नई दिल्ली (पहल डेस्क)। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित गाला डिनर में केवल शाकाहारी व्यंजन परोसे जाने को लेकर उठे विवाद पर योग गुरु रामदेव ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भोजन को धर्म के नजरिए से देखने के बजाय इसे स्वास्थ्य और जीवनशैली के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
रामदेव ने मंगलवार को एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से बातचीत में कहा कि “दुनिया मांसाहारी भोजन से शाकाहारी भोजन की ओर बढ़ी है और अब वीगन जीवनशैली की तरफ भी रुझान बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “दुनिया पहले मांसाहारी भोजन से शाकाहारी भोजन की ओर बढ़ी, और अब दुनिया वीगन जीवनशैली की ओर बढ़ रही है। मुझे लगता है कि जो लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं, वे बौद्धिक दिवालियापन के शिकार हो गए हैं।”
रामदेव ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को क्या खाना है, यह उसकी व्यक्तिगत पसंद का विषय है। हालांकि, उनके मुताबिक विज्ञान और स्वास्थ्य के नजरिए से शाकाहारी भोजन फायदेमंद है और वीगन भोजन को वह उससे भी बेहतर मानते हैं। उन्होंने कहा, “क्या खाना है, यह हर व्यक्ति की अपनी इच्छा होती है। लेकिन विज्ञान और सेहत के नजरिए से शाकाहारी भोजन फायदेमंद है और वीगन भोजन उससे भी बेहतर है। इसलिए इस मुद्दे को धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।”
क्या है पूरा विवाद ?
दरअसल, भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान गाला डिनर का आयोजन किया गया था। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, डिनर में पनीर लबाबदार, गुच्छी मार्मिक, कैरट बीन पोरियल, ठक्कली बेले सारू, मिलेट पुलाव और बीटरूट रायता समेत कई शाकाहारी व्यंजन परोसे गए थे।
गाला डिनर के मेन्यू को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हुई। इसी बीच कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि “80% भारतीय मांसाहारी हैं।”
इसके बाद ब्रिक्स डिनर के मेन्यू और भारत में खान-पान की पसंद को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई। रामदेव ने इस बहस को धार्मिक रंग देने पर सवाल उठाते हुए कहा कि भोजन की पसंद व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विषय है, लेकिन शाकाहारी और वीगन भोजन को स्वास्थ्य तथा जीवनशैली के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए।







