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Home विश्व

ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक या नई जंग का आगाज? तेहरान ने दी धमकी

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
March 27, 2026
in विश्व
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us israel attack on iran
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वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान के साथ जंग में अमेरिका की भले ही फजीहत हो रही हो लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकाक्षाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खर्ग द्वीप पर कब्जे की मंशा के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति दो जंगी जहाजों के साथ करीब 4700 मरीन कमांडो को मिडिल ईस्ट की तरफ रवाना कर चुके हैं। इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ सैन्य तनाव बढ़ाने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। जिनमें से कई विकल्प फारसी खाड़ी में स्थित रणनीतिक द्वीपों पर केंद्रित हैं।

कम से कम 6 ऐसे द्वीप पर जिनपर डोनाल्ड ट्रंप की नजर है। एक्सियोस ने खुलासा करते हुए कहा है कि इन द्वीपों का महत्व होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से इनकी नजदीकी की वजह से है। एक्सियोस ने कहा है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप वाकई इन द्वीपों पर कब्जा करने और ईरान को घुटनों पर लाने के इरादे से आगे बढ़ते हैं तो ये एक खतरनाक जंग का आगाज होगा। ये काफी ज्यादा जोखिम भरा होगा। पेंटागन फिलहाल युद्ध को निर्णायक रूप से खत्म करने के लिए सैन्य विकल्पों पर काम कर रहा है जिसमें संभावित जमीनी और बमबारी अभियान भी शामिल है।

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अमेरिका ईरान के किन 6 द्वीपों पर कब्जा करना चाहता है?
खर्ग द्वीप- यह द्वीप ईरान के तट से करीब 25 किलोमीटर दूर है। ईरान का मुख्य कच्चा तेल निर्यात टर्मिनल यही है। यहां से ईरान अपने 90 प्रतिशत से ज्यादा तेल का निर्यात करता है। अमेरिका ने इस युद्ध के दौरान यहां स्थिति ईरानी सैन्य ठिकानों पर बमबारी की है। डोनाल्ड ट्रंप इस द्वीप पर कब्जा करने को लेकर अपनी दिलचस्पी दिखा चुके हैं।

लारक- Axios के मुताबिक लारक द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के सबसे संकरे प्वाइंट पर स्थित है। खर्ग की तरह लारक भी ईरान के तेल उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा केंद्र है। इस द्वीप पर कई बंकर भी हैं जिनसे होर्मुज जलडमरूमध्य और मालवाहक जहाजों पर ना सिर्फ नजर रखी जा सकती है, बल्कि जरूरत पड़ने पर हमले भी शुरू किए जा सकते हैं। लारक में ईरान के कई सैन्य अड्डे और रडार भी मौजूद हैं जो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखते हैं।

अबू मूसा, ग्रेटर तुंब और लेसर तुंब- अबू मूसा, ग्रेटर तुंब और लेसर तुंब पूर्वी फारसी खाड़ी में स्थित छोटे द्वीप हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य का इन्हें प्रवेश द्वार कहा जाता है। इनकी रणनीतिक स्थिति खाड़ी से बाहर निकलने वाले जहाजों पर नियंत्रण रखने में सहायक होती है। अबू मूसा के क्षेत्रीय जल में तेल और गैस के महत्वपूर्ण भंडार मौजूद हैं। एक पर्यटन स्थल होने के साथ-साथ यह अपने समुद्र तटों, जिनमें अल शमाल बीच और अल गल्ला बीच शामिल हैं, वो साफ पानी और समृद्ध समुद्री जीवन के लिए भी जाना जाता है।

इन द्वीप को लेकर विवाद क्या है- ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच इन द्वीपों को लेकर दशकों पुराना विवाद है। अमेरिका की कोशिश इन द्वीपों को कब्जे में लेकर UAE कौ सौंपना हो सकता है। 30 नवंबर 1971 को ब्रिटेन के खाड़ी से हटने से ठीक एक दिन पहले ईरान के अंतिम राजा शाह मोहम्मद रजा पहलवी ने अपनी नौसेना को इन तीन द्वीपों पर कब्जा करने का आदेश दिया था। यूएई, खासकर रास अल-खैमाह और शारजाह के अमीरात इन्हें अपना हिस्सा मानता है और इसे ‘ईरानी कब्जा’ कहते हैं।

ईरान का इन तीनों द्वीपों से रिश्ता क्या है?
ईरान ने 1904 में इन द्वीपों पर नियंत्रण कर लिया था लेकिन ब्रिटिश नौसेना के पहुंचने के बाद उसे हटना पड़ा था। ईरान ने इसके बाद बहरीन को अपने में मिलाने की कोशिश की जिसमें वो नाकाम रहा था। इसके बाद इसने फिर इन द्वीपों की तरफ कदम बढ़ाया। ईरान का तर्क है कि 20वीं सदी में ब्रिटेन के दखल से पहले ये द्वीप ऐतिहासिक रूप से फारसी इलाके थे। यह घटना नवंबर 1971 में फारसी खाड़ी से ब्रिटेन के हटने के बाद हुई। ईरान और शारजाह ने अबू मूसा का संयुक्त रूप से प्रशासन करने और तेल से होने वाली कमाई को आपस में बांटने पर सहमति जताई थी। ईरान और यूएई के बीच विवाद बना हुआ है और Axios ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पेंटागन ने अबू मूसा का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का सुझाव दिया है।

Qeshm द्वीप- यह द्वीप तीर के आकार का है। ये 558 वर्ग मील में फैला है और अमेरिका के निशाने पर यह भी है। प्राकृतिक सुंदरता ने कभी इस द्वीप को पर्यटकों के लिए स्वर्ग बना दिया था। लेकिन अब यह द्वीप एंटी-शिप मिसाइलों, बारूदी सुरंगों, ड्रोन और अन्य हमलावर विमानों का ठिकाना बन गया है। ईरान ने अंडरग्राउंड सैन्य ठिकाने बना रखे हैं जहां हथियारों को रखा गया है। युद्ध के शुरूआत में ईरान ने दावा किया था कि अमेरिका ने इस द्वीप पर मौजूद एक पानी के संयंत्र पर हमला किया था।

सूत्रों ने Axios को बताया है कि पेंटागन ने अबू मूसा पर कब्जा करने का सुझाव दिया है। इस कदम से अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक रणनीतिक पकड़ मिल जाएगी और वहां ईरान की सैन्य क्षमताओं पर लगाम लग सकेगी। हालांकि ये सोचना आसान है लेकिन ऐसा करना अत्यंत मुश्किल और जोखिमभरा है।

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने बुधवार को X पर लिखा कि ईरान की खुफिया जानकारी के मुताबिक ‘ईरान के दुश्मन इस क्षेत्र के किसी देश के समर्थन से ईरान के किसी एक द्वीप पर कब्जा करने के लिए एक ऑपरेशन की तैयारी कर रहे हैं।’ उनका इशारा शायद UAE की तरफ था और शायद वो अबू मूसा द्वीप पर कब्जे की तरफ इशारा कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि ‘अगर वे कोई भी कार्रवाई करते हैं तो उस क्षेत्रीय देश के सभी जरूरी बुनियादी ढांचों को बिना किसी रोक-टोक के लगातार हमलों का निशाना बनाया जाएगा।’

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