नई दिल्ली: दुनिया भर के देशों को चीन अपने कर्ज नीति के माया जाल में फंसा रहा है. पिछने एक दशक से ज्यादा समय से वह अफ्रीकी देशों पर भी अपनी नजर गढ़ाए बैठा है, जो भारत के लिए बेहद दुखद संकेत है. अफ्रीकी देश सामरिक और व्यापारिक तौर पर भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं. अलग-अलग तरीकों से भारत सरकार अपने पुराने रिश्तों को और मजबूत करना शुरू कर चुकी है. इस मजबूती की झलक 15 फरवरी से 25 फरवरी तक विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और ‘मिलन’ अभ्यास में भी देखने को मिलेगी.
भारत-अफ्रीका रिश्तों की मजबूती
इस कार्यक्रम में 70 से ज्यादा देश शामिल होंगे, जिसमें से 20 से अधिक अफ्रीकी देश हैं. ये देश अफ्रीका के ईस्ट और वेस्ट दोनों कोस्ट से शामिल हो रहे हैं. नौसेना के मुताबिक सेशेल्स और साउथ अफ्रीका अपने जंगी जहाजों के साथ शामिल होंगे, वहीं अन्य देश अपने नौसैनिक अधिकारियों के साथ भाग लेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन सागर से महासागर का मंत्र दिया है और नौसेना इसे बड़ी तेजी से आगे बढ़ा रही है. इसमें अफ्रीकी देशों की अहमियत बहुत है. आत्मनिर्भर भारत के तहत देश में बनाए जा रहे स्वदेशी उपकरणों के लिए इन्हें एक बड़े बाजार के तौर पर देखा जा रहा है. इसके अलावा, अफ्रीकी देशों में मौजूद खनिज संसाधनों और हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में भारत उनकी मदद कर सकता है और अपनी ऊर्जा जरूरतों को भी पूरा कर सकता है. भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री भी तेजी से आगे बढ़ रही है.
मिशन सागर और अफ्रीकी देशों की अहमियत
भारत अफ्रीकी देशों के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत करने में लगा है. इसमें सैन्य अभ्यास, ट्रेनिंग और मेंटेनेंस शामिल हैं. पिछले साल अप्रैल में नौसेना ने पहली बार दो बड़े अभियानों को अंजाम दिया था. पहला आईओआर यानी इंडियन ओशन शिप सागर और दूसरा एआईकेईवाईएमई अभ्यास. जो समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भारतीय नौसेना और तंजानिया पीपुल्स डिफेंस फोर्स द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था. इस अभ्यास में छह दिन के लिए अफ्रीका के कोमोरोस, जिबूती, इरीट्रिया, केन्या, मेडागास्कर, मॉरीशस, मोजाम्बिक, सेशेल्स और दक्षिण अफ्रीका शामिल हुए थे.
भारत-अफ्रीका रक्षा सहयोग
इस अभ्यास का मकसद समुद्री सुरक्षा के अलग-अलग पहलुओं पर ट्रेनिंग देना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना था. अगर हम भारत के अन्य देशों के साथ संबंध के बारे में बात करें तो अगस्त 2021 में भारतीय नौसेना ने अल्जीरियाई नौसेना के साथ अपना पहला पीएएसएसईएक्स अभ्यास अल्जीरियाई तट पर किया था. दिसंबर 2024 में रूस से भारत के लिए रवाना हुआ आईएनएस तुशील मोरक्को के कैसाब्लांका बंदरगाह पर भी रुका था. जब भारत में जी20 शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने का समर्थन किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले ने अफ्रीकी देशों के प्रति भारत के नजरिए को साफ तौर पर पेश किया.
हाई-प्रोफाइल दौरे और समझौते
केवल यही नहीं रिश्तों को और मजबूत करने के लिए हाई-प्रोफाइल दौरे भी हुए.साल 2023 में वॉयस ऑफ़ द ग्लोबल साउथ प्रक्रिया का आयोजन किया गया था. अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु स्टेट विजिट पर अल्जीरिया गई थीं. सीडीएस जनरल अनिल चौहान के अल्जीरिया दौरे के समय अल्जीरियाई पीपुल्स नेशनल आर्मी के साथ रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया था. ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपना पहला विदेश दौरा अफ्रीकी के अल्जीरिया का ही किया था.
चीन की चुनौती
चीन दुनिया भर के छोटे और कम विकसित देशों में अपना प्रभाव तेजी से बढ़ा रहा है. इसी दिशा में उसने 2017 में अफ्रीका के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश जिबूती में अपना पहला विदेशी सैन्य अड्डा स्थापित किया, जो जिबूती रेड सी और अदन की खाड़ी के पास स्थित है. इसके अलावा, चीन अफ्रीकी देशों को सस्ते दाम पर और आसान शर्तों वाले लोन के जरिए सैन्य उपकरण भी उपलब्ध कराता है. यह जानकारी SIPRI की एक रिपोर्ट में भी सामने आई थी.







