प्रकाश मेहरा
जब उत्तर भारत में घने कोहरे और कड़ाके की सर्दी का क्रम जारी है, तब सचेत व तैयार रहना समय की मांग है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी राजस्थान में शीतलहर की स्थिति स्थिति है। बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड में भी कोहरा छाया हुआ है। पूर्वोत्तर में भी कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में बारिश और बर्फवारी का अनुमान है। हालांकि, दक्षिण भारत के ज्यादातर इलाकों में बारिश और शुष्क मौसम की स्थिति बनी हुई है। उत्तर भारत में सदर्दी की वजह से न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि दुर्घटनाएं भी बढ़ गई हैं। अभी ठंड की वजह से जान गंवाने वालों के आंकड़े सामने नहीं आए हैं, पर अस्पतालों में रोगियों की संख्या बढ़ गई है। बेघर गरीबों और बुजुगों को सर्दी की वजह से ज्यादा तकलीफ हो रही है, तो यह समाज के लिए संवेदना का समय है। क्या ठंड अब ज्यादा चुभने लगी है?
क्या इसके लिए जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि अत्यधिक ठंड के लिए जलवायु परिवर्तन सीधे तौर पर जिम्मेदार है। जलवायु परिवर्तन के चलते दुनिया भर में औसत और अत्यधिक तापमान, दोनों में वृद्धि हो रही है। पूरी दुनिया में मौसम का ढर्रा बदल रहा है। जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ता है, ध्रुवीय भंवर जैसे पारंपरिक मौसम पैटर्न बाधित होते हैं। इससे ध्रुवीय भंवर या अत्यधिक ठंड का प्रसार दुनिया के दूसरे क्षेत्रों में हो सकता है।
मतलब, आर्कटिक की सर्दी बाकी दुनिया में फैल सकती है और शायद फैलने भी लगी है। कुछ अध्ययनों से यह पता चलता है कि है कि अत्यधिक ठंड अत्यधिक गरमी की तुलना में अधिक घातक होती है। द लांसेट ने साल 2021 में नौ देशों में लगभग 6.50 करोड़ मौतों का अध्ययन करके यह पाया कि 2019 में उन सभी देशों में औसत ठंड के चलते होने वाली मृत्यु दर गरमी के कारण होने वाली मृत्यु दर से अधिक हो गई है। साल 2022 के एक अध्ययन में पाया गया कि 1969 और 2017 के बीच स्विट्जरलैंड में गरमी से संबंधित मृत्यु दर कुल मृत्यु दर का केवल 0.28 प्रतिशत थी, जबकि ठंड से संबंधित मृत्यु दर कुल मृत्यु दर का 8.91 प्रतिशत। मतलब, अत्यधिक ठंड जानलेवा हो सकती है, खासकर उन लोगों के लिए, जो बेघर हैं या जो आर्थिक रूप से कमजोर है। ऐसे देशों में सर्दी काल बनकर कहर बरपा सकती है, जहां महंगाई ज्यादा है या जो संसाधनों का अभाव झेल रहे हैं। मौसम की यह मार साफ संकेत करती है कि हमें मौसम की अति से बचने के लिए, पृथ्वी व पर्यावरण की रक्षा के लिए ईमानदारी से उपाय करने पड़ेगे। श्रीनगर का माइनस पांच तापमान हो या पटना का 10 डिग्री सेल्सियस, हर स्थिति में हमें गरीबी और अभाव से बचने की जरूरत है और पहले की तुलना में अपने कमरे को गरम रखने की जरूरत भी बढ़ती जा रही है। कई जगह केवल रजाई ओढ़कर सर्दी से नहीं बचा जा सकता। अभी मौत के आंकड़े सामने नहीं आ रहे हैं, किंतु यह तथ्य और पिछले अनुभव हैं कि सदर्दी की वजह से हृदय रोगियों पर सर्वाधिक संकट मंडराने लगता है। अतः हृदय रोगियों को सावधान रहना चाहिए और बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलना चाहिए। एक शोध यह भी सामने आया है कि माइग्रेन से पीड़ित लोगों के लिए यह बेहद चुनौतीपूर्ण मौसम है। कुल मिलाकर, सदर्दी की सिरदर्दी आने वाले कुछ दिनों तक बनी रहेगी। सरकारी निकायों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों को भी पूरे इंतजामों के साथ मुस्तैद रहना चाहिए।
सर्दी ने जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। इसकी वजह से न केवल यातायात प्रभावित हुआ है, अस्पतालों में रोगियों की संख्या भी बढ़ गई है: प्रकाश मेहरा







