पौड़ी । जल शक्ति अभियान कैच द रेन कार्यों के निरीक्षण को लेकर केंद्रीय नोडल टीम जिले के भ्रमण पर है। मंगलवार को विकास भवन सभागार में टीम के सदस्यों ने जिले के विभिन्न विभागों से जल शक्ति अभियान, अमृत सरोवर योजना, जल स्रोत पुनर्जीवन, वर्षा जल संरक्षण, चाल-खाल, नौले, वाटर पौंड, माइक्रो डैम आदि कार्यों की जानकारी ली। इस दौरान सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई, जल संस्थान, पेयजल निगम, ग्राम्य विकास, कृषि विभाग आदि ने जल शक्ति अभियान के कार्यों, पर्यावरण संरक्षण, मृदा संरक्षण और वनीकरण के कार्यों की कार्ययोजना के बारे में जानकारी दी।
इस दौरान डीएम डा. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि जिले में जल शक्ति अभियान, अमृत सरोवर और पौधरोपण कार्यों के संबंध में ग्राम सभा स्तर पर पहले बैठकों का आयोजन किया गया, जिनमें अभियान के तहत किए जाने वाले कार्यों के संबंध में स्थानीय लोगों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करते हुए उनकी भागीदारी ली गई। ब्लाक स्तर से लेकर जिला पंचायत बैठकों, विभिन्न स्कूलों के साथ ही विशेष आयोजन के अवसरों पर कैच द रेन शपथ दिलाई गई व लोगों को जल के व्यावहारिक उपयोग, वैज्ञानिक तरीके से उसका संवर्धन संरक्षण के संबंध में जागरूक किया गया। कहा कि इस वर्ष 125 गांवों में 121 हेक्टेयर भूमि पर 20 लाख पौधों को लगाया जाएगा। निदेशक नोडल केंद्रीय टीम अरुण कुमार ने कहा कि जल संरक्षण के प्रभाव मिलजुलकर और व्यक्तिगत स्तर पर गांव से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक एक जन आंदोलन के रूप में होने चाहिए। उन्होंने जिले में जल संरक्षण व जल संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों पर कहा कि इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे।
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की की प्रो. अश्वनी अरविंद रानाडे ने कहा कि हमें न केवल जल विहीन जंगल, वन्यजीव जैसे प्रकृति के आभूषणों को बचाने के लिए सबकी भागीदारी लेनी होगी, बल्कि जिससे प्रकृति संरक्षण के कार्यों की व्यापकता बहुत उसकी पहल करनी चाहिए। बैठक के बाद केन्द्रीय नोडल अधिकारी अरुण कुमार और अश्वनी अरविन्द रानाडे वैज्ञानिक राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की की टीम ने केवर्स में मनरेगा कार्यों का स्थलीय निरीक्षण भी किया। उन्होंने पौधरोपण में हिस्सा लेकर ग्रामीणों के साथ कैच द रेन अभियान के संबंध में चर्चा की। इस मौके पर सीडीओ प्रशांत आर्य, डीडीओ पुष्पेन्द्र सिंह चौहान, डीपीआरओ जितेन्द्र कुमार, पीडी स्वजल दीपक रावत, ईई सिंचाई सुनील कुमार, ईई जल संस्थान शिव कुमार राय आदि शामिल थे।







