प्रदेश में नदियों के किनारे पनप रहा अवैध अतिक्रमण फिर से बड़ी तबाही का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो वर्ष 2013 की आपदा के बाद एक दशक बीत जाने पर भी हमने कोई सबक नहीं लिया है। इस बार मानसून ने ठीक वैसा ही रंग हिमाचल में दिखाया है, जो हिमालयी राज्यों के लिए नए खतरे का संकेत है।

उत्तराखंड में 2015 से अब तक 7,750 अत्यधिक वर्षा और बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। मौसम विज्ञानी व आईएमडी के पूर्व उपमहानिदेशक आनंद शर्मा के अनुसार भले ही राज्य के लिए भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी मौसम की घटनाएं असामान्य नहीं हैं, लेकिन तबाही के लिए नदी के किनारे अनधिकृत निर्माण को दोषी ठहराया गया है।

इन्हें भी पढ़े

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

BHU में जाति पूछकर सपा नेता ने ब्राह्मण छात्र को थप्पड़ मारा, केस दर्ज

April 2, 2026
aawas yojana

जिन्हें तकनीकी वजहों से PM आवास नहीं मिला, वे इस योजना से पूरा कर रहे घर का सपना

April 1, 2026
शराब

उत्तराखंड में आज से शराब महंगी, जानें नए रेट

April 1, 2026
गिरफ्तार

साइबर ठगी के लिए म्यूल खाते प्रोवाइड कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश, तीन गिरफ्तार

March 29, 2026
Load More

हवाओं के मिलन से अत्यधिक बारिश

अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि मौसम में होने वाले अप्रत्याशित बदलाव की घटनाएं जलवायु परिवर्तन से जुड़े होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आने वाले समय में इन घटनाओं की आवृत्ति और परिणाम में वृद्धि होगी। लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि यह एक क्रमिक प्रक्रिया है।

उन्होंने बताया कि हिमालयी क्षेत्र में पूर्वी और पश्चिमी हवाओं के मिलन से अत्यधिक बारिश होती है। वर्ष 2013 में मौसम को जो चक्र उत्तराखंड में बना था, इस बार हिमाचल प्रदेश में बना है। उन्होंने बताया कि मानसून जाते-जाते सितंबर में भी कोई नया रंग दिखाए, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

विकास के नाम पर अवैज्ञानिक निर्माण

मौसम विज्ञानी आनंद शर्मा के अनुसार, नदियां हमेशा अपनी जगह को वापस ले लेती हैं। नदियों के किनारे अतिक्रमण मौसम विज्ञान से जुड़ा विषय नहीं है, लेकिन मौसम बिगड़ने पर तबाही का बड़ा कारण जरूर है। सरकारें सब कुछ जानती हैं, लेकिन असंवेदनशील हैं। प्रदेश में नदियों के किनारे अवैध निर्माण सरकार की नाक के नीचे ही नहीं, खुद सरकारों ने भी किया है। रिस्पना नदी में विधानसभा भवन, कई सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान इसके उदाहरण हैं। सितंबर, 2022 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने देहरादून में नदी किनारे अतिक्रमण को हटाने के आदेश दिए थे, लेकिन सरकार ने इस पर अमल नहीं किया।

..तो इस बार नुकसान कहीं अधिक होगा

पर्यावरणविद् व चारधाम परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) के सदस्य हेमंत ध्यानी के अनुसार उत्तराखंड में लोगों ने नदी किनारे अवैध रूप से अतिक्रमण किया है और सभी प्रकार की संरचनाओं का निर्माण किया है। इन बसावटों में अदालतों के तमाम अदेशों के बाद भी सरकार नियंत्रण नहीं कर पा रही है। फिर वर्ष 2013 जैसी आपदा आई तो इस बार नुकसान उससे कहीं अधिक होगा। ध्यानी ने कहा, अवैध अतिक्रमण सिर्फ प्रमुख नदियों के किनारे ही नहीं, बल्कि उनकी सहायक नदियों, छोटी नदियों और नालों पर भी हुआ है।

200 मीटर के नियम की उड़ रहीं धज्जियां

अगस्त 2013 में हाईकोर्ट ने राज्य की सभी नदियों के 200 मीटर के भीतर सभी निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। अदालत ने यह आदेश ऋषिकेश निवासी सामाजिक कार्यकर्ता संजय व्यास की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर पारित किया था। लेकिन इस नियम की भी धज्जियां उड़ रही हैं।

एनजीटी का आदेश भी नहीं माना

दिसंबर 2017 के एक आदेश में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने निर्देश दिया था कि पर्वतीय इलाकों में गंगा के किनारे से 50 मीटर के भीतर आने वाले क्षेत्र में किसी भी निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी और न ही कोई अन्य गतिविधि की जाएगी। यहां 50 मीटर से अधिक और 100 मीटर तक के इलाके को नियामक क्षेत्र के रूप में माना जाएगा। मैदानी क्षेत्र में जहां नदी की चौड़ाई 70 मीटर से अधिक है, उस स्थिति में नदी के किनारे से 100 मीटर का क्षेत्र निषेधात्मक क्षेत्र के रूप में माना जाएगा।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
Amit Shah new loksabha

मोदी सरकार में आतंकवाद, नक्सलवाद और उग्रवाद समाप्ति की ओर : अमित शाह

March 22, 2025

आखिर क्यों नहीं होती हेट स्पीच मामलों में राजनेताओं पर कार्रवाई?

April 30, 2023

चेहरा फ्रिंज नहीं होता

June 14, 2022
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • अब PF निकालना चुटकियों का काम, UPI से मिनटों में मिलेगा पैसा
  • राघव चड्ढा की कुर्सी क्यों छीन ली? इन वजहों की शुरू हुई चर्चा
  • एमएस धोनी जल्द कर सकते हैं मैदान पर वापसी?

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.