नई दिल्ली। 13 अप्रैल को राजस्थान पुलिस ने छेड़छाड़ के एक मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया. उन पर आरोप है कि उन्होंने दिन-दहाड़े एक सड़क पर बाइक टैक्सी पर बैठी एक महिला का टॉप खींच लिया था.
कुछ दिन बाद जयपुर के मालवीय नगर में राहुल गुर्जर नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया. वह पहले भी कई बार महिलाओं के साथ छेड़छाड़ का आरोपी रह चुका है. इस बार उस पर एक गर्भवती महिला से छेड़छाड़ का आरोप है.
दोनों घटनाओं में महिलाओं के खिलाफ अपराध के अलावा एक और बात समान थी- घटना का कैमरे में कैद हो जाना. इन दोनों मामलों में वीडियो वायरल होते ही लोगों में भारी आक्रोश फैल गया और पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी.
एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमें जैसे ही इन मामलों का पता चला, हमने आरोपियों को पकड़ने में पूरी मेहनत की. साथ ही उन पुलिसवालों पर भी एक्शन लिया, जिन्होंने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया था.” इस बयान से साफ हो गया कि पुलिस में तेज कार्रवाई तभी होती है जब अपराध की घटना कैमरे में कैद होकर वायरल हो जाए.
CCTV से लेकर मोबाइल कैमरे तक, भारत अब उस हकीकत को स्वीकार कर रहा है जिसे महिलाएं सदियों से झेलते आई हैं. इन वीडियो के सामने आते ही यह साफ हो चुका है कि असल में महिलाएं कहीं भी पूरी तरह सुरक्षित जगह नहीं है. न चहल-पहल वाली सड़क पर, न बस-ट्रेन में, न ही उन जगहों पर जो आमतौर पर ‘सुरक्षित’ मानी जाती हैं.
हालांकि, सिर्फ घटना का वीडियो में कैद होना ही सेक्स अपराध रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है. 2023 में दिल्ली में एक बस में एक आदमी सवारियों के सामने खुलेआम अश्लील हरकत कर रहा था. वीडियो वायरल होने के बाद ही कार्रवाई हुई. महिलाओं का कहना है कि ऐसी घटनाएं आम हैं.
इस साल मार्च में दिल्ली कोर्ट ने मेट्रो में एक महिला के बगल में अश्लील हरकत करने वाले व्यक्ति की सजा को बरकरार रखा. मुंबई की लोकल ट्रेनों और पुणे की बस में भी ऐसी ही कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां महिलाओं ने खुद वीडियो बनाकर आरोपियों को पकड़वाया था.
हवाई यात्रा की सुरक्षा की जो कल्पना थी, वह भी टूट गई है. 2023 में एयर इंडिया में एक शख्स के जरिए महिला पर पेशाब करने और इससे पहले जायरा वसीमके साथ उड़ान में छेड़छाड़ के मामले सामने आ चुके हैं. इनसे पता चलता है कि भले ही जगह कितनी भी सुरक्षित क्यों न हो, पीड़िता को खुद आवाज उठानी पड़ती है तब जाकर कार्रवाई होती है.
जयपुर में पर्यटकों के साथ छेड़छाड़ की कई शिकायतें आई हैं. वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने तेजी से एक्शन लिया. सभी जगहों पर एक बात कॉमन है- लोग घटना को फोन से रिकॉर्ड कर लेते हैं लेकिन खुद बीच में पड़कर रोकते नहीं हैं. जयपुर के बाइक टैक्सी मामले में भी यही हुआ था, अपराध कैमरे में कैद हुआ और वीडियो वायरल हो गया.
अगर कभी कोई बीच में आकर रोकता भी है तो वह खबर बन जाती है. 2025 में एक कोर्ट ने कहा था कि बस में छेड़छाड़ होने पर आस-पास के लोग दखल बहुत कम करते हैं. यानी चुप रहना अब आम बात हो गई है. लोगों में डर, कानून पर भरोसा न होना और समाज की सोच, ये सब चुप्पी के कारण हैं.
नतीजा यह है कि अपराधी बिना किसी विरोध के खुलकर हरकत करते हैं. एक बड़ा विरोधाभास यह भी है कि सहमति से साथ बैठे कपलों को पार्क में परेशान किया जाता है. महिलाओं के कपड़ों और व्यवहार पर सवाल उठाए जाते हैं. वहीं, जब सार्वजनिक जगहों पर उनके साथ बिना सहमति छेड़छाड़ होती है तो लोग देखते रहते हैं पर कुछ बोलते नहीं हैं.
मोरल पुलिसिंग तो तेज और जोर-शोर से होती है लेकिन रोज की छेड़छाड़ पर कार्रवाई धीमी होती है. यह खासकर तब तक नहीं होती, जब तक कि वीडियो वायरल न हो जाए.
इन सभी मामलों से एक बात साफ झलकती है कि हमारा सिस्टम अपराध को पहले रोकने के बजाय उसे बढ़ जाने पर ही एक्शन लेता है. वीडियो वायरल होने के बाद ही शिकायतों पर ध्यान दिया जाता है. गुस्सा फैलने के बाद कार्रवाई होती है. जवाबदेही भी तभी दिखती है जब सब कुछ कैमरे में कैद होकर सामने आ जाए.
जयपुर में गर्भवती महिला वाली घटना में भी CCTV फुटेज सामने आने के बाद ही पुलिस ने सख्त कार्रवाई की. अगर वह वीडियो न मिलता तो यह शिकायत भी पुलिस थाने में दर्ज एक साधारण मामला बनकर रह जाती है.
भारत में फिलहाल महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर कानून के जरिए बहस चल रही है लेकिन ऊंचे पदों पर प्रतिनिधित्व देने भर से जमीन पर सुरक्षा नहीं मिल जाती. क्या कोई महिला बिना किसी जोखिम के घर पैदल लौट सकती है, बस ले सकती है, ट्रेन पकड़ सकती है या शहर में घूम सकती है?
फिलहाल इसका जवाब ‘हां’ या ‘नहीं’ में नहीं बल्कि ‘शर्तों के साथ’ है. हालांकि, एक सवाल अभी भी जस का तस बना हुआ है. कैमरों ने इनकार करना मुश्किल जरूर कर दिया है, लेकिन अभी तक उन्हें रोक नहीं बना पाए हैं. भारत आज भी उन यौन दुराचारों का सामना कर रहा है जो साफ दिख रहे हैं, कैमरे में कैद हैं, बार-बार साबित हो चुके हैं. फिर भी तत्काल कार्रवाई के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. जब तक यह स्थिति नहीं बदलती, महिलाओं को लेकर सार्वजनिक जगहें विवादित बनी रहेंगी.







