अनुराग श्रीवास्तव
स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली: पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी लेखनी और विचारों के लिए पहचाने जाने वाले युवा लेखक प्रकाश मेहरा ने अपनी पुस्तकों और कविताओं के माध्यम से पत्रकारिता से जुड़े युवाओं को नई दिशा दी है। उनकी रचनाएँ सोशल मीडिया पर खूब सराही जाती हैं, जिन्हें पाठक सीख और प्रेरणा के रूप में देखते हैं। कई पाठक उन्हें प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में भी मानते हैं।
उनकी लोकप्रिय पुस्तक “वे टू जर्नलिज़्म” ने देश-विदेश में खास पहचान बनाई, जिसके बाद कई बड़े संस्थानों ने उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए कहा— “इतनी कम उम्र में इतिहास रचा।”
नई पुस्तक ‘जर्नलिज़्म विदआउट बॉर्डर’ अगले माह होगी प्रकाशित
कुछ तकनीकी और प्रकाशन संबंधी कारणों से प्रकाश मेहरा की नई पुस्तक “जर्नलिज़्म विदआउट बॉर्डर” समय पर प्रकाशित नहीं हो पाई थी, लेकिन अब यह पुस्तक अगले माह लॉन्च होने जा रही है। उनके प्रशंसक और पत्रकार समुदाय इस पुस्तक को लेकर उत्साहित हैं और बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।
गृह क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान
पत्रकारिता के साथ-साथ प्रकाश मेहरा अपने गृह क्षेत्र—सैनिक बाहुल्य गाँव सवाड़—के विकास को लेकर भी निरंतर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने शिक्षा, चिकित्सा और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज़ उठाई।
केंद्रीय विद्यालय की वर्षों पुरानी घोषणा अब बनी हकीकत
गाँव सवाड़ में वर्षों पहले घोषित केंद्रीय विद्यालय को शुरू कराने में ग्रामीणों के साथ-साथ प्रकाश मेहरा का भी अहम योगदान रहा। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन, समाचार रिपोर्टिंग और आरटीआई के माध्यम से लगातार प्रयास किया।
प्रकाश मेहरा ने कहा “मेरे ग्रामीणों ने केंद्रीय विद्यालय के लिए अनथक मेहनत की। बारिश हो या धूप, सबने मिलकर जमीन दान की, टिनशेड बनाए। हमारे गाँव का कोई भी विद्यालय ले लीजिए—शिक्षा हो या खेल, हमारे बच्चे हर प्रतियोगिता में अव्वल रहते हैं। हमारा गाँव सैनिक बाहुल्य होने के साथ-साथ एक आदर्श गाँव भी है।”
चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्था पर बोलते हुए प्रकाश मेहरा ने असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा “क्षेत्र में प्राथमिक चिकित्सा केंद्र तो है, लेकिन सुविधाएँ बेहद सीमित हैं। अस्पताल गाँव से लगभग 10 किलोमीटर दूर है, और यदि वहाँ भी उपचार न मिले तो लोगों को 13 किलोमीटर दूर थराली जाना पड़ता है। यह स्थिति चिंता पैदा करती है।”
विकास कार्यों में लापरवाही पर चिंता
प्रकाश मेहरा ने बताया कि उन्होंने क्षेत्र के व्यापक विकास को लेकर जानकारी मांगी, लेकिन प्राप्त उत्तर अस्पष्ट और लापरवाह थे। “एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा—‘आप कुछ मानवता तो दिखाइए।’ यह सुनकर मैं सोच में पड़ गया कि जब अधिकारी ही ऐसी सोच रखते हैं तो आम जनता अपनी समस्याओं का समाधान कब पाएगी? हम कब तक इस व्यवस्था से लड़ते रहेंगे?”







