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Home राष्ट्रीय

क्या भारत के लिए जरूरी हैं 3 बच्चे?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
December 2, 2024
in राष्ट्रीय
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children
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नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने रविवार को भारत की कुल प्रजनन दर यानी टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) पर बड़ी बात कही. उन्होंने भारतीयों से तीन बच्चे पैदा करने की अपील करते हुए कहा है कि देश के फर्टिलिटी रेट को 2.1 के बजाए कम से कम 3 होना चाहिए. संघ प्रमुख ने कहा कि जनसंख्या नीति में भी कहा गया है कि जनसंख्या वृद्धि दर 2.1 से नीचे नहीं जानी चाहिए. समाज की कुल प्रजनन दर 2.1 से नीचे जाती है, तो यह विलुप्त होने के कगार पर पहुंच सकता है.

प्रजनन दर को लेकर मोहन भागवत के बयान के बाद एक नई बहस शुरू हो गई है. सियासी बयानबाजी भी खूब हो रही है. क्या वाकई भारत का ‘भविष्य’ खतरे में है? साल के शुरुआत में इसको लेकर मशहूर मेडिकल जर्नल लैंसेट की रिपोर्ट भी आ चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी आदर्श प्रजनन दर 2.1 का मानक तय कर चुका है. आखिर क्या है इन रिपोर्ट्स में आइए डीटेल से जानते हैं..

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टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) क्या होता है

टीएफआर या कुल प्रजनन दर एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय सूचक (Demographic Indicators) है जो किसी देश या क्षेत्र की महिलाओं द्वारा औसतन पैदा किए जाने वाले बच्चों की संख्या को दर्शाता है.  इसे सरल शब्दों में समझें तो, यह बताता है कि एक महिला अपने पूरे प्रजनन काल (आमतौर पर 15 से 49 साल की उम्र) में औसतन कितने बच्चों को जन्म देती है.

उच्च टीएफआर का मतलब है तेजी से बढ़ती जनसंख्या.कम टीएफआर का मतलब है धीमी या स्थिर जनसंख्या वृद्धि.टीएफआर का सीधा संबंध सामाजिक-आर्थिक विकास से होता है.सरकारें टीएफआर को ध्यान में रखकर जनसंख्या नियोजन और विकास संबंधी नीतियां बनाती हैं.अधिक शिक्षित और आर्थिक रूप से सशक्त महिलाओं में आमतौर पर कम टीएफआर होता है.शहरी क्षेत्रों में टीएफआर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में कम है

भारत में टीएफआर को लेकर क्या है रिपोर्ट? 

भारत में टीएफआर (कुल प्रजनन दर) को लेकर हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई हैं. इन रिपोर्टों से पता चलता है कि भारत की कुल प्रजनन दर लगातार कम हो रही है.भारत में टीएफआर 1950 के दशक में 6 से अधिक थी, जो अब 2 के आसपास आ गई है. यह एक बड़ी कमी है और यह दर्शाता है कि भारतीय महिलाएं अब औसतन कम बच्चे पैदा कर रही हैं. सरकार की तरफ से 2.1 को प्रतिस्थापन स्तर माना जाता है, जिसका मतलब है कि एक पीढ़ी खुद को प्रतिस्थापित करने के लिए औसतन 2.1 बच्चे पैदा करती है. भारत का टीएफआर अब इस स्तर से काफी नीचे है, जिसका अर्थ है कि भारत की जनसंख्या वृद्धि धीमी हो रही है.

मोहन भागवत ने क्या कहा?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने जनसंख्या वृद्धि में गिरावट पर चिंता जताते हुए रविवार को कहा कि भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) मौजूदा 2.1 के बजाए कम से कम तीन होनी चाहिए. नागपुर में ‘कठाले कुलसम्मेलन’ में उन्होंने परिवारों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला और आगाह किया कि जनसंख्या विज्ञान के अनुसार, यदि किसी समाज की कुल प्रजनन दर 2.1 से नीचे जाती है, तो यह विलुप्त होने के कगार पर पहुंच सकता है.

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