Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

क्या है चागोस विवाद? जिसके लिए भारत ने क्यों ले लिया UK और USA से पंगा

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 17, 2024
in राष्ट्रीय
A A
Chagos dispute
10
SHARES
321
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मॉरीशस की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान हिंद महासागर में चागोस द्वीप समूह के मुद्दे पर द्वीपीय देश मॉरीशस को भारत के समर्थन की पुष्टि की है। चागोस द्वीप समूह 50 से अधिक वर्षों से लंदन और पोर्ट लुइस के बीच विवाद का एक मुद्दा बना हुआ है। मंगलवार को जयशंकर ने मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुईस में कहा कि भारत मॉरीशस की प्रगति और समृद्धि की दिशा में “निरंतर और सतत” समर्थन की पुष्टि करता है। उन्होंने कहा कि चागोस के मुद्दे पर भारत राष्ट्रों की अखंडता और उपनिवेशवाद के उम्मूलन के संदर्भ में लगातार मॉरीशस को समर्थन जारी रखेगा।

जयशंकर विशेष द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के मकसद से मॉरीशस के नेतृत्व के साथ “सार्थक बातचीत” के लिए दो दिवसीय पोर्ट लुईस की यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के वास्ते देश के नेतृत्व के साथ व्यापक वार्ता की। उन्होंने ब्रिटेन द्वारा मॉरीशस के क्षेत्र चागोस द्वीपसमूह पर कब्जा करने के मुद्दे पर भारत के समर्थन की पुष्टि की। इस कदम की मॉरीशस ने सराहना की है।

इन्हें भी पढ़े

hanuman ansh

सिनेमा के पर्दे पर लौट रही है सनातन संस्कृति की दिव्य शक्ति, आस्था बन रही है बॉक्स ऑफिस की सबसे बड़ी ताकत !

November 5, 2026
PM Modi

सत्ता का संकल्प तभी सार्थक, अब इंतजार नहीं, निर्णायक बदलाव का समय !

November 5, 2026
पटाखे

प्रदूषण और पटाखे, जिम्मेदारी सरकार की भी, जनता की भी!

November 5, 2026
pm modi

पुणे मेट्रो को मिली विकास की नई रफ्तार, पीएम मोदी ने 21,800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का किया शुभारंभ

November 4, 2026
Load More

जयशंकर ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ के साथ एक कार्यक्रम में कहा, “प्रधानमंत्री जी, जैसा कि हम अपने गहरे और स्थायी संबंधों को देखते हैं, मैं आज आपको फिर से आश्वस्त करना चाहूंगा कि चागोस के मुद्दे पर भारत उपनिवेशवाद के उन्मूलन और राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए अपने मुख्य रुख के अनुरूप मॉरीशस को अपना निरंतर समर्थन जारी रखेगा।”

क्या है चागोस द्वीप समूह और विवाद

हिन्द महासागर में मालदीव से लगभग 500 किलोमीटर दक्षिण में 60 से अधिक द्वीपों का एक समूह है, जिसे चागोस द्वीप समूह कहा जाता है। ये 60 छोटे-छोटे द्वीप मिलकर सात एटॉल का एक समूह बनाता है, जो करीब 2.5 लाख वर्ग मील क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां छोटी-छोटी समुद्री पहाड़ियां भी हैं जो भारत के लक्षद्वीप तक फैली समुद्री पर्वत श्रृंखला का दक्षिणी छोर है।

मॉरीशस इस द्वीप समूह को अपना हिस्सा मानता है और उस पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है, जबकि इस पर कब्जा ब्रिटेन का है। ब्रिटेन ने 1967 में यहां से सभी नागरिकों को जबरन हटाकर इस द्वीप समूह को संयुक्त राज्य अमेरिका को सैन्य अड्डा बनाने के लिए किराए पर दे दिया था, तब से विवाद जारी है। डिएगो गारसिया इस द्वीप समूह का अहम द्वीप है, जिस पर अमेरिकी सैनिक का बेस स्टेशन है।

अमेरिका का क्या हित लाभ?

ब्रिटेन ने 12 मार्च 1968 को मॉरीशस को आजाद कर दिया था लेकिन चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को वापस करने से इनकार कर दिया था। तब ब्रिटेन ने मॉरीशस को आजाद करने से पहले ही 1967 में चागोस द्वीप समूह को अमेरिका को किराए पर दे दिया था और दावा किया था कि यह द्वीप समूह हिंद महासागर में रक्षा उद्देश्यों के लिए काफी अहम है। उस वक्त ब्रिटेन ने मॉरीशस को धमकी दी थी कि अगर उसने चागोस पर उसकी बात नहीं मानी तो आजादी मिलना मुश्किल है। कहा जाता है कि मॉरीशस के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिवसागर रामगुलाम ने मजबूरन तब उनकी मांग मान ली थी।

बाद में 1980 में रामगुलाम ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह मुद्दा उठाया और चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को वापस करने की मांग की। उसके बाद से ही दोनों देशों के बीच यह विवाद जारी है। हालांकि, 2015 में मॉरीशस ने नीदरलैंड के हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय स्थायी मध्यस्थता न्यायालय में ब्रिटेन के खिलाफ मामलों को उठाया। इस मामले में, स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने कहा कि लंदन मॉरीशस के अधिकारों को उचित सम्मान देने में विफल रहा। न्यायालय ने चागोस द्वीप समूह के आसपास पानी में जानबूझकर समुद्री संरक्षित क्षेत्र बनाने के लिए भी ब्रिटेन को दोषी ठहराया। बाद में 2019 में मॉरीशस इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस पहुंचा। ICJ ने ब्रिटेन को चागोस द्वीप समूह मॉरीशस को लौटाने का निर्देश दिया लेकिन ब्रिटने ने उस आदेश को एडवायजरी कहकर मानने से इनकार कर दिया।

क्या कह रहा ब्रिटेन?

ब्रिटेन चागोस द्वीप समूह पर अपने कब्जे का लगातार बचाव करता रहा है और यह तर्क देता रहा है कि मॉरीशस की इस द्वीपसमूह पर कभी भी संप्रभुता नहीं रही है और हम उसके दावे को मान्यता नहीं देते हैं। इस साल जनवरी में ही ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड कैमरन ने चागोस द्वीप समूह के पूर्व निवासियों के पुनर्वास की संभावना को खारिज कर दिया था। उन्होंने सुझाव दिया कि 1960 और 1970 के दशक में ब्रिटिश सरकार द्वारा जबरन विस्थापित किए गए चागोसवासियों के लिए अब द्वीपों पर वापस लौटना “संभव नहीं” है। अब ब्रिटेन में नई सरकार आई है। ऐसे में यह देखना बाकी है कि कीर स्टारमर के नेतृत्व वाली नव-निर्वाचित लेबर पार्टी द्वीपों पर अपना रुख बदलती है या पुराने रुख पर कायम रहती है।

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र महासभा का 2019 के एक प्रस्ताव में भी पुष्टि की गई है कि चागोस द्वीपसमूह मॉरीशस का एक अभिन्न अंग है। बावजूद इसके ब्रिटेन और अमेरिका अड़ा हुआ है। मॉरीशस भारत की ही तरह लंबे समय तक ब्रिटेन का उपनिवेश रह चुका है और इस द्वीपीय देश का भारत से गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहा है। वहां बड़ी संख्या में हिन्दू बसते हैं, जिनकी जड़ें हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं। इस मुद्दे पर मॉरीशस का समर्थन करने से UK और US दोनों को मिर्ची लग सकती है। मॉरीशस बहुत ही छोटा से द्वीपीय देश है, जिसका कुल क्षेत्रफल 2040 वर्ग किलोमीटर है। यहां की कुल आबादी करीब 12 लाख है। उनमें से करीब आधे हिन्दू हैं।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
raghav chadha

राघव चड्ढा के नेतृत्व में आप में टूट, क्या बीजेपी को मिलेगा राजनीतिक फायदा ?

April 25, 2026

महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत, रोजमर्रा की चीजें हुई सस्ती!

April 15, 2025
Amit Shah-Bilawal Bhutto

सिंधु जल समझौता विवाद: अमित शाह के बयान के बाद बिलावल भुट्टो ने दी युद्ध की धमकी!

June 23, 2025
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • शीतकाल के लिए कल बंद होंगे तुंगनाथ के कपाट, जानिए कैसी हैं तैयारियां
  • दिवाली से पहले उत्तराखंड के कर्मचारियों को तोहफा, DA बढ़ाकर 63 प्रतिशत किया
  • धामी सरकार में पर्यटन सुविधाओं को विस्तार, चमोली के वाण में 1.36 करोड़ से बनेगी आधुनिक सतही पार्किंग

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.