नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना में बड़े में बड़े बदलाव की तैयारी की है. RBI ने एक प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत किसानों के लिए कवरेज का विस्तार करना, लोन की लिमिट और केसीसी के संचालन में सुधार करना शामिल है.
6 फरवरी को जारी अपने नोटिफिकेशन में आरबीआई ने कहा कि वह जल्द ही संशोधित गाइडलाइन जारी करेगा, ताकि किसानों और एग्री सेक्टर में उभरती आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके. आरबीआई चाहता है कि तीन दशक पुराने इस योजना के ढांचे का आधुनिकरण किया जाए, जिसे मूल रूप से किसानों को कृषि कार्यों के लिए समय पर और पर्याप्त लोन की सुविधा दी जा सके.
कितने फीसदी ब्याज पर लोन
KCC के तहत किसानों को अभी रियायती दर पर लोन दी जाती है, जिसमें भारत सरकार 2% की ब्याज सब्सिडी और 3% का तुरंत रिपेमेंट्स सब्सिडी देती है, जिससे ब्याज दर प्रभावी रूप से घटकर 4 प्रतिशत प्रति साल हो जाता है. पिछले कुछ वर्षों में, किसान क्रेडिट कार्ड योजना का विस्तार किया गया है और इसमें कृषि से संबंधित और गैर-कृषि गतिविधियों के लिए निवेश लोन भी शामिल किया गया है.
2004 में इसका विस्तार किया गया और बाद में 2012 में इसकी समीक्षा की गई ताकि प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सके और इलेक्ट्रॉनिक किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जा सकें. योजना में दिशानिर्देश दिए गए हैं, लेकिन बैंकों को संस्थागत और स्थान विशेष आवश्यकताओं के आधार पर छूट दी गई है.
4 बड़े बदलाव क्या होने जा रहे हैं?
RBI द्वारा प्रस्तावित सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक है फसल लोन की मंजूरी और रिपेमेंट के लिए फसल लोन का स्टैंडलाइजेशन. प्रस्तावित नियम के तहत फसलों को अवधि के आधार पर बांटा गया है, जिसमें 12 महीने तक के सर्किल वाली शॉर्ट टर्म की फसलें और 18 महीने तक के सर्किल वाली लॉन्गटर्म फसलें. इस कदम से बैंकों और राज्यों के बीच विसंगतियों को कम किया जा सकता है.
दूसरा बदलावा- फसल के हिसाब से लोन की अवधि तय की जा सकती है. खासकर लंबी अवधि की फसलों के लिए ये बदलाव जरूरी है. आरबीआई ने किसान क्रेडिट कार्ड की कुल अवधि को छह वर्ष तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है. इसका उद्देश्य उन किसानों के लिए भुगतान की सुगमता सुनिश्चित करना और भुगतान संबंधी तनाव को कम करना है जो ऐसी फसलों की खेती करते हैं जिन्हें तैयार करने में अधिक समय लगता है.
तीसरा बदलाव- किसानों को ऐसा लोन दिया जाए, जिससे उसकी खेती की लागत आवश्यकता पूरी हो सके. केसीसी के तहत अब लिमिट फसलों के हिसाब से तय हो सकेगी. इस बदलाव से अपर्याप्त लोन की समस्या का समाधान होने और किसानों को उपलब्ध कार्यशील पूंजी की पर्याप्तता में सुधार होने की उम्मीद है.
चौथा बदलाव- यह नियम टेक्नोलॉजी अपनाने और टिकाऊ एग्रीकल्चर सिस्टम पर फोकस है. RBI ने कृषि संपत्तियों की मरम्मत और रखरखाव के लिए निर्धारित अतिरिक्त 20% घटक के तहत पात्र खर्चों की सूची का विस्तार करने का प्रस्ताव दिया है. इसमें अब मिट्टी परीक्षण, वास्तविक समय के मौसम पूर्वानुमान और जैविक या अच्छी कृषि पद्धतियों के प्रमाणन जैसे तकनीकी हस्तक्षेपों से संबंधित लागतें शामिल होंगी.
आरबीआई ने मांगी प्रतिक्रिया
RBI ने कमर्शियल बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और ग्रामीण बैंकों के लिए यह गाइडलाइन जारी की है और विनियमित संस्थाओं, किसानों और अन्य हितधारकों से प्रतिक्रिया मांगी है. यह प्रतिक्रियाएं 6 मार्च, 2026 को या उससे पहले आरबीआई की वेबसाइट पर ‘कनेक्ट 2 रेगुलेट’ के जरिए या ईमेल से भेजी जा सकती हैं.







