नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा पिछले काफी वक्त से चल रही है. माना जा रहा है कि सितंबर-अक्तूबर के महीने में मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है. इस वक्त सरकार की नजर परिसीमन बिल और वन नेशन, वन इलेक्शन बिल पर है. सरकार की प्राथमिकता इसे मॉनसून सत्र में पास कराने की है. इसके बाद ही मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है. सरकार के पास न तो लोकसभा और न ही राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत है. ऐसे में सरकार मंत्रिमंडल में बदलाव की जल्दीबाजी में नहीं है.
बदलाव में देरी के सारे कारण समझिए
नरेंद्र मोदी कैबिनेट बदलाव में देरी के पीछे दूसरे कारण भी हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दो दिन के आंध्र प्रदेश दौरे पर जाएंगी और एक जुलाई की शाम को लौटेंगी. दूसरी तरफ पीएम नरेंद्र मोदी 1-3 जुलाई तक जापान दौरे पर रहेंगे. चार जुलाई को पीएम राजस्थान दौरे पर रहेंगे. इसके तुरंत बाद पीएम मोदी 6-11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर रहेंगे. केवल 5 जुलाई का दिन ही खाली बचता है.
संसद का मॉनसून सत्र जुलाई के तीसरे हफ्ते से शुरू हो सकता है. माना जा रहा है कि सत्र 20 जुलाई से शुरू हो सकता है. ऐसे में कैबिनेट में विस्तार 20 जुलाई से पहले करना होगा. अगर ऐसा होता है तो नए मंत्रियों के पास सत्र के लिए तैयार होने का वक्त नहीं मिलेगा. हालांकि, एक बार मंत्रिमंडल में फेरबदल संसद सत्र के तुरंत पहले भी हो चुका है.
12 साल में चार बार मंत्रिमंडल में फेरबदल
7 जुलाई 2021 को मोदी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल हुआ था. मोदी 2.0 में हुए इस बदलाव के दौरान 12 वरिष्ठ मंत्रियों को बदल दिया गया है. इसमें रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर जैसे वरिष्ठ मंत्री शामिल थे. इस बदलाव में 36 नए मंत्रियों को शामिल किया गया था. पिछले 12 साल में चार बार मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल हुए हैं. पहला फेरबदल नवंबर 2014 में हुआ था जब 21 नए मंत्रियों को शामिल किया गया था. इसके बाद जुलाई 2016 में 19 नए मंत्रियों को जगह दी गई थी. इस बदलाव में 5 मंत्रियों को हटाया गया था. सितंबर 2017 में 9 नए मंत्रियों को शामिल किया गया था, 4 का प्रमोशन किया गया था जबकि 6 मंत्रियों को हटाया गया था. जुलाई 2021 में 36 नए मंत्रियों को शामिल किया गया था जबकि 12 को हटाया गया था.
कैबिनेट में कितने पद खाली
जॉर्ज कूरियन का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो चुका है और वो अपने पद से इस्तीफा भी दे चुके हैं. रवनीत सिंह बिट्टू बिना किसी सदन के सदस्य बने हुए मंत्री पद पर हैं. माना जा रहा है कि पंजाब चुनाव में उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी को यूपी बीजेपी का चीफ बनाया जा चुका है. एक अन्य राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष नियुक्त किए जा चुके हैं. बीजेपी में एक व्यक्ति एक पद का नियम है.
ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या इन मंत्रियों को मंत्रिमंडल से हटाया जाएगा? क्या पंकज चौधरी को यूपी चुनाव से ठीक पहले मंत्रिमंडल से हटाने का जोखिम सरकार मोल लेगी? चौधरी यूपी शक्तिशाली कुर्मी समुदाय से आते हैं. ऐसे भी उदाहरण है जब चुनाव को ध्यान में रखते हुए विजय सांपला (पंजाब) और जी किशन रेड्डी (तेलंगाना) को उनके राज्यों का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद भी मोदी कैबिनेट में बनाए रखा गया था.
मोदी कैबिनेट विस्तार में इन समीकरणों का रखा जाएगा ध्यान
- पीएम नरेंद्र मोदी ने 21 मई को मंत्रियों के प्रदर्शन का रिव्यू किया था. इस बैठक के दौरान कैबिनेट सचिव ने डिटेल प्रजेंटेशन दिया था. ये बदलाव का बड़ा मापदंड माना जा रहा है.
- युवा चेहरों को दी जाएगी प्राथमिकता. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन 50 साल के नीचे के हैं. बीजेपी की नजर युवाओं पर है. कुछ ऐसा ही नितिन नवीन की टीम में भी देखने को मिलेगा. करीब 8 ऐसे मंत्री हैं जो 70-80 उम्र के हैं. क्या इन्हें भी कैबिनेट में बनाए रखा जाएगा, ये देखना दिलचस्प होगा.
- दो मंत्रियों हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में खत्म हो रहा है. क्या उन्हें फिर से ऊपरी सदन भेजा जाएगा?
- महिलाओं को भी कैबिनेट विस्तार में तवज्जो मिलना तय है. सीसीएस में केवल निर्मला सीतारमण ही एकमात्र महिला मंत्री हैं.
- अगले साल 7 राज्यों में चुनाव होने हैं. क्या उन राज्यों को मिलेगा ज्यादा प्रतिनिधित्व?
- क्या कुछ नौकरशाहों को भी मिलेगा मौका. आरबीआई के गर्वनर शक्तिकांत दास का नाम भी सामने आ रहा है
- ओबीसी समुदाय का कैबिनेट फेरबदल में बड़ा मौका मिल सकता है.







