इस्लामाबाद: आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने बड़ा झटका दिया है। लंबी चर्चा के बावजूद पाकिस्तान और IMF के बीच स्टाफ लेवल एग्रीमेंट नहीं हो सका है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के 7 अरब डॉलर के लोन कार्यक्रम का तीसरा रिव्यू नाकाम हो हो गया है। इस समझौते के बाद पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर की किश्त जारी की जानी थी, जो अब नहीं दी जाएगी।
पाकिस्तान के साथ जारी रहेगी बातचीत- IMF
हालांकि, IMF ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ पॉलिसी पर बातचीत आने वाले दिनों में बातचीत जारी रहेगी, ताकि किश्त के लिए स्टाफ-लेवल के समझौते पर आम सहमति बन सके। IMF ने पाकिस्तान के बड़े राजकोषीय अंतर को लेकर चिंता जताी है।
बाततीच बेनतीजा रहने के बाद IMF की मिशन प्रमुख इवा पेट्रोवा ने कहा कि हालांकि चर्चा में काफी प्रगति हुई है, लेकिन यह आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी। पेट्रोवा ने कहा कि IMF हाल के वैश्विक घटनाक्रमों का पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी *EFF) समर्थित कार्यक्रम पर पड़ने वाले प्रभाव का पूरी तरह से आकलन करेगा।
पाकिस्तान के सामने आर्थिक मुश्किल
IMF ने पाकिस्तान की किश्त ऐसे समय में रोकी है, जब ईरान युद्ध के चलते पाकिस्तान मुश्किल के सामने ऊर्जा संकट मुंह फैलाए खड़ा है। वैश्विक ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं। वहीं, होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के चलते तेल और गैस की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। EFF के तहत 1 अरब डॉलर की चौथी किश्त और रेसिलेंस एंट सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी के लिए (RSF) के तहत 22 करोड़ डॉलर की मंजूरी के लिए स्टाफ स्तर का समझौता 11 मार्च तक हो जाना चाहिए था।
पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार को अगर IMF से लोन नहीं मिलता है तो देश में आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। शहबाज सरकार की योजना आर्थिक विकास को तेज करने की है, लेकिन IMF ने साफ कहा है कि पाकिस्तान अभी ऊंचे आर्थिक विकास को सहन करने की हालत में नहीं है।
यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब पाकिस्तान को खाने का सामान भी आयात करना पड़ता है। बीते साल देश ने 891 मिलियन डॉलर की दालें और 3.7 अरब डॉलर का खाने का तेल आयात किया था। पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने कहा कि युद्ध का महंगाई पर असर नहीं है और अभी यह तय सीमा के अंदर है। हालांकि, लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के चलते ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई का दवाब बढ़ सकता है।







