नई दिल्ली। किसी भी एक्टर, फिल्ममेकर के लिए अपने काम के लिए सराहना पाना सबसे बड़ा अवॉर्ड होता है। लेकिन जब इनके इसी शानदार काम के लिए देश की सरकार भी उन्हें अवॉर्ड के जरिए सराहना दे तो मौका खास हो जाता है। जैसे इस साल शाहरुख खान ने पहली बार अपनी फिल्म जवान के लिए बेस्ट एक्टर नेशनल अवॉर्ड जीता था। इसके अलावा जब से ये अवॉर्ड सेरेमनी चली आ रही है हर साल बेहतरीन काम करने वाले कलाकारों का सराहा गया है। लेकिन अक्सर लोग जानना चाहते हैं कि नेशनल अवॉर्ड की शुरुआत कैसे और कब हुई, इसकी प्रक्रिया क्या है? तो चलिए हम आपको बताते हैं-
नेशनल अवॉर्ड की शुरुआत
नेशनल अवॉर्ड की शुरुआत 1954 में हुई थी। इस साल 1953 में आई फिल्मों और एक्टर्स को सम्मानित किया गया था। पहले ये अवॉर्ड सिर्फ रीजनल फिल्मों के लिए था। इसका मुख्य उद्देश्य काम की सराहना करना, प्रोडक्शन बढ़ाना था। फिर 1967 आते-आते ये अवॉर्ड हिंदी समेत सभी भाषाओं की फिल्मों, कलाकारों को दिया जाने लगा। पहला नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले एक्टर उत्तम कुमार थे, वहीं एक्ट्रेस थीं नरगिस दत्त। दोनों को इनकी फिल्म ‘रात दिन’ के लिए ये अवॉर्ड दिया गया था।
नेशनल अवॉर्ड की प्रक्रिया
हर साल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय इस अवॉर्ड सेरेमनी का आयोजन दिल्ली के विज्ञान भवन में करता है। नेशनल अवॉर्ड जीतने के लिए फिल्म प्रोड्यूसर अपनी फिल्म के लिए आवेदन दे सकते हैं। उन्हे फिल्म की एंट्री NDFC को भेजनी होती है। वही फिल्में एंट्री के लिए भेजी जा सकती हैं जो 1 जनवरी से 31 तारीख के बीच रिलीज हुई और उसे CBFC से सर्टिफिकेट मिला हो। इसी फिल्म के सभी कैटेगरी पर जूरी ध्यान देती है और उसी हिसाब से अपना चयन आगे तक भेजती है। जूरी का चयन NDFC करता है। फीचर फिल्मों के लिए 11 से 13 सदस्य जूरी में होते हैं और नॉन फीचर फिल्मों में 5 से 7 सदस्यों की संख्या होती है।
इन बातों का रखा जाता है ख्याल
इन बातों का खास ख्याल रखा जाता है। अगर बेस्ट एक्टर या एक्ट्रेस केटेगरी में अवॉर्ड के लिए आवेदन है तो उस फिल्म के क्रेडिट में एक्टर का नाम और एक्टर की ओरिजिनल आवाज होनी चाहिए। अगर एक्टर की आवाज डब की गई है तो उन्हें रेस से बाहर कर दिया जाता है।
आखिरी फैसला
किसी भी फिल्म या एक्टर को अवॉर्ड देने के लिए जूरी के दिए नामों को अंतिम फैसला समझा जाता है। फाइनल नामों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भेजा जाता है। प्रेस कांफ्रेंस कर सभी विनर्स के नामों का ऐलान कर दिया जाता है। बाद में विज्ञान भवन में देश के राष्ट्रपति सभी विजेताओं को सम्मानित करते हैं।







