प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन (Durand Line) को लेकर तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। हालिया घटनाक्रम में दोनों देशों के बीच सैन्य झड़पों की खबरें सामने आई हैं, जिनमें भारी नुकसान के दावे किए जा रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में एक नाम तेजी से उभर रहा है- तालिबान के सैन्य प्रमुख फसीहुद्दीन फितरत।
क्या है पूरा मामला ?
सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार की अल सुबह पाकिस्तान की ओर से काबुल समेत अफगानिस्तान के दो प्रांतों पर हवाई हमले किए गए। इसके बाद अफगानिस्तान की ओर से जवाबी कार्रवाई की गई। अफगान पक्ष का दावा है कि उसने सीमा पर पाकिस्तान के 55 सैनिकों को मार गिराया और डूरंड लाइन के आसपास पाकिस्तान सेना की 19 चौकियों व दो सैन्य ठिकानों पर कब्जा कर लिया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। दोनों देशों की ओर से अलग-अलग बयान जारी किए गए हैं, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
क्या है डूरंड लाइन विवाद ?
डूरंड लाइन 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच खींची गई सीमा रेखा है। पाकिस्तान इसे अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है। अफगानिस्तान की कई सरकारें इसे औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं करतीं। यही वजह है कि इस सीमा पर समय-समय पर झड़पें और तनाव देखने को मिलता है।
कौन हैं फसीहुद्दीन फितरत ?
फसीहुद्दीन फितरत वर्तमान में तालिबान सरकार के सैन्य प्रमुख (Chief of Army Staff) माने जाते हैं। वे तालिबान के उत्तरी गुट से जुड़े रहे हैं।2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद उन्हें अफगान सशस्त्र बलों की कमान सौंपी गई। रणनीतिक और आक्रामक सैन्य निर्णयों में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। बताया जा रहा है कि हालिया सीमा रणनीति—जिसमें चौकियों पर कब्जा और जवाबी कार्रवाई शामिल है—उनकी देखरेख में तैयार की गई। पाकिस्तान परमाणु शक्ति संपन्न, आधुनिक वायुसेना और बड़ी नियमित सेना। अफगानिस्तान (तालिबान)। सीमित संसाधन, लेकिन गुरिल्ला युद्ध और पहाड़ी रणनीति में अनुभव।
दोनों देशों के संबंध और तनावपूर्ण
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही पाकिस्तान सैन्य दृष्टि से अधिक मजबूत है, लेकिन अफगानिस्तान की भौगोलिक स्थिति और तालिबान की लड़ाकू रणनीति उसे सीमा क्षेत्रों में बढ़त दिला सकती है। दोनों देशों के संबंध और तनावपूर्ण हो सकते हैं। सीमा पार आतंकवाद और सुरक्षा मुद्दे फिर चर्चा में आ सकते हैं। चीन, अमेरिका और मध्य एशियाई देशों की नजर इस घटनाक्रम पर बनी हुई है।
डूरंड लाइन पर बढ़ता संघर्ष सिर्फ सीमाई विवाद नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। फसीहुद्दीन फितरत की रणनीति ने अफगानिस्तान को आक्रामक रुख अपनाने का आत्मविश्वास दिया है, लेकिन यह टकराव अगर लंबा चला तो दोनों देशों के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है।







