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Home राष्ट्रीय

अब कश्मीर छोड़ इन राज्यों पर आतंकियों की नजर! क्यों बदला टेरर ग्रुप्स का खतरनाक गेमप्लान?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 19, 2026
in राष्ट्रीय
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Al Qaeda
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नई दिल्ली। भारत की सुरक्षा एजेंसियों के सामने आतंकवाद का खतरा अब नए रूप में उभर रहा है. लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर तक सीमित रहने वाली आतंकी गतिविधियां अब देश के पश्चिमी हिस्से की ओर रुख करती दिखाई दे रही हैं. हाल ही में गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) द्वारा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक संगठित मॉड्यूल का भंडाफोड़ इस बदलती रणनीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है. सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि आतंकी संगठन अब केवल सीमावर्ती इलाकों में हमले करने तक सीमित नहीं रहना चाहते. उनकी कोशिश देश की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर व्यापक नुकसान पहुंचाने की है.

विशेषज्ञों के अनुसार गुजरात और राजस्थान की भौगोलिक स्थिति आतंकियों के लिए रणनीतिक रूप से अहम मानी जाती है. दोनों राज्यों की पाकिस्तान से अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है, जिससे घुसपैठ की आशंका बनी रहती है. लेकिन सिर्फ सीमा ही वजह नहीं है. इन राज्यों में देश के कई बड़े औद्योगिक और ऊर्जा केंद्र मौजूद हैं. यदि इन क्षेत्रों में किसी तरह का बड़ा हमला होता है तो उसका असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था और जरूरी सेवाओं पर पड़ सकता है.

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देश की आर्थिक रीढ़ को नुकसान पहुंचाने की आशंका

सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यदि किसी बड़े औद्योगिक क्षेत्र, बंदरगाह या ऊर्जा प्रतिष्ठान को निशाना बनाया जाता है तो ईंधन आपूर्ति, बिजली उत्पादन और माल परिवहन जैसी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. इससे रोजमर्रा की जरूरतों की सप्लाई चेन बाधित होने और कई राज्यों में असर महसूस होने की आशंका रहती है.

अब राजनीतिक नहीं, आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश

स्पेशलिस्ट के मुताबिक आतंकी संगठनों की सोच में बदलाव आया है. पहले जम्मू-कश्मीर में होने वाले हमलों का असर मुख्य रूप से सुरक्षा और राजनीतिक माहौल तक सीमित रहता था. अब ऐसे ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है, जहां हमला होने पर देश की अर्थव्यवस्था, निवेश माहौल और औद्योगिक गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ सकता है.

बंदरगाह और रिफाइनरी क्यों हैं संवेदनशील?

गुजरात देश के सबसे अहम समुद्री व्यापार केंद्रों में शामिल है. मुंद्रा और कांडला जैसे प्रमुख बंदरगाहों से बड़ी मात्रा में आयात-निर्यात होता है. इसके अलावा जामनगर में दुनिया के सबसे बड़े तेल रिफाइनिंग परिसरों में से एक स्थित है. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रणनीतिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन पर किसी भी तरह का हमला व्यापक आर्थिक प्रभाव डाल सकता है.

पुरानी घटनाओं से भी मिलते हैं संकेत

पश्चिमी भारत को निशाना बनाने की कोशिश नई नहीं है. वर्ष 2002 में गांधीनगर स्थित अक्षरधाम मंदिर पर हुआ आतंकी हमला और 2008 के मुंबई हमले इस बात की याद दिलाते हैं कि आतंकवादी संगठन पारंपरिक सीमावर्ती इलाकों से आगे बढ़कर देश के महत्वपूर्ण शहरों और तटीय क्षेत्रों को भी निशाना बना चुके हैं. मुंबई हमलों के दौरान आतंकियों ने समुद्री रास्ते का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद तटीय सुरक्षा को मजबूत किया गया. हालांकि सुरक्षा एजेंसियां लगातार ऐसे संभावित खतरों पर नजर बनाए हुए हैं.

ऑनलाइन खरीदारी ने बढ़ाई नई चुनौती

सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती यह भी है कि कई सामान्य उपयोग की वस्तुएं बाजार और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध हैं. आशंका जताई जाती है कि आपराधिक या आतंकी नेटवर्क छोटी-छोटी मात्रा में अलग-अलग स्थानों से सामान खरीदकर संदेह से बचने की कोशिश कर सकते हैं. इसी वजह से जांच एजेंसियां संदिग्ध गतिविधियों, असामान्य खरीदारी के पैटर्न और विभिन्न राज्यों के बीच होने वाले नेटवर्क पर लगातार नजर रख रही हैं.

सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, निगरानी लगातार बढ़ाई जा रही

स्पेशलिस्ट की मानें तो इस बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए सीमावर्ती राज्यों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, ऊर्जा ढांचे और तटीय इलाकों की सुरक्षा को लगातार मजबूत किया जा रहा है. हाल के अभियानों से यह संकेत मिलता है कि एजेंसियां संभावित खतरों का समय रहते पता लगाने और उन्हें विफल करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं.

हालांकि किसी भी संभावित खतरे का आकलन उपलब्ध खुफिया सूचनाओं और जांच के आधार पर किया जाता है. इसलिए ऐसे मामलों में आधिकारिक एजेंसियों द्वारा जारी जानकारी और पुष्टि को ही अंतिम माना जाना चाहिए.

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