नई दिल्ली। जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट (GSO) से रियल-टाइम इमेजिंग करने वाले चुनिंदा देशों की लिस्ट में भारत भी शामिल हो गया है। EOS-05 भारत का पहले अत्याधुनिक इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया गया है। भारत से पहले चीन और अमेरिका इस तरह के अत्याधुनिक रियल-टाइम अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट (GSO) पृथ्वी से करीब 35,786 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। भारत ने शुक्रवार (4 सितंबर, 2026) को तड़के जीएसएलवी एफ17 रॉकेट से जो EOS-05 सैटेलाइट श्रीगरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया है, वह पृथ्वी की इसी कक्षा में स्थापित किया गया है।
एडवांस रियल-टाइम इमेजिंग में सक्षम हुआ भारत
इस अत्याधुनिक EOS-05 इमेजिंग सैटेलाइट की वजह से भारत भी अब विजिबल, इंफ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल बैंड में भी एडवांस इमेजिंग में सक्षमहो गया है। यह सैटेलाइट देश की सुरक्षा, कृषि और आपदा राहत के लिए भी बहुत उपयोगी साबित होने वाला है।
पृथ्वी के घूमने की गति के साथ चलने में सक्षम
यह सैटेलाइट भारत को पृथ्वी की ऐसी कक्षा (जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट) से रियल-टाइम तस्वीरें उपलब्ध कराएगा, जिसके चक्कर लगाने की गति, पृथ्वी की घूर्णन गति (23 घंटे, 56 मिनट, 4 सेकंड) के बराबर है। मतलब, यह इमेजिंग सैटेलाइट धरती के साए की तरह साथ-साथ चलने में सक्षम है।
भारत से पहले चीन और अमेरिका कर रहे इस्तेमाल
- EOS-05 भारत का पहले अत्याधुनिक इमेजिंग सैटेलाइट है, जो जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया गया है। लेकिन, भारत से पहले दो और प्रभावशाली देश इस कक्षा का इस्तेमाल रियल-टाइम इमेजिंग के लिए कर रहे हैं-
- चीन- 2015 के दिसंबर में चीन ने अपना पहला Gaofen-4 इमेजिंग सैटेलाइट जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया था। इसे चीन ने दुनिया का पहला हाई-रिजॉल्यूशन सिविलियन ऑप्टिकल रिमोट-सेंसिंग सैटेलाइट बताया था।
- अमेरिका- अपनी मिलिट्री और मौसम की शुरुआती चेतावनी वाली निगरानी के लिए अमेरिका जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट के माध्यम से ऑप्टिकल और इंफ्रारेड ट्रैकिंग सिस्टम वाले सैटेलाइट का इस्तेमाल कर रहा है।
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट और जियोस्टेशनरी ऑर्बिट
- बाकी देश मुख्य रूप से मौसम संबंधी जानकारी जुटाने और रक्षा जरूरतों के लिए जियोस्टेशनरी ऑर्बिट का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें भारत भी शामिल है।
- जहां, जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट वाले सैटेलाइनट पृथ्वी के ऊपर थोड़ा उत्तर-दक्षिण या पूरब-पश्चिम की ओर खिसक सकते हैं।
- लेकिन, जियोस्टेशनरी ऑर्बिट वाले सैटेलाइट भूमध्य रेखा के ऊपर एक स्थान पर स्थिर नजर आते हैं।
- जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित सैटेलाइट का इस्तेमाल मुख्य तौर पर ऐसे संचार, सर्विलांस और मौसम से जुड़े मिशन के लिए होता है, जिसमें एडवांस इमेजिंग की जरूरत होती है।
- वहीं जियोस्टेशनरी ऑर्बिट वाले सैटेलाइट संचार, मौसम की लगातार निगरानी और सामरिक निगरानी के लिए होता है।
- एक तरह से यह भी कह सकते हैं कि जहां हर जियोस्टेशनरी ऑर्बिट, जियोसिंक्रोनस है, लेकिन प्रत्येक जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट जियोस्टेशनरी नहीं होती।







