प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
अयोध्या: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। इसी क्रम में उत्तराखंड के जोशीमठ स्थित ज्योतिर्मठ (ज्योतिष पीठ) के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर टिप्पणी करते हुए मामले में निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई की मांग की है।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि “यदि किसी प्रकार का घोटाला हुआ है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री के कार्रवाई संबंधी बयान पर तंज़ कसते हुए कहा कि कार्रवाई अवश्य होगी, लेकिन उनके अनुसार वास्तविक और कठोर कार्रवाई भविष्य में नई सरकार आने के बाद ही संभव होगी। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज़ हो गई हैं।”
अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद बयान
इससे पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात की थी। इसके बाद शंकराचार्य का यह बयान सामने आया, जिससे मामले को लेकर राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
ट्रस्ट की ओर से स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला। ट्रस्ट के महामंत्री और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के वरिष्ठ नेता चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके इस्तीफे के कारणों और उसके आधिकारिक संबंध को लेकर ट्रस्ट की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राज्य सरकार और संस्थाओं पर सवाल
विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले में राज्य सरकार और संबंधित संस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों या अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि बड़े पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही तय नहीं की जा रही। विपक्ष ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि वित्तीय अनियमितता हुई है तो सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा
मामले को लेकर राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों की ओर से जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया जारी होने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
राम मंदिर से जुड़े इस संवेदनशील मामले ने धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। एक ओर धार्मिक संत निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, वहीं विपक्ष सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। अब सभी की निगाहें जांच के निष्कर्ष और सरकार द्वारा की जाने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।







