लखनऊ: लोकसभा चुनाव 2024 में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के अलायंस से पिछड़ने के बाद राज्य में भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दल अब उसे आंख दिखा रहे हैं. उत्तर प्रदेश में नौकरियों में ओबीसी और एससी-एसटी रिजर्वेशन को लेकर सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार अब अपनों में ही घिरती नजर आ रही है. केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के बाद अब एनडीए के एक और सहयोगी निषाद पार्टी के मुखिया और यूपी में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने भी ओबीसी रिजर्वेशन को लेकर बड़ा बायन दिया है. उन्होंने कहा कि आरक्षण का मुद्दा सेंसिटिव है इसे ठीक से हैंडल नहीं किया है.
कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने ओबीसी को नौकरियों में आरक्षण मामले नाराजगी जताते हुए कहा कि आरक्षण बहुत सेंसिटिव मुद्दा है जिसने भी आरक्षण को टैकल नहीं किया उसका नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि आज निषाद समाज रोड पर टहल रहे हैं. निषादों को ओबीसी में डाल दिया गया था फिर निकाल दिया गया अब हम कहां हैं?
ओबीसी आरक्षण पर घिरे योगी
संजय निषाद ने कहा कि हमने इस मुद्दे को लेकर पत्राचार भी किया लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ है. 2019 और 2022 के चुनाव से पहले ये जातियां उत्साहित थी. लेकिन अब ये समाज भी उदासीन हो गया है. सपा ने आरक्षण मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि हमारा आरक्षण नहीं हो रहा जब छोटा काम नहीं हो रहा तो बड़ा काम कैसे होगा?
संजय निषाद के इस बयान के बाद यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार अब ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर घिरती नजर आ रही है. इससे पहले अपना दल की नेता और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर ओबीसी आरक्षण को लेकर सवाल उठाए थे.
अनुप्रिया पटेल ने कहा, ‘प्रदेश सरकार की साक्षात्कार वाली नियुक्तियों में ओबीसी , अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों को यह कहकर छाँट दिया जा रहा है कि वह योग्य नहीं है (not found suitable) कहकर नियुक्ति से रोक दिया जा रहा है और बाद में इस पद को अनारक्षित घोषित कर दिया जाता है.’ उन्होंने कहा कि पदों को अनारक्षित घोषित करने की व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाई जाए ताकि इससे इन वर्गों से आने वाले अभ्यर्थियों में आक्रोश पैदा न हो.
जानकारों का मानना है कि लोकसभा चुनाव में जिस तरह से विपक्ष ने संविधान और आरक्षण का मुद्दा उठाया ऐसे में बीजेपी के सहयोगी, सपा और कांग्रेस को मुद्दा और मौका दे रहे हैं. अनुप्रिया और संजय के सवालों के बीच बड़ा मुद्दा यह है कि आखिर बीजेपी के पास इससे निपटने का प्लान क्या है?






