मुरादाबाद। सपा बार-बार उम्मीदवार बदल रही है। इसके पीछे सपा की कोई रणनीति है या किसी दबाव में ऐसा किया जा रहा है। ये कहना तो अभी मुश्किल है लेकिन सपा के इस कदम से दूसरे दल भी दोबारा गुण भाग करने को मजबूर हो गए हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद, बिजनौर, मेरठ और बदायूं में प्रत्याशी बदले जा चुके हैं।
बदायूं और मेरठ में दो-दो बार प्रत्याशी बदले जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश में सपा 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा और रालोद से गठबंधन में लड़ी थी। तब सपा को पूरे प्रदेश पांच सीटें मिली थी और बसपा 10 सीटे जीते में सफल हुई थी जबकि रालोद खाता भी नहीं खोल पाई थी।
इस रालोद का भाजपा से गठबंधन हुआ और बसपा अकेली ही मैदान में उतारी है। जबकि सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है। कांग्रेस को सपा ने उत्तर प्रदेश में 17 सीटें दी हैं। सपा पश्चिम उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद, बिजनौर, मेरठ और बदायूं की सीटों पर अपने प्रत्याशी बदल चुकी है।
मुरादाबाद में पहले डॉ. एसटी हसन को प्रत्याशी बनाया गया था। इसके बाद उनका टिकट काटकर रुचि वीरा को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतार दिया था। सपा के बार बार प्रत्याशी बदलने से दूसरे दल भी नए समीकरण के हिसाब से तैयारियों में जुट रहे हैं।
मुरादाबाद
इस सीट पर सपा ने पहले सांसद डॉ. एसटी हसन को प्रत्याशी बनाया था लेकिन नामांकन जमा होने के अंतिम दिन रुचि वीरा को मैदान में उतार दिया था और डॉ. एसटी हसन का टिकट का दिया था। इस सीट पर 2019 में सपा के टिकट पर डॉ. एसटी हसन सांसद चुने गए थे।
बिजनौर
सपा ने बिजनौर लोकसभा सीट पर यशवीर सिंह को प्रत्याशी बनाया गया था लेकिन कुछ दिन बाद ही सपा ने यशवीर सिंह का टिकट काटकर दीपक सैनी को प्रत्याशी बना दिया। दीपक सैनी नूरपुर विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक राम अवतार सैनी के बेटे हैं। बिजनौर लोकसभा सीट पर 2019 में बसपा के टिकट पर मलूक नागर चुनाव जीत कर संसद पहुंचे थे।
मेरठ
पश्चिम उत्तर प्रदेश की मेरठ लोकसभा सीट पर सपा ने सबसे पहले भानू प्रताप सिंह को प्रत्याशी बनाया था। सपाइयों के एक गुट ने इनका विरोध किया तो सपा ने अतुल प्रधान को टिकट देकर मैदान में उतार दिया लेकिन कुछ दिन बाद ही सपा ने अतुल प्रधान का टिकट भी काट दिया था और फिर संगीता वर्मा को प्रत्याशी बना दिया है। 2019 में इस सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी।
बदायूं
सपा ने बदायूं सीट पर पहले धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाया था लेकिन कुछ दिन बाद ही उनका टिकट काट दिया गया और अब धर्मेंद्र यादव आजमगढ़ के प्रत्याशी बनाए गए हैं। इनकी जगह शिवपाल यादव को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया था। अब शिवपाल यादव का टिकट काटकर उनके बेटे आदित्य यादव को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है। 2019 में इस सीट पर भाजपा की संघमित्रा मौर्य ने सपा के धर्मेंद्र यादव को हराकर जीत दर्ज की थी। संघमित्रा सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी हैं।






