मुरार सिंह कंडारी
नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा में शहीद हुए जवान मोहन उइके की विधवा पत्नी आरती ने अपने आंसुओं के साथ बताया कि कैसे माओवादियों ने सलवा जुडूम पर प्रतिबंध लगने के बाद उनके पति को एम्बुश लगाकर बलिदान कर दिया। वो कहती हैं कि जब उनके पति बलिदान हुए तब उनके गोद में 3 महीने की बच्ची थी, जिसने कभी अपने पिता को देखा ही नहीं। आज इस प्रेस वार्ता में माँ के साथ उनकी 10 वर्षीय बेटी भी देश से गुहार लगाने पहुंची थी।
चिंगावरम हमले के पीड़ित महादेव दूधी टूटी फूटी हिंदी बोलते हैं, लेकिन फिर भी अपनी इसी हिंदी और गोंडी में उन्होंने बताया कि कैसे माओवादियों ने दंतेवाड़ा से जा रही आम यात्री बस को निशाना बनाया, जिसमें 32 लोग मारे गए। इस हमले में महादेव ने अपना एक पैर खो दिया। आज वो अपाहिज की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
बस्तर शांति समिति के जयराम ने इस पूरी प्रेस वार्ता के बारे में बताया कि दिल्ली पहुँचे ये नक्सल पीड़ित आज अपनी पीड़ा और अपना दुःख लेकर आये हैं, जो चाहते हैं कि देश के सम्मानीय सांसदगण ऐसे किसी भी व्यक्ति का समर्थन ना करें जिन्होंने उनकी जिंदगी को और बस्तर की भमि को नर्क बना दिया। वहीं बस्तर शांति समिति के ही मंगऊ राम कावड़े का कहना है कि इन पीड़ितों ने सभी सांसदों को पत्र लिखकर भी यही गुहार लगाई है कि वो सुदर्शन रेड्डी का समर्थन ना करें।
उन्होंने बताया कि बस्तर में ऐसे हजारों परिवार हैं जो सलवा जुडूम पर प्रतिबंध लगने के कारण प्रताड़ित हुए और नक्सल आतंक का दंश झेला, और आज वो सुदर्शन रेड्डी की इस उम्मीदवारी से बेहद आहत हैं, यही कारण है कि बस्तर शांति समिति ने बस्तर के कुछ नक्सल पीड़ितों के साथ मिलकर दिल्ली में गुहार लगाने का प्रयास किया है।
इस प्रेस वार्ता के दौरान नक्सल हिंसा में शहीद हुए जवान मोहन उइके की विधवा पत्नी आरती ने अपने आंसुओं के साथ बताया कि कैसे माओवादियों ने सलवा जुडूम पर प्रतिबंध लगने के बाद उनके पति को एम्बुश लगाकर बलिदान कर दिया। वो कहती हैं कि जब उनके पति बलिदान हुए तब उनके गोद में 3 महीने की बच्ची थी, जिसने कभी अपने पिता को देखा ही नहीं। इस प्रेस वार्ता में माँ के साथ उनकी 10 वर्षीय बेटी भी देश से गुहार लगाने पहुंची थी।
चिंगावरम हमले के पीड़ित महादेव दूधी टूटी फूटी हिंदी बोलते हैं, लेकिन फिर भी अपनी इसी हिंदी और गोंडी में उन्होंने बताया कि कैसे माओवादियों ने दंतेवाड़ा से जा रही आम यात्री बस को निशाना बनाया, जिसमें 32 लोग मारे गए। इस हमले में महादेव ने अपना एक पैर खो दिया। आज वो अपाहिज की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
बस्तर शांति समिति के जयराम ने इस पूरी प्रेस वार्ता के बारे में बताया कि दिल्ली पहुँचे ये नक्सल पीड़ित आज अपनी पीड़ा और अपना दुःख लेकर आये हैं, जो चाहते हैं कि देश के सम्मानीय सांसदगण ऐसे किसी भी व्यक्ति का समर्थन ना करें जिन्होंने उनकी जिंदगी को और बस्तर की भमि को नर्क बना दिया। वहीं बस्तर शांति समिति के ही मंगऊ राम कावड़े का कहना है कि इन पीड़ितों ने सभी सांसदों को पत्र लिखकर भी यही गुहार लगाई है कि वो सुदर्शन रेड्डी का समर्थन ना करें।
उन्होंने बताया कि बस्तर में ऐसे हजारों परिवार हैं जो सलवा जुडूम पर प्रतिबंध लगने के कारण प्रताड़ित हुए और नक्सल आतंक का दंश झेला, और आज वो सुदर्शन रेड्डी की इस उम्मीदवारी से बेहद आहत हैं, यही कारण है कि बस्तर शांति समिति ने बस्तर के कुछ नक्सल पीड़ितों के साथ मिलकर दिल्ली में गुहार लगाने का प्रयास किया है।