देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष के एक कदम ने राजनीति के गलियारों में गहमागहमी कर दी है। अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए उत्तराखंड महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष और महासचिव ने सिर मुंडवाकर ऐसा कदम उठाया है, जिसे सत्ता पक्ष के लोग सनातन धर्म की दुहाई देकर गलत बता रहे हैं। वहीं, ज्योति रौतेला का कहना है कि अंकिता भंडारी के साथ जो हुआ, क्या वह सनातनी धर्म के खिलाफ नहीं है।
ज्योति रौतेला वर्तमान में उत्तराखंड प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष हैं। वे इससे पहले भी महत्वपूर्ण पदों पर रह चुकी हैं। यूथ कांग्रेस से पार्टी में कदम रखने वाली ज्योति ने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई है। वर्ष 2012 न्यू कोटद्वार के लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ चुकी हैं, लेकिन हार के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और नए जोश के साथ फिर से पार्टी की सेवा में जुट गई हैं।
ज्योति रौतेला ने बताया कि महिला सुरक्षा को लेकर हमेशा से चिंतित रही हूं। वर्ष 2004 से लैंसडाउन में एक एनजीओ चला रही हूं। जिसके तहत वृद्ध आश्रम का संचालन करती हूं। उन्होंने बताया कि वृद्धाश्रम के संबंध में कई बार अधिकारियों से बात करने जाते थे तो अधिकारी उनकी सुनते ही नहीं थे। जिस पर उन्हें बड़ी दिक्कत होती थी।
‘जीवन का टर्निंग पॉइंट’
इस दौरान उन्होंने देखा कि यदि कोई राजनीतिक संगठन से जुड़ा व्यक्ति अधिकारियों के पास आता तो उनके काम झटपट हो जाते थे। बस यही उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट था। उन्होंने सोचा कि क्यों न राजनीति से जुड़कर ही समाज सेवा के काम को पूरा किया जाए। उसके बाद में 2011 में यूथ कांग्रेस में आई। यूथ कांग्रेस का चुनाव भी लड़ा था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और वर्ष 2012 में लैंसडाउन से एमएलए का चुनाव लड़ा। हालांकि, चुनाव हार गई थीं।
‘क्या पहाड़ के मां-बाप इतने कमजोर हो गए’
इसके बाद ज्योति ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव बनीं। फिर उन्हें राजस्थान का प्रभारी बनाया गया। यूथ कांग्रेस में प्रदेश उपाध्यक्ष रहीं। लगातार पदों पर सक्रिय राजनीति के चलते उन्हें उत्तराखंड महिला कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। ज्योति रौतेला ने बताया कि कोटद्वार में जब एक दिन उन्होंने अंकित के माता-पिता को डीएम कार्यालय के बाहर जमीन पर बैठकर रोते हुए और बेटी के लिए न्याय की गुहार लगाते देखा तो उनका मन उद्वेलित हो गया। तब मन में यही विचार आया कि क्या पहाड़ के मां-बाप इतने कमजोर हो गए हैं कि उन्हें अपनी बेटी के लिए न्याय मांगने के लिए डीएम ऑफिस के सामने बैठकर आंसू बहाने पड़ रहे हैं। फिर भी उनकी बेटी को न्याय नहीं मिल रहा है। इसके बाद मणिपुर में महिलाओं के साथ हुए घटनाक्रम से वे और भी परेशान हो गईं। उन्होंने सोचा कि सबसे पहले अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना जरूरी है। इसी जुनून के चलते सीएम आवास कूच के दौरान उन्होंने अपने बाल मुड़वाए।
‘रेनू बिष्ट पर कोई सवाल नहीं उठा रहा’
ज्योति ने कहा कि यह एक अप्रत्याशित कदम था, लेकिन अंकिता हत्याकांड को लेकर जो दर्द मन में था, वह सिर मुंड़वाने के रूप में बाहर आया। भाजपा सरकार और विधायक रेनू बिष्ट पर कोई सवाल नहीं उठा रहा है, लेकिन जब अपने बाल मुंड़वा दिए तो उन्हें सनातन धर्म के खिलाफ काम करने वाली कहा जा रहा है। भाजपा उन पर सती लोकप्रियता हासिल करने के लिए ऐसा करने का आरोप लगा रही है, जो सरासर गलत है। उनके द्वारा सिर मुंड़वाने को सनातन धर्म के खिलाफ कहा जा रहा है तो अंकिता के साथ जो हुआ, क्या वह सनातन धर्म की अनुकूल था।
लोगों को जागरुक करूंगी- ज्योति
ज्योति रौतेला ने बताया कि सरकार तक अपनी भावना पहुंचाने के लिए यह कदम जरूरी था। उनके इस फैसले को परिजनों का भी पूरा साथ मिला है। ज्योति का कहना है कि राजनीतिक दबाव महिलाओं के साथ न्याय नहीं होने दे रहा है, इसीलिए उन्होंने पीड़ित महिलाओं की आवाज बनने की ठानी है। उन्होंने बताया कि अपने लोकसभा चुनाव के लिए हरिद्वार और टिहरी लोकसभा क्षेत्र का दौरा करेंगी। इसी मुंड़वाए हुए सर के साथ लोगों के बीच में जाकर अंकिता के लिए लोगों को जागरूक करेंगी।







