प्रकाश मेहरा
अयोध्या (स्पेशल डेस्क)। अयोध्या में राम मंदिर की दान राशि में कथित अनियमितताओं के मामले में पहली बड़ी कानूनी कार्रवाई सामने आई है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन गर्ग की शिकायत के आधार पर अयोध्या कोतवाली में 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306, 316(5) और 317(4) के तहत मामला दर्ज किया है। एफआईआर में जिन 8 लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, उनमें 6 कैशियर बताए जा रहे हैं। हालांकि इस कार्रवाई में अभी तक किसी बड़े ट्रस्ट पदाधिकारी या प्रमुख नाम को आरोपी नहीं बनाया गया है।
एसआईटी जांच के बाद हुई कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। एसआईटी ने दान राशि के संग्रहण और उसके लेखा-जोखा से जुड़े दस्तावेजों एवं प्रक्रियाओं की जांच की थी। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मामला मंदिर में आने वाली दान राशि के प्रबंधन और उसके रिकॉर्ड से जुड़ी कथित गड़बड़ियों से संबंधित है। अब पुलिस एफआईआर में नामजद आरोपियों से पूछताछ कर सकती है तथा वित्तीय रिकॉर्ड की भी विस्तृत जांच की जाएगी।
विश्व हिंदू परिषद का कड़ा रुख
वहीं इस पूरे मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी सख्त रुख अपनाया है। अयोध्या में गुरुवार को वीएचपी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन के पांच वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में दान राशि से जुड़े विवाद, एसआईटी रिपोर्ट और दर्ज एफआईआर पर विस्तार से चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार वीएचपी इस मामले में पूरी पारदर्शिता और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही है। संगठन के नेताओं ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए दान राशि से जुड़े किसी भी मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होना आवश्यक है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस जांच का दायरा बढ़ा सकती है। जांच एजेंसियां दान संग्रह, नकदी प्रबंधन, बैंकिंग रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल करेंगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे तथा संभावित गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
राम मंदिर दान राशि से जुड़े इस मामले पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।







