नई दिल्ली: एनआईए ने हाल में ही लखनऊ, कोलकाता और दिल्ली से गिरफ्तार किए गए सात विदेशी नागरिकों के मामले में मिजोरम सरकार से रिपोर्ट मांगी है। पुलिस की इंटेलिजेंस विंग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इन विदेशियों ने जनवरी के अंत से फरवरी के बीच म्यांमार के चिन राज्य में हथियार और ड्रोन ट्रेनिंग ली थी।
अधिकारी ने बताया कि चिन राज्य सूत्रों के माध्यम से इन विदेशी नागरिकों के खिलाफ भारत विरोधी गतिविधियों के सबूत मिले हैं। लेकिन इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि मिजोरम से म्यांमार की सीमा 404 किलोमीटर लंबी है, जहां विदेशियों का आना-जाना बेहद आसान हो गया है।
क्यों हो रही म्यांमार के रास्ते घुसपैठ?
उन्होंने बताया कि म्यांमार के चिन राज्य में सैन्य जुंटा का प्रभाव काफी कम हो गया है और वहां चिन नेशनल फ्रंट, चिन नेशनल आर्मी और अन्य स्थानीय मिलिशिया समूहों का नियंत्रण बढ़ गया है। इसी कारण निगरानी पूरी तरह संभव नहीं हो पा रही है।
पुलिस के खुफिया विभाग के अधिकारी ने बताया कि बॉर्डर का हिस्सा रही तियाऊ नदी इस समय इतनी उथली है कि बच्चे भी इसे पैदल पार कर सकते हैं। जिससे अवैध आवाजाही और अधिक आसान हो गई है।
विदेशियों को चाहिए होती है विशेष परमिट
भारत सरकार के नियमों के तहत मिजोरम में प्रवेश करने वाले विदेशियों को प्रोटेक्टेड एरिया परमिट की आवश्यकता होती है। जो कि अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मणिपुर, मिजोरम और जम्मू-कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में स्थित विशिष्ट सुरक्षा संवेदनशील क्षेत्रों में जाने वाले सभी विदेशियों के लिए अनिवार्य विशेष यात्रा दस्तावेज है। हालांकि भूटानी नागरिकों को कुछ छूट दी गई है।
खुफिया अधिकारी ने बताया कि हालांकि स्थानीय अधिकारी निगरानी को कड़ा कर रहे हैं, लेकिन राज्य में पहले से मौजूद लोगों को म्यांमार में प्रवेश करने में कोई खास कठिनाई नहीं होती है।
पहले से स्थापित पैटर्न
एनआईए के आंशका है कि गिरफ्तार किए गए सभी सात विदेशी नागरिकों ने यूरोप से ड्रोन म्यांमार के रास्ते भारत में लाने की कोशिश की। हालांकि इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस के खुफिया विभाग के अधिकारी ने बताया कि मिजोरम के रास्ते विदेशी भाड़े के लड़ाकों को म्यांमार जाकर सैन्य प्रशिक्षण देना पहले से ही एक स्थापित पैटर्न बन चुका है।
रिटायर्ड ब्रिटिश कमांडो को किया गया था गिरफ्तार
यह मामला 19 जून, 2024 को आइजोल के लेंगपुई हवाई अड्डे पर रिटायर्ड ब्रिटिश एसएएस कमांडो डैनियल न्यूई की गिरफ्तारी के बाद चर्चा में आया, जब उसके पास पुलिस को एक जिंदा गोली मिली। बाद की जांच से पता चला था कि पश्चिमी देशों के भाड़े के सैनिक मिजोरम के रास्ते म्यांमार जाकर चिन सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण दे रहे थे।
इस बीच भारत सरकार ने भारत-म्यांमार की पूरी 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़ लगाने की योजना की घोषणा की है। मिजोरम पुलिस और खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह कदम सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी और समय पर उठाया गया है।







