नई दिल्ली। दिल्ली शराब घोटाले में एक आरोपित को बचाने के लिए पांच करोड़ रुपये की घूसखोरी का मामला सामना आया है। इस सिलसिले में सीबीआइ ने ईडी के एक सहायक निदेशक और छह अन्य के विरुद्ध एफआइआर दर्ज की है। इसके बाद इन सभी को गिरफ्तार कर लिया है।
सीबीआइ ने अभी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की
आधिकारिक तौर पर सीबीआइ ने अभी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है। ईडी की शिकायत पर दर्ज एफआइआर में नामित आरोपितों में ईडी के सहायक निदेशक पवन खत्री, ईडी में अपर डिवीजन क्लर्क नीतेश कोहर, एअर इंडिया के सहायक महाप्रबंधक दीपक सांगवान, अमनदीप सिंह ढल, बीरेंदर पाल सिंह, चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रवीण कुमार वत्स, क्लेरिज होटल्स एंड रिजार्ट के सीईओ विक्रमादित्य शामिल हैं।
दिल्ली शराब घोटाले की जांच के दौरान पता चला था कि वरिष्ठ ईडी अधिकारियों के नाम पर पैसा लेने में कुछ लोगों का एक समूह शामिल है।
एक सरकारी बयान के मुताबिक, पीएमएलए के तहत दर्ज विभिन्न व्यक्तियों के बयानों से पहली नजर में यह पता चला कि अमनदीप और बीरेंदर पाल सिंह ने प्रवीण वत्स को पांच करोड़ रुपये (दिसंबर, 2022 से जनवरी, 2023 की शुरुआत तक तीन करोड़ और फिर दो करोड़) दिए थे ताकि अमनदीप के विरुद्ध शराब घोटाले में जारी जांच के संबंध में ईडी की मदद हासिल की जा सके।
वत्स ने अमनदीप से छह किस्तों में लिए थे तीन करोड़ रुपये
प्रवीण वत्स ने बयान में कहा कि दीपक सांगवान ने उन्हें आश्वस्त किया था कि वह कुछ धनराशि के एवज में ईडी के शराब घोटाला मामले में अमनदीप के लिए मदद हासिल कर सकता है।
दीपक ने उन्हें दिसंबर, 2022 में पवन खत्री से मिलवाया था। दीपक के आश्वासन पर प्रवीण वत्स ने अमनदीप से 50-50 लाख की छह किस्तों में तीन करोड़ रुपये लिए थे। इसके बाद दीपक ने प्रस्ताव किया था कि दो करोड़ रुपये और देने पर अमनदीप को आरोपितों की सूची से हटा दिया जाए।
प्रवीण ने इसकी जानकारी अमनदीप को दी थी जिस पर वह तैयार हो गया था। प्रवीण वत्स ने 50-50 लाख की चार किस्तों में दो करोड़ रुपये लिए थे। अमनदीप से ये सभी धनराशि प्रवीण ने अमनदीप के एक प्रतिनिधि के जरिये नकद अपने घर पर प्राप्त की थी।
घर से 2.19 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई थी।
तलाशी अभियान के दौरान प्रवीण के घर से 2.19 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई थी। दीपक के परिसरों से शराब घोटाले में छह जनवरी की तिथि की 99 पृष्ठों की सप्लीमेंट्री प्रोसीक्यूशन कंप्लेंट की बरामदगी से संकेत मिलता है कि वह वरिष्ठ ईडी अधिकारियों के नाम पर रिश्वत लेने में शामिल था।







