प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने हाल ही में राजस्थान विधानसभा से पूर्व विधायक के रूप में पेंशन के लिए आवेदन किया है। यह आवेदन उनके 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद आया है। धनखड़ ने 1993 में कांग्रेस के टिकट पर राजस्थान की किशनगढ़ विधानसभा सीट से विधायक के रूप में सेवा की थी, और अब पूर्व विधायक होने के नाते उन्हें पेंशन का अधिकार है।
धनखड़ का राजनीतिक सफर और इस्तीफा
जगदीप धनखड़ (जन्म: 18 मई 1951, राजस्थान के झुंझुनू जिले के किथाना गांव) एक वकील और राजनीतिज्ञ हैं। उन्होंने विभिन्न पार्टियों (जनता दल, कांग्रेस, बीजेपी) से जुड़कर कई महत्वपूर्ण पद संभाले।:-
- 1989-1991: झुंझुनू से लोकसभा सांसद (जनता दल)।
- 1990-1991: चंद्रशेखर सरकार में संसदीय कार्य राज्य मंत्री।
- 1993-1998: राजस्थान विधानसभा के सदस्य (कांग्रेस, किशनगढ़ सीट से)।
- 2019-2022: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल (बीजेपी समर्थित)।
- 2022-2025: भारत के उपराष्ट्रपति (राज्यसभा सभापति)।
धनखड़ ने 11 अगस्त 2022 को उपराष्ट्रपति पद ग्रहण किया था, लेकिन उनका कार्यकाल 2027 तक था। 21 जुलाई को उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के पीछे कई अटकलें लगीं, जैसे न्यायपालिका से जुड़े विवाद (जस्टिस यशवंत वर्मा पर इम्पीचमेंट नोटिस), सरकार से मतभेद (जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू की अनुपस्थिति पर असंतोष), और संवैधानिक मुद्दों पर उनकी आलोचना (जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर)। विपक्ष ने इसे “रहस्यमयी” बताया, लेकिन गृह मंत्री अमित शाह ने स्वास्थ्य कारणों को ही सही ठहराया।
इस्तीफे के बाद धनखड़ सार्वजनिक रूप से कम दिखे। विपक्ष (कांग्रेस के राहुल गांधी, जयराम रमेश आदि) ने उनके “लापता” होने पर सवाल उठाए। हाल ही में रिपोर्ट्स ने बताया कि “वे परिवार के साथ योग और टेबल टेनिस खेल रहे हैं।” अब पेंशन आवेदन के साथ वे फिर सुर्खियों में हैं।
पेंशन आवेदन कब और कहां किया?
29-30 अगस्त 2025 के आसपास राजस्थान विधानसभा को आवेदन सौंपा। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पुष्टि की कि आवेदन प्राप्त हो गया है और नियमानुसार प्रक्रिया चल रही है। धनखड़ 1993-1998 तक किशनगढ़ (अजमेर जिला) से विधायक रहे। राजस्थान विधानसभा अधिनियम के तहत पूर्व विधायकों को पेंशन का अधिकार है। आधार पेंशन ₹35,000 मासिक। 70+ वर्ष की उम्र पर 20% अतिरिक्त कुल ₹42,000 मासिक (कुछ स्रोतों में ₹45,000 का उल्लेख, लेकिन अधिकांश रिपोर्ट्स में ₹42,000 ही)।
दोहरी पेंशन व्यवस्था
राजस्थान में सांसद-विधायक दोनों रहे नेताओं को दोहरी पेंशन मिल सकती है। धनखड़ को लोकसभा सांसद के रूप में भी पेंशन (लगभग ₹25,000-₹30,000) मिलती है। कुल मिलाकर:उपराष्ट्रपति पेंशन: ₹2 लाख+ मासिक (उपराष्ट्रपति वेतन का 50-60%, जिसमें फ्री हवाई/रेल यात्रा, टाइप-VIII बंगला, मेडिकल सुविधाएं, 2 पीए आदि शामिल)। कुल अनुमानित ₹2.5 लाख+ मासिक पेंशन + सुविधाएं।
पूर्व उपराष्ट्रपति के रूप में
वाइस प्रेसिडेंट पेंशन एक्ट, 1997 के तहत 50-60% वेतन पेंशन। वेतन ₹4 लाख मासिक था, इसलिए पेंशन ₹2-2.5 लाख। सुविधाएं: फ्री यात्रा (पत्नी/साथी के साथ), प्राइवेट डॉक्टर, फर्नीचर, 2 मोबाइल फोन।
पूर्व विधायक के रूप में राजस्थान नियमों के तहत मेडिकल रीइंबर्समेंट, बस पास, गेस्ट हाउस। 80 वर्ष पर 30% अतिरिक्त पेंशन संभव। धनखड़ को कई पदों से पेंशन मिलेगी, जो राजस्थान की “दोहरी-तीहरी पेंशन” नीति का उदाहरण है। यह व्यवस्था कई पूर्व नेताओं (जैसे वसुंधरा राजे) को लाभ पहुंचाती है, लेकिन जनता में विवाद पैदा करती है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विवाद
बीजेपी ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया। स्पीकर देवनानी ने कहा, “नियमों के तहत फैसला होगा।” कांग्रेस ने तंज कसा। कुछ पोस्ट्स में कहा गया, “बीजेपी एजेंट बने, अब कांग्रेस विधायक पेंशन मांग रहे। मज़बूरी का नाम महात्मा गांधी !” राहुल गांधी ने पहले धनखड़ के “चुप्पी” पर सवाल उठाए थे। विपक्ष इसे “दोहरी पेंशन” पर बहस का मुद्दा बना सकता है, खासकर जब देश में पेंशन सुधारों की चर्चा हो।
9 सितंबर 2025 को नए उपराष्ट्रपति चुनाव हैं। एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को नामित किया है। धनखड़ का आवेदन राजनीतिक चर्चा को ताजा कर रहा है।
यह आवेदन धनखड़ के लिए आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है, लेकिन दोहरी पेंशन व्यवस्था पर सवाल उठाता है। क्या यह जनता के पैसे का उचित उपयोग है? विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बना सकता है। प्रक्रिया पूरी होने पर पेंशन शुरू हो जाएगी।