नई दिल्ली: देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक विपरीत परिस्थितियों और कठिनाइयों का सामना करते हुए हमारी रक्षा करते हैं. चाहे चिलचिलाती धूप हो, कड़ाके की ठंड हो या बारिश और बर्फबारी हो, कठिन परिस्थितियों में भी सैनिक सीमाओं की सुरक्षा करते हैं. अनगिनत सैनिकों ने देश के लिए अपनी जान कुर्बान की है.
भारत सरकार सैनिकों की सुरक्षा के लिए तकनीक की मदद से कई आधुनिक डिवाइस तैयार कर रही है. ऐसे में तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के 9वीं कक्षा के एनसीसी छात्र ने अपने आविष्कार से सेना के अधिकारियों का दिल जीत लिया है. डेविड सोलोमन नाम के छात्र ने एक ऐसा उपकरण बनाया है जो जूते के जरिये जमीन में दबी बारूदी सुरंगों का पहले से पता लगाकर चेतावनी देता है.
35 फीट की दूरी पर बजाएगा अलार्म
डेविड सोलोमन ने ‘पेल्टियर मॉडल’ नामक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का उपयोग करके एक सेंसर बनाया है, जो सैनिकों द्वारा पहने जाने वाले जूतों के नीचे गर्मी और नमी के माध्यम से करंट उत्पन्न करता है. इस विशेष उपकरण को पहनकर चलने पर, अगर रास्ते में बारूदी सुरंगें या अन्य रहस्यमयी वस्तुएं दबी हुई हैं, तो यह उपकरण लगभग 35 फीट की दूरी पर अलार्म बजाएगा, जिससे सैनिकों घातक विस्फोट या हमलों से बच सकेंगे.
वर्तमान में, भारतीय सैनिक मैन्युअल रूप से बारूदी सुरंगों का पता लगाने के लिए अलग-अलग उपकरणों का उपयोग करते हैं. जूते से बारूदी सुरंगों का पता लगाने वाला यह शायद उपकरण है. छात्र डेविड सोलोमन को इस आविष्कार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार भी मिला है. इस उपलब्ध के लिए सोलोमन को स्कूल की तरफ से बधाई और प्रशंसा मिली है.
पिता से मिली प्रेरणा
मीडिया से बात करते हुए डेविड सोलोमन ने कहा, “मैंने सैन्य सुरक्षा कार्य के दौरान बारूदी सुरंगों का पहले से पता लगाने के लिए एक विशेष उपकरण तैयार किया है. इस उपकरण को जूते में लगाया जा सकता है. मेरे पिता विकलांग हैं. इसलिए मैंने अपने पिता को प्रेरणा लेते हुए यह आविष्कार किया ताकि कोई और उनके जैसा विकलांग न हो.”
सोलोमन ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान, मुझे आनंदन गुणसेकरन के बारे में पता चला, जो एक सैनिक थे, जिन्होंने बारूदी सुरंग विस्फोट में घायल होने के बावजूद पैरालिंपिक में देश के लिए खेला. इससे भी मुझे प्रेरणा मिली. मैंने जो उपकरण बनाया है, उसे मैंने गर्म और ठंडे मौसम में काम करने के लिए डिजाइन किया है.
डेविड सोलोमन ने बताया कि इस उपकरण को ‘पेल्टियर’ नाम के विद्युत उपकरण के जरिये करंट मिलता है. यह पेल्टियर गर्म और ठंडे मौसम में करंट को मिलाने में सक्षम है. इसका उपयोग केवल विदेशों में ही किया गया है. हमारे देश में किसी ने भी इस पेल्टियर उपकरण का बड़े पैमाने पर उपयोग नहीं किया है. मैंने इस उपकरण का पहली बार उपयोग किया है और इसे बनाया है.”
एनसीसी कमांडर पांडियन ने कहा, “भारतीय स्तर पर इस प्रतियोगिता में 55 छात्रों ने भाग लिया था. डेविड सोलोमन ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है. देश के प्रधानमंत्री, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और मंत्रियों सहित सभी ने छात्र की प्रशंसा की. छात्र के अगले चरण के विकास के लिए सैन्य विभाग की ओर से विभिन्न प्रयास किए जाएंगे.”
DRDO से मान्यता दिलाने की तैयारी
एनसीसी अधिकारियों के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय छात्र के इस अविष्कार को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा मान्यता दिलाने के लिए कदम उठाने की योजना बना रहा है.
देशभर के एनसीसी छात्रों के शैक्षणिक कौशल को बेहतर बनाने के लिए अभिनव प्रशिक्षण दिया जाता है. इसी के तहत पिछले साल जनवरी में नई दिल्ली में एनसीसी छात्रों के बीच राष्ट्रीय नवाचार प्रतियोगिता आयोजित की गई थी. 9वीं कक्षा के छात्र डेविड सोलोमन ने तमिलनाडु की ओर से इस प्रतियोगिता में भाग लिया और अपने आविष्कार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार जीता.







