नई दिल्ली. रेलवे सिर्फ टिकट बेचकर ही नहीं, बल्कि टिकट कैंसिलेशन से भी हर साल भारी कमाई करता है. एक ओर जहां रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि रेलवे कैंसिलेशन चार्ज से हुई आय का अलग से हिसाब नहीं रखता, वहीं पहले सामने आई रिपोर्ट्स से इस कमाई की झलक मिलती है.
कैसे होती है कमाई?
रेलवे टिकट कैंसिलेशन के लिए अलग-अलग चार्ज वसूलता है. कंफर्म टिकट हो, वेटलिस्ट या आरएसी, कैंसिलेशन चार्ज हर स्थिति में लागू होता है. यह चार्ज यात्रा की तारीख और ट्रेन के समय के आधार पर बढ़ता है.
48 घंटे पहले कैंसिल पर फ्लैट चार्ज
- एसी फर्स्ट क्लास: ₹240
- एसी 2 टियर: ₹200
- एसी 3 टियर/चेयर कार: ₹180
- स्लीपर क्लास: ₹60
48 घंटे से कम समय पर अधिक कटौती
- 48-12 घंटे पहले: किराए का 25%
- 12 घंटे से कम समय पर: किराए का 50%
ई-टिकट पर अतिरिक्त बोझ
ऑनलाइन बुक किए गए टिकट पर IRCTC का Convenience fee और जीएसटी भी रिफंड नहीं होता. इससे यात्रियों को ज्यादा नुकसान होता है.
कितना कमा लेता है रेलवे?
2020 में एक आरटीआई के जवाब में रेलवे ने खुलासा किया था कि जनवरी 2017 से जनवरी 2020 तक टिकट कैंसिलेशन चार्ज से करीब 9,000 करोड़ रुपये की कमाई हुई.
IRCTC की अलग कमाई
IRCTC भी टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन पर Convenience fee के जरिए मुनाफा कमाता है.
- 2019-20: ₹352.33 करोड़
- 2020-21: ₹299.17 करोड़
- 2021-22: ₹694.08 करोड़
- 2022-23 (दिसंबर तक): ₹604.40 करोड़






