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कोविड पीड़ितों को मुआवजा: ‘नो-फॉल्ट’ कंपेंसेशन पॉलिसी, न्याय की दिशा में बड़ा कदम या नई चुनौती?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
March 15, 2026
in राष्ट्रीय, विशेष
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delhi corona
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प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क


नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने कोविड वैक्सीन से जुड़े संभावित साइड इफेक्ट्स के मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार को ‘नो-फॉल्ट कंपेंसेशन पॉलिसी’ बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि जब टीकाकरण कार्यक्रम सरकार की ओर से प्रायोजित और प्रोत्साहित किया गया हो, तो उससे होने वाले संभावित नुकसान की जिम्मेदारी भी राज्य की बनती है।

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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी नीति का उद्देश्य उन लोगों को राहत देना है, जिन्हें वैक्सीन के बाद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा है। ‘नो-फॉल्ट’ मुआवजा नीति का मतलब यह है कि पीड़ित को मुआवजा पाने के लिए यह साबित नहीं करना होगा कि गलती किसकी थी, बल्कि केवल यह दिखाना होगा कि नुकसान वैक्सीन से जुड़ा है।

सरकार की जिम्मेदारी पर कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान टीकाकरण अभियान बड़े पैमाने पर सरकार द्वारा चलाया गया था, इसलिए यदि किसी व्यक्ति को उससे गंभीर दुष्प्रभाव हुआ है, तो सरकार को एक स्पष्ट और पारदर्शी मुआवजा व्यवस्था बनानी चाहिए। इससे पीड़ितों को न्याय मिल सकेगा और स्वास्थ्य व्यवस्था में भरोसा भी मजबूत होगा।

क्या है ‘नो-फॉल्ट कंपेंसेशन’ नीति?

‘नो-फॉल्ट’ नीति एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें किसी भी पीड़ित को मुआवजा पाने के लिए डॉक्टर, अस्पताल या वैक्सीन निर्माता की गलती साबित करने की आवश्यकता नहीं होती। यदि यह साबित हो जाए कि नुकसान टीकाकरण के बाद हुआ है और उसका संबंध वैक्सीन से हो सकता है, तो सरकार की ओर से आर्थिक सहायता दी जाती है। कई देशों में वैक्सीन से जुड़े मामलों में ऐसी व्यवस्था पहले से लागू है।

लागू करने में सामने आ सकती हैं चुनौतियां

हालांकि इस नीति को लागू करना आसान नहीं होगा। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में मेडिकल रिकॉर्ड की कमी, रिपोर्टिंग सिस्टम की कमजोरियां और फर्जी दावों की आशंका बड़ी चुनौती बन सकती हैं। कई मामलों में यह तय करना भी मुश्किल होता है कि स्वास्थ्य समस्या सीधे वैक्सीन के कारण हुई है या किसी अन्य बीमारी के चलते।

पारदर्शी व्यवस्था की जरूरत

कानूनी और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार स्पष्ट दिशानिर्देश, मजबूत जांच प्रक्रिया और डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड प्रणाली तैयार करती है, तो इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। इससे वास्तविक पीड़ितों को राहत मिलेगी और गलत दावों पर भी रोक लग सकेगी।

अब केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद एक ठोस नीति का मसौदा तैयार करना होगा, जिसमें मुआवजे की राशि, पात्रता की शर्तें और जांच प्रक्रिया जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल होंगे। यह कदम एक ओर कोविड पीड़ितों को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके क्रियान्वयन को लेकर कई व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने हैं।

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