नई दिल्ली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की बिगड़ती सेहत चिंता का विषय बनी हुई है। भले ही डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा और मेक्सिको पर टैरिफ लगाने के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी हो, लेकिन ट्रेड वॉर का संकट अभी टला नहीं है। ऐसे में डॉलर के और मजबूत होने और रुपये में कमजोरी आने की पूरी संभावना है। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले पहली बार 87 के पार पहुंच गया है।
क्या है रणनीति?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आरबीआई ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के माध्यम से हस्तक्षेप नहीं किया होता तो रुपया और भी कमजोर हो सकता था। उनके अनुसार, आरबीआई रुपये को अन्य एशियाई मुद्राओं के अनुरूप एडजस्ट होने दे रहा है। एशियाई मुद्राओं के साथ-साथ मैक्सिकन करेंसी में 2% से अधिक की गिरावट आई, जो लगभग तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है।
बिगड़ रहे हैं हालात
विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत डॉलर के कारण रुपये में नकारात्मक रुझान है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार शेयर बेचने से स्थिति और खराब हो गई है। वहीं, डॉलर इंडेक्स 1.01% बढ़कर 109.46 पर पहुंच गया है। इससे कच्चे तेल के दामों में भी बढ़त देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड में 1.41% की तेजी आई और इसकी कीमत 76.74 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। निवेशक अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अमेरिकी टैरिफ वैश्विक व्यापार को कैसे प्रभावित करेंगे?
क्या है संभावना?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, फिलहाल डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ पर आगे बढ़ने से खुद को रोक लिया है, लेकिन यह रोक अस्थाई है। ऐसे में आगे आने वाली खबरों से डॉलर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। उनका कहना है कि अगर टैरिफ संबंधित देशों के साथ-साथ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाते हैं, तो डॉलर कमजोर हो सकता है।
कब उठाएगा कदम?
जब भी डॉलर के मुकाबले रुपया ज्यादा कमजोर होने लगता है, तो RBI अपने खजाने में रखे डॉलर बेचता है। लिहाजा देखने वाली बात होगी कि रिजर्व बैंक ऐसा कब करता है, क्योंकि रुपया पहले से ही ऐतिहासिक गिरावट का सामना कर रहा है। डॉलर में मजबूती और रुपये में कमजोरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी अच्छी नहीं है। ऐसे में RBI को जल्द कोई ठोस कदम उठाना होगा। आज एक डॉलर की कीमत 87.13 रुपये हो गई है।







