नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार बढ़ती ग्लोबल समस्याओं को देखते हुए कंपनियों से बड़ी अपील की है. लेकिन उनकी अपील से कई सवाल खड़े होते हैं कि आखिर वह कंपनियों से वर्क फ्रॉम होम की अपील कर क्यों रहे हैं? उन्होंने कहा कि वर्क फ्रॉम होम के जरिए करोड़ों रुपये का पेट्रोल-डीजल बचा सकते हैं.
यही सबसे कारण है कि एक बार फिर वर्क फ्रॉम होम की चर्चा होने लगी है. दरअसल, वर्क फ्रॉम होम कर्मचारियों की पर्सनल लाइफ के साथ साथ बचत के लिहाज से भी एक अच्छा मॉडल बनता जा रहा है. इतना ही नहीं, इससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि कच्चे तेल के आयात पर होने वाले खर्च में भी कटौती होगी. लेकिन क्या आपने जानते हैं कि इसके केवल फायदे ही नहीं, बल्कि कई नुकसान भी हो सकते हैं.
हकीकत ये है कि आज के दौर में वर्क फ्रॉम होम करना जितना आसान दिखता है, वाकई में है नहीं. वहीं, दूसरी तरफ ‘रिमोट वर्क’ और ‘वर्क फ्रॉम होम’ के बीच टेक्नोलॉजी उलझनें, साइबर स्कैमर्स का खतरा भी बढ़ रहा है. लेकिन, पीएम मोदी का वर्क फ्रॉम होम वाला सुझाव आपके काम करने के अंदाज और देश की अर्थव्यवस्था में सहयोग कर सकता है. इससे पहले भी देश में वर्क फ्रॉम होम का ट्रेंड लोकप्रिय हो चुका है. कोविड-19 महामारी के समय इसका कल्चर काफी आम हो गया था.
कोविड-19 के दौरान शुरू हुआ था ट्रेंड
दरअसल, कोविड-19 महामारी के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार डिजिटल वर्किंग, ऑनलाइन मीटिंग और टेक्नोलॉजी आधारित कामकाज को बढ़ावा देने की बात कही थी. उस समय लॉकडाउन और स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए देशभर की कंपनियों ने बड़े स्तर पर वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाया था, लेकिन वर्तमान की स्थिति को देखते हुए अब पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों, ट्रैफिक और प्रदूषण जैसी समस्याओं के कारण यह मॉडल फिर बहस का विषय बन गया है. वैसे तो भारत में आईटी सेक्टर में इस मॉडल का यूज पहले भी होता था लेकिन इसका असली विस्तार साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान हुआ. लॉकडाउन लगने के बाद लाखों कर्मचारियों ने घर से काम करना शुरू किया.
अब क्यों फिर पड़ रही है इसकी जरूरत?
बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतें
बड़े शहरों में रोज ऑफिस आने-जाने पर कर्मचारियों का बड़ा खर्च होता है. ग्लोबल सिचुएशन की वजह से लगातार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है जिसके कारण मध्यम वर्ग की जेब पर दबाव बढ़ गया है. ऐसे में घर से काम करना कर्मचारियों के लिए आर्थिक राहत माना जा रहा है.
ट्रैफिक और प्रदूषण
दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में लोग रोज कई घंटे ट्रैफिक में बिताते हैं. इससे समय और ऊर्जा दोनों की बर्बादी होती है. वर्क फ्रॉम होम को ट्रैफिक और प्रदूषण कम करने के समाधान के रूप में भी देखा जा रहा है.
ग्लोबल आर्थिक दबाव
दुनिया भर में कंपनियां खर्च कम करने की कोशिश कर रही हैं. ऑफिस स्पेस, बिजली, ट्रांसपोर्ट और अन्य खर्चों में कटौती के लिए कई कंपनियां हाइब्रिड मॉडल पर जोर दे रही हैं.
वर्क फ्रॉम होम के फायदे और नुकसान
घर से काम करने के जितने फायदे हैं उतने नुकसान भी हैं. कई बार जरूरी काम के दौरान कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है जो आपको काम करने में रुकावट बन सकती है.
वर्क फ्रॉम होम के फायदे-
समय की बचत: रोज घंटों का सफर तय करके ऑफिस पहुंचना या ट्रैफिक में फंसने की परेशानी खत्म हो जाएगी.
आर्थिक बचत: पेट्रोल, बाहर का खाना और फॉर्मल कपड़ों पर होने वाले खर्च में भी बचत होगी.
आरामदायक माहौल: आप अपने हिसाब से अपना वर्क स्टेशन सेटअप कर सकते हैं.
वर्क फ्रॉम होम के नुकसान-
अकेलापन: ऑफिस की मीटिंग और आमने सामने बातचीत की कमी. कई बार कुछ काम ऐसे होते हैं जो ऑफिस से ही करना होता है.
वर्क-लाइफ बैलेंस का बिगड़ना: कई बार घर पर रहने के कारण काम के घंटे बढ़ जाते हैं. आपसे उम्मीद की जाती है कि आप घर पर हैं और पूरा समय काम को दे सकते हैं.
साइबर स्कैम: पिछले कुछ सालों में वर्क फ्रॉम होम वाली नौकरी में इजाफा हुआ है जिसके बाद स्कैमर्स एक्टिव हो गए हैं. ऐसे में घर से काम करने पर कुछ बातों का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है. अगर आपको किसी कंपनी से नौकरी के लिए कॉल आता है, तो नौकरी देने के नाम पर सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं मांगते हैं.







