दिल्ली डेस्क: संसद का मॉनसून सत्र 21 जुलाई से 12 अगस्त 2025 तक चलेगा। यह भारत की संसद (लोकसभा और राज्यसभा) का एक महत्वपूर्ण सत्र है, जो प्रतिवर्ष जुलाई-अगस्त के दौरान आयोजित होता है। इस सत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा, विधेयकों का प्रस्तुतिकरण और पारित करना और सरकारी नीतियों की समीक्षा की जाती है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस सत्र की तारीखों की घोषणा की है, और यह सत्र कुल 23 दिनों तक चलेगा।
मॉनसून सत्र अवधि और उद्देश्य
21 जुलाई से 12 अगस्त 2025 तक। यह सत्र 23 दिनों तक चलेगा, जिसमें महत्वपूर्ण विधायी और गैर-विधायी मुद्दों पर चर्चा होगी। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विधेयकों को पेश करना, पारित करना, और राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना है। यह सत्र सरकार और विपक्ष के बीच नीतिगत और सामयिक मुद्दों पर विचार-विमर्श का मंच प्रदान करता है।
प्रमुख मुद्दे और चर्चाएं
विपक्षी दलों, विशेष रूप से I.N.D.I.A गठबंधन, ने ऑपरेशन सिंदूर (पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकानों पर भारत के सैन्य अभियान) और पहलगाम हमले (जहां 26 नागरिकों की हत्या हुई) पर चर्चा के लिए विशेष सत्र की मांग की थी। हालांकि, सरकार ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि मॉनसून सत्र में ही इन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। विपक्ष इस मुद्दे पर हंगामा कर सकता है।
ऑपरेशन सिंदूर और हाल के आतंकी हमलों के संदर्भ में राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहन चर्चा की उम्मीद है। विपक्ष सरकार से इस मुद्दे पर कड़े सवाल पूछ सकता है, विशेष रूप से भारत-पाकिस्तान संबंधों और युद्धविराम जैसे विषयों पर।
विदेशी नेताओं के बयानों का प्रभाव
सरकार दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व और वर्तमान में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव ला सकती है। यह प्रस्ताव मार्च 2025 में जस्टिस वर्मा के दिल्ली आवास पर आग लगने की घटना के बाद, जिसमें बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी, के संदर्भ में है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू इस मुद्दे पर सभी दलों के नेताओं से चर्चा करेंगे। सत्र में आर्थिक स्थिति, बेरोजगारी, और हाल के राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष ने कूटनीति और सुरक्षा से संबंधित सवाल उठाए हैं, जिसमें विदेशी नेताओं के बयानों का प्रभाव भी शामिल है।
बीमा संशोधन विधेयक
इस सत्र में सरकार बीमा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की सीमा को 100% तक बढ़ाने के लिए बीमा संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। इस विधेयक का मसौदा तैयार है और इसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सत्र में कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने की योजना है, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित विधेयक शामिल हो सकता है। इसके अलावा, भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और साक्ष्य अधिनियम को बदलने वाले विधेयकों पर भी विचार हो सकता है।
मॉनसून सत्र 2025 का पहला बड़ा सत्र
विपक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले जैसे मुद्दों पर विशेष सत्र की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इसे नियमों के तहत मॉनसून सत्र में ही शामिल करने का निर्णय लिया है। सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें सभी दलों के साथ चर्चा कर सत्र के सुचारू संचालन की योजना बनाई जाएगी। यह बैठक सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनाने में महत्वपूर्ण होगी। इससे पहले, संसद का बजट सत्र 31 जनवरी 2025 को शुरू हुआ था और 4 अप्रैल 2025 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। मॉनसून सत्र 2025 का पहला बड़ा सत्र होगा, जो तीन महीने से अधिक के अंतराल के बाद बुलाया जा रहा है।
सरकार सभी मुद्दों पर खुली चर्चा के लिए तैयार
विपक्ष ऑपरेशन सिंदूर, राष्ट्रीय सुरक्षा, और जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। इससे सत्र में हंगामे की संभावना है। बीजेडी जैसी क्षेत्रीय पार्टियां ओडिशा को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग उठा सकती हैं, जो सत्र में और तनाव पैदा कर सकता है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि “सरकार सभी मुद्दों पर खुली चर्चा के लिए तैयार है और सभी दलों से एकजुटता की अपील की है।”
संसद सत्र का महत्व
यह सत्र नए संसद भवन में आयोजित होगा, जो सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया है। यह भवन आधुनिक सुविधाओं से लैस है और सभी मंत्रियों व राजनीतिक दलों के लिए कार्यालय प्रदान करता है। हालांकि संविधान दिवस (26 नवंबर) शीतकालीन सत्र के दौरान मनाया जाता है, मॉनसून सत्र में भी संवैधानिक और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
मॉनसून सत्र में आमतौर पर आर्थिक सर्वेक्षण और बजट पेश किया जाता है। इस सत्र में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए जाने की संभावना है, जो अर्थव्यवस्था की स्थिति और नीतिगत चुनौतियों का विवरण देगा।
अर्थव्यवस्था के भविष्य को आकार
संसद का मॉनसून सत्र 2025 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण सत्र होगा। ऑपरेशन सिंदूर, जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग, और बीमा संशोधन विधेयक जैसे मुद्दों के कारण यह सत्र काफी हंगामेदार रहने की संभावना है। सरकार ने सभी दलों से सहयोग की अपील की है ताकि सत्र सुचारू रूप से चल सके और महत्वपूर्ण विधायी कार्य पूरे हो सकें। यह सत्र देश की नीतियों, सुरक्षा, और अर्थव्यवस्था के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।







