विकाश शुक्ला
उमरिया (मध्य प्रदेश)। सरकारी धान उपार्जन व्यवस्था सवालों के घेरे में है। सेवा सहकारी समिति गढ़पुरी स्थित उपार्जन केन्द्र पर खुलेआम भ्रष्टाचार और किसानों के शोषण का आरोप लगा है। ग्राम कोड़ार निवासी मधु मिश्रा पति श्री राजेन्द्र मिश्रा ने आरोप लगाया है, कि उनके साथ धान तौल एवं भुगतान में गंभीर धोखाधड़ी की गई। पीड़ित किसान के अनुसार उन्होंने 14 क्विंटल 40 किलो धान विक्रय हेतु पंजीयन कराया था, लेकिन केन्द्र में प्रति बोरी 41 किलो 500 ग्राम के हिसाब से तौलकर 14 क्विंटल 94 किलो धान जबरन ले लिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि अतिरिक्त 50 किलो धान का न तो भुगतान किया गया और न ही इसे सरकारी रिकार्ड में दर्ज किया गया, जिससे सीधे-सीधे सरकारी तंत्र की संलिप्तता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ऑपरेटर पर वसूली के आरोप
इतना ही नहीं धान तौलवाई के नाम पर 12 रुपये प्रति बोरी की वसूली और कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा दो हजार रुपये नगद लिए जाने का आरोप भी सामने आया है। किसान का कहना है कि इस तरह की किसी भी अवैध वसूली का कोई नियम नहीं है, फिर भी खुलेआम पैसा लिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है, कि गढ़पुरी उपार्जन केन्द्र में ऑपरेटर और अधिकारी मिलकर भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं और गरीब किसानों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहे हैं। सवाल यह भी है कि यदि एक किसान से 50 किलो धान बिना भुगतान हड़पा जा सकता है, तो अब तक कितने किसानों की उपज इसी तरह निगल ली गई होगी ?

कार्यवाई की मांग
इस तरह से ठगी और अवैध वसूली को लेकर किसानों में आक्रोश व्याप्त हैं। वहीं मामले को लेकर दिन मंगलवार (20 जनवरी 2026) को कलेक्टर उमरिया को शिकायत दर्ज कराई गई है। पीड़ित ने अतिरिक्त धान का भुगतान, अवैध रूप से वसूली गई राशि की वापसी और दोषियों पर आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। अब बड़ा सवाल यह है, कि क्या प्रशासन इस खुली लूट पर आंखें मूंदे रहेगा, या फिर दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर किसानों को न्याय दिलाएगा ? यह स्थिति न केवल किसानों के लिए अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह दिखाती है कि सरकार और प्रशासन, जिनका मुख्य उद्देश्य किसानों की सहायता करना होना चाहिए, वही उन्हें शोषण और धोखाधड़ी का शिकार बना रहे हैं।







