देहरादून: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के कारण उत्तराखंड के लगभग 5000 ट्रकों की एंट्री बंद हो गई है। यह 5000 ट्रक दिल्ली की सीमाओं पर खड़े हैं। वहीं ट्रकों की एंट्री दिल्ली में बंद होने से ट्रांसपोर्टर भी चिंतित हैं और दिल्ली में पुराने ट्रकों की एंट्री के लिए छूट देने की मांग सरकार से कर रहे हैं।
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का खामियाजा उत्तराखंड को भी भुगतना पड़ रहा है। प्रदूषण के चलते पुराने ट्रकों के प्रवेश पर रोक लगने से उत्तराखंड के लगभग 5000 ट्रकों के पहिए थम गए हैं। इससे दवाइयां, औद्योगिक कच्चे माल और फसलों की आपूर्ति ठप हो गई है, जिससे भारी नुकसान हो रहा है।
बीएस 6 का नियम लागू
प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर दिल्ली में बीएस 6 से कम मानक वाले मालवाहक वालों को घुसने नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में ज्यादातर ट्रक अब दिल्ली की सीमाओं तक जा रहे हैं और दिल्ली जाने के इंतजार में खड़े हैं। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष आप उनियाल ने बताया कि उत्तराखंड से रोजाना दिल्ली के लिए 5000 ट्रक आवाजाही करते हैं। देहरादून से 1000 ट्रक जाते हैं जो इंडस्ट्रियल एरिया से सामान ले जाते हैं और दिल्ली से भी यहां सामान की सप्लाई होती है।
ट्रकों की बुकिंग रद्द
देहरादून से दिल्ली दवाइयां भेजी जाती हैं, लेकिन बुधवार से दिल्ली में पुराने ट्रकों की एंट्री बंद होने के कारण पुराने ट्रकों को दूसरे शहरों में भेजा जा रहा है। जो ट्रक दिल्ली जा रहे हैं, उनको दिल्ली बॉर्डर तक भेजा जा रहा है। वहां से ट्रांसपोर्टर दिल्ली के लिए बीएस 6 और सीएनजी मालवाहक वाहन भेजे जा रहे हैं।
दिल्ली में ट्रकों की एंट्री बंद होने के बाद पछवादून के लगभग 100 ट्रक रवाना नहीं हो पाए। इस कारण कृषि उत्पादन मंडी परिषद से नकदी फसलों को लेकर वहां दिल्ली नहीं जा सके। पछुआ दून ट्रक ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष गुलफाम अली ने बताया कि गुरुवार को 40 ट्रकों की बुकिंग रद्द करनी पड़ी, जबकि 25 ट्रक दिल्ली से सामान लेकर नहीं पहुंचे।
जौनसार से बुधवार और गुरुवार को 15 ट्रकों की बुकिंग रद्द करनी पड़ी। उधर हरिद्वार के लगभग 1000 ट्रकों की एंट्री भी बंद हो गई है। इससे हरिद्वार और दिल्ली के बीच 30 प्रतिशत माल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। आलम यह है कि ट्रांसपोर्टर गाजियाबाद तक माल पहुंच कर वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं।
हर रोज करोड़ों का नुकसान
ट्रांसपोर्ट यूनियन के मुताबिक रोजाना करोड़ों रुपये का नुकसान का अनुमान है। छोटे और मध्यम ट्रांसपोर्टर के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि बीएस 6 मानक के ट्रक खरीदना उनके लिए आसान नहीं है। एक ट्रक की कीमत में भारी बढ़ोतरी हो गई है, जबकि पुराने ट्रक अभी भी लोन में फंसे हुए हैं। ट्रांसपोर्टरों ने अस्थाई छूट या चरणबद्ध व्यवस्था करने की मांग की है।







