नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत मध्य प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर हैं. जहां उन्होंने शुक्रवार को उज्जैन में आयोजित ‘युवा धर्म संसद-2026’ को संबोधित किया. इस दौरान संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि ‘रिलीजन धर्म नहीं है, धर्म रिलीजन के ऊपर है.’ भागवत ने धर्म को सृष्टि के अस्तित्व से जुड़ा शाश्वत सिद्धांत बताया और कहा, ‘धर्म सभी सुख का कारण है.’
उज्जैन में सेवाज्ञ संस्थानम् द्वारा तीन दिवसीय (17-19 सितंबर) युवा धर्म संसद-2026 अवंतिका का आयोजन हो रहा है. यह आयोजन गीता भवन में किया जा रहा है. RSS प्रमुख मोहन भागवत शुक्रवार को कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथी शामिल हुए. वहीं, इस युवा धर्म संसद में देश के 24 से ज्यादा राज्यों से करीब 1600 से 1700 युवा, छात्र, शिक्षक और धर्माचार्यों ने भी हिस्सा लिया है.
‘रिलीजन धर्म नहीं, धर्म रिलीजन के ऊपर है’
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आमतौर पर धर्म को रिलीजन के अर्थ में समझ लिया जाता है, जबकि दोनों में अंतर है. उनके मुताबिक, रिलीजन किसी विशेष मत, पंथ या धार्मिक परंपरा से जुड़ा हो सकता है, लेकिन धर्म का दायरा इससे व्यापक है. उन्होंने कहा, ‘धर्म की अगर बात करें तो कहते हैं कि यह बुढ़ापे की बात है. लेकिन जो धर्म है वह धर्म अस्तित्व के प्रारंभ से है, अस्तित्व के अंत तक रहता है.’
उन्होंने कहा कि आप उसको मानो या न मानो धर्म के अनुसार सारी बात चलती है. धर्म को समझना है तो पहले मन में जो बातें बैठती हैं उनसे मुक्त होना पड़ेगा. सृष्टि के अस्तित्व से धर्म है, सृष्टि के विलय तक निश्चित चलेगा. सब कुछ उसी से चलता आया है. उन्होंने कहा, ‘मेरे लिए मेरा धर्म मेरे जन्म से निश्चित है, मेरी मृत्यु तक वह रहेगा. धर्म सभी सुख का कारण है.’
‘रिलीजन का अर्थ ही अलग है, यह ‘रिलीगो’ से आया’
RSS प्रमुख ने बताया कि महाभारत के अंत में 5 श्लोक हैं और उसको भारत सावित्री कहते हैं. ‘मातापितृसहस्राणि पुत्रदारशतानि च. संसारेष्वनुभूतानि यान्ति यास्यन्ति चापरे’ इसे महाभारत का सार कहते हैं. जब रिलीज़न धर्म के अनुसार चलते हैं तब रिलीज़न मनुष्य को मुक्ति दिलाता है.जब रिलीजन धर्म को छोड़कर चलते हैं तब फिर सांप्रदायिक कलह होते हैं, धर्म के नाम पर अत्याचार होते हैं.
उन्होंने कहा, ‘इसलिए जो गांठ अपने मन में बैठी है कि ‘रिलीज़न धर्म है’, इसको निकाल देना चाहिए.’ भागवत ने बताया कि रिलीजन शब्द का अर्थ ही अलग है, रिलीजन ‘रिलीगो’ (Religo) से आया है. इसका मतलब बांधना होता है, एक अनुशासन में रखना होता है, उसको कहते हैं रिलीजन. जबकि धर्म बांधता नहीं है, धर्म मुक्त करता है.’







