नई दिल्ली : भारत–अमेरिका समझौते को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष को कठोर शब्दों में घेरा. उन्होंने कहा कि हमारा विपक्ष हाय–तौबा मचा रहा था कि अमेरिका के साथ ऐसा समझौता हो जाएगा जिसमें भारत का किसान तबाह हो जाएगा, बर्बाद हो जाएगा, लुट जाएगा.
शिवराज सिंह ने कहा कि ऐसे आरोप लगाए गए कि कहते हुए शर्म आती है. उन्होंने याद दिलाया कि यह वही नरेंद्र मोदी हैं, जिन्होंने कहा था देश नहीं झुकने दूंगा और यह भी कहा था कि चाहे कितनी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े, किसानों के हितों की रक्षा करेंगे.अभी जो USA के साथ समझौता हुआ है, इसके पहले 27 देशों के साथ यूरोपियन यूनियन के और उसके पहले जो FTA हुए हैं, आज के समझौते ने तो बता दिया है कि देश के और किसानों के हित पूरी तरह से सुरक्षित रखे गए हैं.
कृषि और डेयरी पर स्पष्ट सुरक्षा: ये उत्पाद अमेरिका से नहीं आएंगे
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) आए थे.किसानों की मुख्य चिंता पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि वह केवल किसानों के पक्ष की चर्चा करेंगे. हमारे प्रमुख अनाज मक्का,बड़ा हल्ला मचाया जा रहा था कि आ जाएगा, बिल्कुल नहीं आएगा। मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन, पोल्ट्री, दूध, पनीर, इथेनॉल, तंबाकू, कई सब्जियां और उसके अलावा कृषि और डेयरी उत्पाद कई तरह के पूरी तरह से सुरक्षित रखे गए हैं.
उन्होंने कहा कि इन उत्पादों पर भारत का बाजार भारत के किसानों के लिए सुरक्षित है.अमेरिका से न तो मक्का आएगा, न गेहूं, न चावल, न सोया, न पोल्ट्री उत्पाद, न दूध, न पनीर, न इथेनॉल, न तंबाकू और न ही कई संवेदनशील सब्जियां। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका से नहीं आएंगे,भारत के हितों का पूरी तरह से संरक्षण किया गया है.
निर्यात के नए अवसर:बासमती, मसाले और टेक्सटाइल को बढ़त
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस समझौते से देश के अन्य क्षेत्रों को भी लाभ होगा,विशेष रूप से हमारे निर्यातकों,MSME और युवाओं को.उन्होंने कहा कि भारतीय सामानों पर जो परंपरागत शुल्क था,वह घटकर लगभग 18 प्रतिशत हो जाएगा,जिससे टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर उत्पाद,ऑर्गेनिक केमिकल,होम डेकोर,हस्तशिल्प और चुनिंदा मशीनरी जैसे क्षेत्रों में विशाल बाजार और अवसर मिलेंगे.उन्होंने बताया कि जेनेरिक दवाओं, रत्नों, हीरों, विमान के पुर्जों और कई तरह के सामान पर शुल्क घटकर शून्य हो जाएगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा और ‘Make in India’ को मजबूती मिलेगी.
कृषि के संदर्भ में उन्होंने कहा कि बासमती चावल और मसालों को विशेष लाभ होगा.हरियाणा,पश्चिम उत्तर प्रदेश और पंजाब में बासमती उगाने वाले किसानों के लिए 18% टैरिफ वाले बाजार में नए अवसर खुलेंगे. उन्होंने उल्लेख किया कि पहले लगभग 63,000 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था,जो इस समझौते से और बढ़ने की संभावना है और टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास उत्पादक किसानों को भी फायदा होगा.
भारत की दलहन नीति और किसान हितों के मोर्चे पर एक साथ दो बड़ी घोषणाएं
एक तरफ अमलाहा (सीहोर) में खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) से ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ का रोडमैप तय हुआ,तो दूसरी तरफ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि दालें आयात करना हमारे लिए शर्म की बात है.अब भारत दालों का निर्यातक बनेगा और हालिया अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बावजूद भारत के किसान के हितों पर जरा सी भी आंच नहीं आने दी जाएगी.
किसान को उचित मूल्य मिले, यह हम सुनिश्चित करेंगे
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीज से लेकर बाजार तक की पूरी व्यवस्था पर सरकार का फोकस है.अच्छा उत्पादन होने पर किसान को उचित मूल्य मिले, यह हम सुनिश्चित करेंगे.उन्होंने बताया कि क्लस्टर स्तर पर दाल मिल लगाने को प्रोत्साहन दिया जाएगा और दाल मिल स्थापित करने पर भारत सरकार ₹25 लाख तक की सब्सिडी देगी,ताकि जहां दाल का उत्पादन होगा,वहीं उसकी प्रोसेसिंग और बिक्री हो और किसानों को वैल्यू एडिशन का सीधा लाभ मिल सके.
चौहान ने कहा कि इस मिशन के तहत देशभर में 1,000 दाल मिलें खोली जाएंगी,जिनमें से 55 दाल मिलें मध्य प्रदेश के अलग-अलग क्लस्टरों में स्थापित की जाएंगी,जिससे प्रदेश के किसानों को विशेष लाभ मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.







