नई दिल्ली : अगर आप दूसरे राज्य से एनओसी लेकर अपना यात्री वाहन देहरादून में पंजीकृत कराने की सोच रहे हैं, तो अब यह काम पहले जितना आसान नहीं रहा. आरटीओ (प्रशासन) संदीप सैनी ने एक अहम आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि बिना पुलिस सत्यापन के देहरादून संभाग में किसी भी ऐसे वाहन का पंजीयन अब संभव नहीं होगा.
नए नियमों के तहत वाहन स्वामी के मूल पते अथवा किरायानामे का पुलिस से सत्यापन कराना अनिवार्य कर दिया गया है. यह फैसला यूं ही नहीं लिया गया. पिछले कुछ महीनों में जांच के दौरान विभाग के हाथ कई ऐसे संदिग्ध मामले लगे, जिनमें पते और पहचान से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं. कई आवेदक अधूरे कागजात के साथ पंजीयन की कोशिश कर रहे थे, जिससे गलत जानकारी के आधार पर प्रमाण-पत्र जारी होने का खतरा बढ़ता जा रहा था.
विभाग ने अपनाई ‘सत्यापन पहले, सेवा बाद में’ की नीति
आदेश में साफ कहा गया है कि 12 सीटर से अधिक क्षमता वाले यात्री वाहनों के पंजीकरण और परमिट से जुड़े सभी मामले अब केवल पूर्ण दस्तावेज सत्यापन के बाद ही निपटाए जाएंगे. विभाग ने ‘सत्यापन पहले, सेवा बाद में’ की नीति अपना ली है और इसमें किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी.
दस्तावेज गायब होने पर निरस्त होगा आवेदन
आदेश की भाषा भी कड़ी है. यदि किसी फाइल में एक भी दस्तावेज अधूरा या गायब पाया गया तो आवेदन तत्काल निरस्त कर दिया जाएगा. इसके साथ ही एजेंटों की भूमिका पर भी पैनी नजर रखी जाएगी, क्योंकि माना जा रहा है कि कई मामलों में बिचौलियों के जरिए ही अधूरे कागजों वाले आवेदन अंदर तक पहुंच जाते थे.
फर्जी पंजीयन पर लगेगी लगाम
आरटीओ का कहना है कि इस कदम से परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी और फर्जी पंजीयन पर लगाम लगेगी. वाहन मालिकों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन जमा करने से पहले अपने सभी दस्तावेजों की खुद एक बार अच्छी तरह जांच कर लें, ताकि बाद में परेशानी न उठानी पड़े.







