प्रकाश मेहरा
एक्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली। कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे ने 1 जुलाई को एक विवादास्पद बयान दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि अगर कांग्रेस केंद्र में सत्ता में आती है, तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाया जाएगा। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है, क्योंकि RSS भारतीय जनता पार्टी (BJP) का वैचारिक संगठन माना जाता है।
क्या बोले प्रियांक खड़गे !
प्रियांक खड़गे ने कहा कि “अगर कांग्रेस केंद्र में सरकार बनाती है, तो वह कानूनी प्रक्रिया के तहत RSS को बैन करेगी। यह बयान कांग्रेस की उस लंबे समय से चली आ रही आलोचना के अनुरूप है, जिसमें पार्टी ने RSS पर देश में सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी अतीत में RSS की कार्यशैली और विचारधारा की आलोचना करते रहे हैं। हालांकि, प्रियांक खड़गे का यह बयान एक कदम आगे बढ़कर RSS पर पूर्ण प्रतिबंध की बात करता है, जो पहले इस तरह स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया था।
The RSS
•Did not participate in Salt Satyagraha
•Did not participate in Quit India Movement
•Opposed every mass moment for India’s freedom
•Opposed the tri color flag on the eve of Independence
•Distributed sweets after the assassination of Mahatma Gandhi
•Campaigned to… pic.twitter.com/zj8dauPAbO— Priyank Kharge / ಪ್ರಿಯಾಂಕ್ ಖರ್ಗೆ (@PriyankKharge) June 27, 2025
कांग्रेस का कर्नाटक का घोषणापत्र ?
प्रियांक खड़गे के बयान को कर्नाटक में कांग्रेस के पिछले रुख से जोड़ा जा सकता है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि वह बजरंग दल, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), और अन्य संगठनों पर प्रतिबंध लगाएगी, जो जाति या धर्म के आधार पर समुदायों के बीच नफरत फैलाते हैं।
ऐतिहासिक रूप से RSS पर भारत में तीन बार प्रतिबंध लग चुका है—1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद, 1975 में आपातकाल के दौरान, और 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद। प्रियांक का बयान इस इतिहास को दोहराने की ओर इशारा करता है।
BJP और RSS की प्रतिक्रिया !
BJP और RSS ने इस बयान की कड़ी निंदा की है। BJP नेताओं ने इसे कांग्रेस की “तुष्टिकरण की राजनीति” और “हिंदू विरोधी मानसिकता” का हिस्सा बताया है। RSS ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला करार दिया है।
कांग्रेस के कुछ नेताओं ने प्रियांक के बयान का समर्थन किया है, इसे सांप्रदायिकता के खिलाफ पार्टी की प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, कुछ नेताओं ने इसे निजी राय बताकर पार्टी की आधिकारिक लाइन से दूरी बनाने की कोशिश की है।
हिंदू संगठनों के खिलाफ आक्रामक रुख !
यह बयान 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद और 2029 के चुनावों से पहले की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य कांग्रेस के कोर वोट बैंक को मजबूत करना और BJP को घेरना है। हालांकि, यह BJP को ध्रुवीकरण का अवसर भी दे सकता है। प्रियांक खड़गे का बयान कांग्रेस के लिए दोधारी तलवार साबित हो सकता है। यह पार्टी के सांप्रदायिकता विरोधी रुख को मजबूत कर सकता है, लेकिन साथ ही इसे हिंदू संगठनों के खिलाफ आक्रामक रुख के रूप में भी देखा जा सकता है, जो उसे कुछ क्षेत्रों में नुकसान पहुँचा सकता है।
प्रियांक खड़गे का RSS को बैन करने का बयान एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील और ध्रुवीकरण करने वाला कदम है। यह कांग्रेस की RSS विरोधी विचारधारा को और मजबूत करता है, लेकिन इसके कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक परिणामों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह बयान आने वाले समय में भारतीय राजनीति में और चर्चा का विषय बनेगा।







