नई दिल्ली। अगर आप नौकरी करते हैं और हर महीने आपकी सैलरी से पीएफ (EPF) कटता है, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने EPF से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब नौकरी छूटने के बाद कर्मचारी अपने पीएफ खाते से पहले की तरह पूरी रकम एक साथ नहीं निकाल सकेंगे। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य कर्मचारियों की भविष्य की बचत को सुरक्षित रखना और रिटायरमेंट के समय उन्हें बेहतर आर्थिक सहारा देना है। आइए जानते हैं नए नियम क्या हैं और इनका आप पर क्या असर पड़ेगा।
PF निकासी का नया नियम
पहले नियम था कि अगर कोई कर्मचारी लगातार दो महीने तक बेरोजगार रहता था, तो वह अपने EPF खाते की पूरी राशि निकाल सकता था। लेकिन नए नियम के अनुसार अब नौकरी छूटने पर कर्मचारी केवल 75 प्रतिशत राशि ही निकाल पाएंगे। बाकी 25 प्रतिशत पैसा खाते में जमा रहेगा। इस राशि को तभी निकाला जा सकेगा, जब कर्मचारी लगातार 12 महीने तक बेरोजगार रहेगा। सरकार का मानना है कि कई लोग नौकरी छूटते ही अपना पूरा पीएफ निकाल लेते थे। इससे नई नौकरी मिलने के बाद उनकी रिटायरमेंट बचत काफी कम हो जाती थी। अब खाते में 25 प्रतिशत राशि बनी रहने से उस पर ब्याज मिलता रहेगा और समय के साथ अच्छी बचत तैयार होगी।
नए नियम में एक राहत भी दी गई है। 75 प्रतिशत निकासी की सीमा में कर्मचारी का योगदान, कंपनी का योगदान और दोनों पर मिलने वाला ब्याज भी शामिल होगा। इससे जरूरत के समय कर्मचारियों को पहले से अधिक रकम मिल सकेगी। इसके अलावा, पीएफ एडवांस यानी आंशिक निकासी के नियम भी आसान कर दिए गए हैं। पहले अलग-अलग जरूरतों के लिए कई तरह की श्रेणियां और अलग-अलग शर्तें थीं। अब इन्हें कम करके केवल तीन मुख्य श्रेणियों में कर दिया गया है। साथ ही अधिकांश मामलों में सिर्फ 12 महीने की सदस्यता के बाद एडवांस निकाला जा सकेगा। हालांकि, रिटायरमेंट, स्थायी विकलांगता, कंपनी द्वारा छंटनी, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) या हमेशा के लिए विदेश में बसने जैसी विशेष परिस्थितियों में कर्मचारी पहले की तरह अपने पीएफ की पूरी राशि निकाल सकेंगे।







