नई दिल्ली : चुनाव चाहे लोकसभा का हो, विधानसभा का या स्थानीय निकाय का, इसमें जातीय समीकरण काफी मायने रखते हैं। तमाम राजनीतिक दल किस विधानसभा सीट पर किस जाति की कितनी आबादी है, किस जाति का नेता ताकतवर है, इसे ही ध्यान में रखते हुए टिकटों का फैसला करते हैं। बिल्कुल ऐसा ही दिल्ली के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला है।
दिल्ली में अपनी सरकार बनाने के लिए बीजेपी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पूरा जोर लगा रहे हैं। दिल्ली में तीनों दलों ने किस जाति को कितने टिकट दिए हैं, आइए इसे समझते हैं।
सवर्ण जातियों का वोट सबसे ज्यादा
दिल्ली की राजनीति में सवर्ण या ऊंची जातियों का वोट सबसे ज्यादा है। विभिन्न राजनीतिक दलों से मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में सामान्य जातियों का वोट 35 से 40% है। इनमें भी ब्राह्मण समुदाय की आबादी सबसे ज्यादा है।
जाति आबादी (प्रतिशत में)
ब्राह्मण 13%
राजपूत 8%
वैश्य 7%
खत्री 5%
इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा वोट बैंक ओबीसी जातियों का है। राजधानी में ओबीसी मतदाताओं की संख्या 30% है। ओबीसी में जाट और गुर्जर जातियों का बड़ा रोल है और यह ओबीसी मतदाताओं की लगभग आधी आबादी है।
जाति व धार्मिक समूह आबादी (प्रतिशत में)
ओबीसी 30%
दलित 16%
मुस्लिम 13%
सिख 3.5%
टिकट हासिल करने में सवर्ण जातियों का दबदबा
चुनावों में प्रतिनिधित्व के लिहाज से बात करें तो इसमें सवर्ण जातियों का दबदबा अधिक है। उदाहरण के लिए इसे ऐसे समझें, दिल्ली चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों द्वारा घोषित किए गए उम्मीदवारों में से 45% सवर्ण जातियों से हैं। आम आदमी पार्टी इस मामले में बीजेपी से भी आगे हैं और उसने 48% टिकट सवर्ण जातियों को दिए हैं। कांग्रेस ने 35% टिकट इन जातियों से आने वाले नेताओं को दिए हैं।
ब्राह्मणों, वैश्यों और राजपूतों को मिले कितने टिकट
सवर्ण जातियों में ब्राह्मणों को उनकी जनसंख्या के हिसाब से भी ज्यादा टिकट मिले हैं। कांग्रेस ने 17% टिकट ब्राह्मणों को दिए हैं, जबकि बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने क्रमशः 16% और 19% ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे हैं।
बीजेपी ने वैश्य समुदाय को सबसे ज्यादा 17% टिकट दिए हैं। आम आदमी पार्टी ने 13% और कांग्रेस ने 10% टिकट इस समुदाय को दिए हैं। राजपूत समुदाय को आम आदमी पार्टी ने 10%, बीजेपी ने 7% टिकट दिए हैं। कांग्रेस ने केवल एक राजपूत उम्मीदवार को मैदान में उतारा है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
त्रिवेदी सेंटर फॉर पॉलिटिकल डेटा द्वारा इकट्ठा किए गए डेटा के अनुसार, पिछले चुनावों में भी काफी हद तक सवर्ण जातियों का वर्चस्व रहा है। उदाहरण के लिए, मौजूदा दिल्ली विधानसभा में 50% विधायक सवर्ण जातियों से आते हैं। आम आदमी पार्टी के 40% विधायक सवर्ण हैं जबकि बीजेपी के छह विधायक इस समुदाय से हैं। दिल्ली की विधानसभा में कांग्रेस के पास एक भी विधायक नहीं है।







